बीना रिफाइनरी के विस्तार के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया किसानों के विरोध के कारण फिलहाल रुक गई है। एमपीआईडीसी द्वारा भांकरई, आगासौद, दौनमड़ी, पुरैना और हांसुआ गांवों की करीब 500 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन किसानों ने प्रस्तावित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए सहमति देने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी तथा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं जिनकी पूरी कृषि भूमि अधिग्रहण में चली जाएगी और केवल उनके मकान ही बचेंगे। विरोध को देखते हुए भांकरई, पुरैना और हांसुआ गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। किसानों के अनुसार, पहले तय मुआवजा दरें उनकी अपेक्षाओं से काफी कम थीं, जबकि बाद में कलेक्टर गाइडलाइन में वृद्धि के बावजूद वे संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, रिफाइनरी के गेट नंबर एक की ओर स्थित कुछ गांवों में भूमि अधिग्रहण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। बेरखेड़ी टांडा, विल्धई बुजुर्ग, आगासौद और बम्होरी केला सहित कई गांवों की 38.16 हेक्टेयर जमीन बीपीसीएल को सौंपी जा चुकी है, जहां अपेक्षाकृत बेहतर मुआवजा मिलने के कारण विरोध नहीं हुआ। प्रशासन का कहना है कि जिन गांवों में प्रक्रिया रुकी हुई है, वहां आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
