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सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में डायलिसिस की सात नई मशीनें खरीदी गई हैं। इसके साथ अब यहां मशीनों की संख्या 14 हो गई है। फिलहाल इन्हें इंस्टॉल करने का काम चल रहा है। कुछ ही दिनों में यह काम करने लगेंगी। यह एमवायएच से बड़ी डायलिसिस यूनिट होगी। एमवाय में आठ डायलिसिस मशीनें हैं।अभी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में सात मशीनों में से एक का इस्तेमाल संक्रामक बीमारी से ग्रसित मरीज के डायलिसिस के लिए किया जाता है। कई बार मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर मना करना पड़ता है। सुपर स्पेशिएलिटी के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला ने बताया कि अभी एक दिन में औसतन 25 मरीजों का डायलिसिस हो पाता है। मशीनों की संख्या बढ़ने से हम 50 से ज्यादा मरीजों का रोजाना डायलिसिस कर पाएंगे।अस्पताल में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा अरोरा तिवारी ने बताया कि किडनी ऐसा अंग है, जिसमें अगर खराबी आ रही है तो 50 फीसदी खराबी होने तक लक्षण सामने नहीं आते हैं। शोध में पाया गया है कि 12 से 16 प्रतिशत मरीजों में से सिर्फ एक या दो प्रतिशत लोगों में ही लक्षण सामने आते हैं और वे इलाज करवाते हैं। यानी 10 से 14 प्रतिशत लोगों को बीमारी की प्रारंभिक स्थिति के बारे में पता ही नहीं होता है, इसलिए जरूरी है कि समय रहते लक्षणों को पहचाना जाए, ताकि बीमारी को प्रारंभिक स्थिति में पकड़ लिया जाए। ज्यादातर लोगों का मानना है कि मोटापे से सिर्फ हार्ट संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है, लेकिन ऐसा नहीं है।इससे किडनी की रक्त को फिल्टर करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। मोटापे के कारण यह क्षमता कम होने लगती है। व्यक्ति को क्रोनिक डिसीज हो सकती है। दर्द निवारक गोलियों का अधिक सेवन करने पर भी किडनी संबंधी परेशानी का डर रहता है। मूत्र ज्यादा या कम आना, जलन होना, लालपन या झाग, चेहरे या हाथ-पैर में सूजन, कम उम्र में बीपी, बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन या अनियंत्रित मधुमेह हो तो सतर्क हो जाएं। आमतौर पर देखा गया है कि लंबे समय तक यूरिन को रोक कर रखना और कम पानी पीने वाले लोगों में किडनी संबंधी समस्याएं देखी गई हैं। डिहाइड्रेशन से यूरिन इन्फेक्शन की रिस्क भी बढ़ जाती है।
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