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बालाघाट। जिले में रविवार को एक बाघ घायल हालत में मिला था। उसके शरीर पर कई जगह घाव भी नजर आए। कान्हा टाइगर रिजर्व के अमले ने घायल बाघ को रेस्क्यू कर इलाज करने की कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रविवार शाम को उसकी मौत हो गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को कान्हा नेशनल पार्क की सीमा से लगे कोहका गांव में यह बाघ जख्मी हालत में नजर आया था। वह दिनभर तालाब के किनारे बैठा रहा। चल भी नहीं पा रहा था। उठकर चलने की कोशिश करता, लेकिन लड़खड़ाकर फिर वहीं बैठ जाता। जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी मिली, वहां भीड़ जुट गई थी। दोपहर में जानकारी मिलने के बाद वन विभाग और कान्हा नेशनल पार्क के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। वन अमले ने दो हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उसे लिफ्ट करने ही वाले थे कि पता चला कि बाघ की सांसें थम चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि बाघ की उम्र करीब 13 से 14 वर्ष थी। उसे देखकर ऐसा लगा कि उसकी उम्र बहुत ज्यादा है और वह कई दिनों से भूखा है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ के शरीर पर चोट भी थी। अधिकारियों ने आशंका जताई कि वह दूसरे बाघ या किसी अन्य जानवर से संघर्ष में घायल हो गया था। उसकी हालत ऐसी नहीं थी कि वह चोट सह पाता। लिहाजा उसने दम तोड़ दिया।
कान्हा टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि बाघ वृद्धावस्था में था। वह अपनी अंतिम अवस्था में था। वह अपना सिर भी नहीं उठा पा रहा था। उसकी रिकवरी की कोई उम्मीद नहीं था। उन्होंने बताया कि बाघ को तालाब से बाहर निकालने की काफी कोशिश की गई, लेकिन वह दो कदम भी नहीं चल पा रहा था। उसके केनाइन खत्म हो गए थे।
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