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भोपाल । मध्य प्रदेश में अब धीरे-धीरे सर्दी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। यहां सुबह और रात ठंडी होने लगी है। मौसम विभाग ने प्रदेश में इस बार दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की ठंड का अनुमान जताया है। इन दो महीनों में 20 से 22 दिन कोल्ड वेव की स्थिति रह सकती है। नवंबर के 10 दिन में प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा है। यहां तापमान 10.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में भी सर्दी है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश सिंह के अनुसार, नवंबर में पारा 10 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा। इस साल पिछली बार से ज्यादा सर्दी पड़ेगी। ग्वालियर, उज्जैन और चंबल संभाग सबसे ज्यादा ठिठुरेंगे। यहां कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं भी चलेंगी। मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं। इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है। ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं इसलिए तापमान में गिरावट आती है। वहीं, सर्द हवाएं भी चलती हैं।
डॉ. सिंह ने बताया कि दिसंबर की शुरुआत से ला नीना की स्थिति बनना शुरू हो जाएगी। इससे ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड में ठंड जोर पकड़ेगी। हालांकि, कड़ाके की ठंड का दौर 20 दिसंबर से शुरू होगा। ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। वहीं वर्तमान में पचमढ़ी को छोड़ दें तो बाकी के सभी शहरों में रात का तापमान 13 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच है। वहीं, अधिकतम तापमान भी 32 डिग्री या इससे अधिक बना हुआ है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-चंबल संभाग में दक्षिण-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं, जो अरब सागर से नमी लेकर आ रही हैं। मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि वर्तमान में प्रशांत महासागर में अलनीलो-ला नीनो की स्थिति न्यूट्रल है। वहीं, आईओडी हिंद महासागर में न्यूट्रल है। इस वजह से नवंबर में ठंड का असर ज्यादा नहीं है। पूरे महीने ही ऐसा मौसम रहेगा। सामान्य से ज्यादा तापमान नहीं जाएगा।
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