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श्योपुर । कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक चीता शावक की मौत हो गई है। पिछले सप्ताह इस शावक की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया था, तभी से विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था। सोमवार को शावक की एकाएक तबियत खराब हुई, उसका आपातकालीन उपचार किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। कूनो के अधिकारियों ने सोमवार रात 8:30 बजे प्रेस नोट जारी कर इसकी पुष्टि की है। यह शावक मादा चीता गामिनी के पांच शावकों में से एक था। अब गामिनी के चार शावक बचे हैं।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और सिंह परियोजना के संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि गत 29 जुलाई की शाम 6.30 बजे नियमित निगरानी के दौरान मादा चीता गामिनी के पांच शावकों में से एक शावक अपने शरीर के पिछले हिस्से को उठाने में असमर्थ दिखाई दे रहा था। निगरानी के दौरान थोड़ी देर बाद शावक सम्पूर्ण पिछले हिस्से को घसीट कर चलता हुआ दिखाई दिया। शावक को तत्काल रेस्क्यू कर चिकित्सालय लाकर जांच की गई, जिसमें शावक की रीढ़ की हड्डी में फ्रेक्चर पाया गया। हालांकि, शावक को उपचार कर सघन निगरानी में रख जा रहा था, लेकिन सोमवार सुबह शावक की एकाएक तबियत खराब हुई, जिसका आपातकालीन उपचार किया गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद मृत्यु का कारण पता लगेगा।
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी चीता परियोजना के तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से 20 चीते लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बसाए गए थे। इनमें से अब तक सात चीतों की मौत हो चुकी है। कूनो में अब 13 वयस्क चीते और 12 शावक स्वस्थ एवं सामान्य हैं। वयस्क चीतों को टिक एवं अन्य परजीवी संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक उपचार किया गया है। सभी चीतों की नियमित निगरानी की जा रही है।
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