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नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा और चैटी चांद के मौके पर बुधवार रात राजधानी के अटल पथ पर अभा कवि सम्मेलन का आयोजन चल रहा है। इसमें देशभर से कवि आए हैं। जिन्हें सुनकर हजारों श्रोता रोमांचित हो रहे हैं। रात 3 बजे तक कवि सम्मेलन चलता रहा।कर्मश्री' संस्था ने 23वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया है। संस्था के अध्यक्ष और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा की मेजबानी में आयोजित इस कवि सम्मेलन का शुभारंभ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश महामंत्री संगठन हितानंद शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी, पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, बीडीए अध्यक्ष कृष्णमोहन सोनी, उपाध्यक्ष लिली अग्रवाल एवं सुनील पांडेय, वरिष्ठ नेता चेतन सिंह आदि की मौजूदगी में हुआ।वीर रस के दिल्ली से आए कवि हरीओम पंवार ने अपनी प्रस्तुति दी कि 'पैंरों में अंगारे बांधे, सीने में तूफान भरे, आंखों में दो सागर आंजे, कई हिमालय सीस धरे'। 'मैं धरती के आंसू का संत्रास नहीं तो क्या गांऊं, खूनी तालीबानों का इतिहास नहीं तो क्या गाऊं'...। यह सुनकर श्रोता रोमांचित हो उठे।पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त दिल्ली से आए कवि डॉ. सुनील जोगी ने प्रस्तुति दी कि 'भीड़ में दुनिया के पहचान बनाए रखना, घर में खुशियों की इक दालान बनाए रखना। हपने होठों पे ये मुस्कान बनाए रखना और इस दिल में हिन्दुस्तान बनाए रखना'।कवि सम्मेलन के आरंभ में जबलपुर से आई कवियित्री मणिका दुबे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर शुरुआती प्रस्तुति दी। बाराबंकि से आए हास्यरस के कवि विकास बोखल ने अपनी हास्यरस की कविता 'हाथ जोड़ डॉक्टर से बोल पड़ा है मरीज, आप मेरे सपने हसीन कर दीजिए, जीवन हमारा यहां नीरस सा हो गया इसे थोड़ा मीठा, थोड़ा नमकीन कर दीजिए'...से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।मंच संचालन कर रहे सर्वरस के कवि देवास से आए शशिकांत यादव ने अपनी चुटीली रचनाओं से भी काव्यरस की जमकर बौंछार की।
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