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भोपाल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव रजनीश जैन ने कहा है कि संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) शैक्षणिक गुणवक्ता और उत्कृष्टता के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण और आवश्यक है। यह आईडीपी शिक्षा का विज़न डाक्यूमेंट है।
यूजीसी सचिव जैन गुरुवार को भोपाल में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में आयोजित इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान फॉर हायर एजूकेशन इंस्टीट्यूशन पर एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग एवं विद्याभारती उच्च शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।
जैन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) की रूपरेखा तैयार की है। इससे शिक्षण संस्थान अपने लक्ष्यों और बुनियादी ढ़ाचे को बेहतर बना सकते है। आईडीपी उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। संस्थागत विकास योजना का मूल उद्देश्य शिक्षण संस्थानों की गुणवक्ता और बुनियादी ढ़ाचे को बेहतर बनाकर विद्यार्थियों को एक सफल नागरिक बनाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को संस्थागत विकास योजना तैयार करना अनिवार्य होगा।
कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थाओं के लिए संस्थागत विकास योजना पर देश में पहली बार इस तरह की कार्यशाला आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय की यह जिम्मेदारी है कि अकादमिक दृष्टिकोण से विश्वविद्यालय के स्तर का मानक तैयार करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान को अपनी कमजोरी और ताकत की जानकारी होना चाहिए। विश्वविद्यालयों के कुलपति और महाविद्यालयों के प्राचार्य एक समयबद्ध रणनीति तैयार करें। अपने विश्वविद्यालय का विज़न क्या है, इसकी जानकारी होना आवश्यक है। अपने संस्थान के लिए टाइमलाइन तय करें। नियमित अंतराल में पाठ्यक्रम में बदलाव होना चाहिए और उन विषयों का समावेश होना चाहिए, जो विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हों। प्रायोगिक प्रशिक्षण के लिए स्वयं पहल करें। सभी संस्थान ग्रीन कैम्पस को प्रोत्साहित करें।
मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान यदि एक उचित प्रणाली के तहत चेक लिस्ट अपडेट करें, तो स्वाभाविक रूप से संस्थागत विकास योजना सफल होगी।
कार्यशाला में एडमिशन एण्ड फी रेगुलेटरी कमेटी के अध्यक्ष प्रो.रविन्द्र कन्हारे, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयोजक डाँ. शशिरंजन अकेला, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे।
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