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एम्स (AIIMS) भोपाल हो या पीजीआई दोनों संस्थान देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्थाएं हैं। दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। मैंने भोपाल के बारे में काफी कुछ सुना है। मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि एम्स भोपाल को लोग एक ऐसे मेडिकल सेंटर के रूप में जानें, जहां सामान्य उपचार से लेकर उच्च स्तरीय सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट भी सुलभता से मिले। यह कहना है एम्स के नवनियुक्त निदेशक डॉ. अजय सिंह का। गौरतलब है कि शुक्रवार को राजधानी भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में डेपुटेशन के आधार पर डॉ. अजय सिंह को नियुक्त किया गया। वे फिलहाल नोएडा के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ चाइल्ड हेल्थ में डायरेक्टर हैं। डॉ. सिंह लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में ही पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के एचओडी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाहे पीजीआई हो या एम्स सभी संस्थान के चार स्तंभ होते है । पेशेंट केयर, टीचिंग, शोध और सामाजिक बेहतरी के लिए कार्य। मैं यहां हूं तो इन्हीं चार स्तंभों के आसपास काम करता हूं, वहां भी मेरा फोकस यही होगा। एम्स में सर्दी जुकाम बुखार जैसे मरीजों की भीड़ पर उन्होंने कहा कि यह सही है कि एम्स सुपर स्पेशियलिटी संस्थान है, लेकिन किसी मरीज को मना नहीं किया जा सकता। इसके लिए फैमिली मेडिसिन डिपार्टमेंट होता है, जिसे मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेरीफेरी में बेहतर ट्रीटमेंट मिले तो एम्स पर बोझ कम हो जाएगा। एम्स भोपाल के डायरेक्टर से डॉ. सरमन सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद एम्स रायपुर के डायरेक्टर डॉ.नितिन नागरकर को भोपाल एम्स का भी प्रभार दिया गया था। अब केन्द्र सरकार ने करीब सात महीने बाद डॉ. अजय सिंह को डेप्युटेशन पर 30 जून 2028 तक के लिए नियुक्त किया है।
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