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उज्जैन। गंगा दशहरा के अवसर पर रविवार को विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भगवान महाकाल के शीश पर मां गंगा को धारण कराया गया, साथ ही मोगरे का हार अर्पित कर पगड़ी पहनाई गई। भगवान महाकाल के इस दिव्य रूप के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।
परम्परा के मुताबिक रविवार तड़के 04 बजे महाकालेश्वर मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारी ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर पंचामृत और फलों के रस से जलाभिषेक किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन, केसर अर्पित की गई। बाबा महाकाल को नवीन मुकुट, मुंड माला धारण करवाने के बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
गंगा दशहरे की तिथि एवं रविवार के संयोग पर भस्म आरती में भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। उनके शीश पर मां गंगा को अवतरित किया गया, साथ ही मोगरे की सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला अर्पित की, जिसे सभी श्रद्धालु देखते ही रह गए। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्री महाकाल के नारे लगाए, जिससे पूरा मंदिर गुंजायमान हो गया।
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