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जबलपुर/भोपाल । कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के दुष्कर्म व हत्या के मद्देनजर मध्य प्रदेश में चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर मंगलवार को मप्र उच्च न्यायालय ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की युगलपीठ ने चिकित्सकों के हड़ताल वापस लेने के फैसले की तारीफ की। साथ ही अदालत ने अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
दरअसल, गत नौ अक्टूबर को कोलकाता में हुई घटना के बाद देशभर में आक्रोशत डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हड़ताल कर दी थी। मध्य प्रदेश में चिकित्सक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे, जिससे मरीजों को दिक्कत होने लगी थी। मरीजों की परेशानी को देखते हुए उच्च न्यायालय में चिकित्सकों की हड़ताल के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर गत शनिवार को सुनवाई हुई थी। इस दौरान कोर्ट ने हड़ताल को अवैधानिक बताया था और हड़ताल खत्म करने का आदेश देते हुए चिकित्सकों को वापस लौटने को कहा था। हाई कोर्ट की फटकार के बाद शनिवार को जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त कर दी थी, लेकिन डॉक्टर्स ने ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा-व्यवस्था सुनिश्चित करने गुहार लगाई थी। इस पर हाई कोर्ट ने कहा था कि पहले हड़ताल समाप्त करें। इस मुद्दे पर 20 अगस्त को सुनवाई करेंगे।
मंगलवार को चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने चिकित्सकों के हड़ताल वापस लेने के फैसले की तारीफ की, साथ ही कहा कि हम चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। इस दौरान डॉक्टर्स के अधिवक्ता महेंद्र पटेरिया ने कहा कि चिकित्सक संगठन सुरक्षा संबंधी सुझाव देने के लिए थोड़ा वक्त चाहते हैं। याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक पांडे ने बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर डॉक्टरों की वह मांग जो स्टेट लेवल की है और उस पर सुनवाई अगर सुप्रीम कोर्ट में नहीं हो पाती है तो बची हुई मांगों को लेकर डॉक्टर अपनी बात 27 अगस्त को रख सकते हैं। हम उनकी बातें सुनेंगे।
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