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भोपाल । बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में शुक्रवार से तीन दिवसीय तितली सर्वे का काम प्रारंभ हो गया है। नौ रेंज में 60 वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ वनकर्मी 20 कैम्प में तितली की विभिन्न प्रजातियों को एप में कैद किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र में बायोडायवर्सिटी व तितलियों की प्रजाति ज्ञात करना है।
जनसंपर्क अधिकारी गजेन्द्र द्विवेदी ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि टाईगर रिजर्व प्रबंधन अनुसार बांधवगढ़ के सभी 9 रेंज (कोर व बफर रेंज) में यह सर्वेक्षण का काम चलेगा। जानकारी अनुसार 1536 वर्ग कि.मी. में फैले बांधवगढ़ के भीतर करीब 70 तितलियों की प्रजाति पाई जाती हैं। खासबात यह है कि टीम में शामिल नेचर्लिस्ट, बीटगार्ड व श्रमिकों के साथ कैम्प में रहेंगे। जंगल के भीतर दलदली व जल स्त्रोतों के समीप पहले से ही तितली के अनुकूल एरिया को चिन्हित कर लिया गया था। शुक्रवार की सुबह कैम्पों से सर्वे टीम जंगल के लिए रवाना हुई। मौके पर ही मिली तितली प्रजाति को एप में स्टोर किया गया। सर्वेक्षण के आखिरी दिन 22 सितंबर को सर्वे की रिपोर्ट फाइनल की जायेगी।
उप संचालक पी.के. वर्मा ने बताया कि शुक्रवार की सुबह सर्वे टीम को पेट्रोलिंग कैम्प के लिए रवाना किया गया है। एक कैम्प में तीन वन्यजीव विशेषज्ञ रहेंगे। एक कैम्प में तीन विशेषज्ञों के अलावा बीटगार्ड व दो सुरक्षा श्रमिक को रखा गया है। साथ ही वाइल्ड लाइफ संस्था की मदद ली गई है। ये सर्वे टीम जंगल में ही वन श्रमिकों के साथ रहेगी। सुबह से पैदल चलकर तितलियां के रहवास वाली जगह में पहुंचेगी।
बांधवगढ़ में पहली बार तितलियों का सर्वेक्षण हो रहा है। इसके पूर्व यहां अनुमानित 70 से अधिक प्रजातियां पाई जाती थीं। इस सर्वे के बाद बांधवगढ़ में बाघ, हाथी जैसे विशालकाय जीव के अलावा यहां की जैवविविधता की खासियत को सभी के समक्ष लाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही वन व वन्य जीवों के प्रति जन जागरूकता का उद्देश्य भी है। एक बार मैपिंग हो जाने के बाद यह उपलब्धि भी जैवविविधता में जुड़ जाएगी।
क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व उमरिया गौरव चौधरी ने बताया कि अलग-अलग कैम्प में डब्ल्यूएनसी की टीमें हैं। वे कैम्प एरिया में जाकर देखेगी, किस क्षेत्र में तितली की कौन सी प्रजाति है। सर्वे के बाद तितली की बायोडायवर्सिटी क्या है, इसका एक रिकार्ड भी बनाया जाएगा। सर्वे का कार्य ऐप के माध्यम से किया जा रहा है।
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