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महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, मध्यप्रदेश के चेयरमेन भरत बैरागी ने कहा है कि कॉउंसिल ऑफ बोर्डस ऑफ एज्यूकेशन (कोबसे) की तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में हुई चर्चाओं का निश्चित ही शिक्षा जगत को लाभ होगा। साथ ही शिक्षा की दृष्टि से भारत में बदलाव आयेगा। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों में एक योग्यता होती है और हम उस योग्यता को कहाँ जोड़ पा रहे हैं, हम उनको क्या शिक्षा दे रहे हैं, यह देखना बहुत जरूरी है। बच्चों की रूचि के अनुसार ही शिक्षा देना चाहिए और उसके अनुरूप ही शिक्षा नीति होना चाहिए। बच्चों के पास अपनी विधा हो, एक कौशल हो, यह सब शिक्षा से ही आयेगा। नई शिक्षा में आमूलचूल बदलाव कर हम बच्चे को एक योग्य नागरिक बनाये, जिससे भारत में एक समरसता का भाव होगा और वह समाज को पोषक करेगा। बैरागी ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में आये भारत वर्ष के 32 राज्यों के अधिकारियों द्वारा शिक्षा नीति पर की किये गये मंथन से निकला अमृत स्कूल शिक्षा बोर्ड की प्रक्रिया सुधारने का काम करेगा। भरत कॉन्फ्रेन्स के समापन-सत्र को संबोधित कर रहे थे। कॉन्फ्रेंस में फोटो पत्रिका का विमोचन भी किया गया। कॉन्फ्रेंस की चर्चा और निर्णयों को शीघ्र मूर्तरूप दिया जायेगा। कोबसे की प्रेसीडेन्ट एवं नागालेण्ड एज्यूकेशन बोर्ड की चेयरमेन असानो सिकोसे ने कहा कि 51वीं वार्षिक कॉन्फ्रेन्स में जो चर्चा और निर्णय हुए हैं, उनको शीघ्र ही मूर्तरूप दिया जायेगा। महासचिव एम. सी. शर्मा ने कहा कि शिक्षा नीति पर हुई ऑनलाइन और ऑफलाइन चर्चा के निष्कर्ष को शीघ्र ही सभी ओपन बोर्ड को अपने राज्यों में आगामी कार्यवाही के लिए भेजा जायेगा।
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