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कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले भोपाल के करोंद में 10 जून से शिवपुराण कथा सुनाएंगे। कथा 14 जून तक चलेगी। कथा के लिए 50 हजार स्क्वेयर फीट में 3 वॉटरप्रूफ डोम बनाए जा रहे हैं, जबकि 200 एकड़ में पार्किंग रहेगी। ताकि, श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। कथा में लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसलिए तैयारियां भी इसी हिसाब से की जा रही है। पानी, पार्किंग, सुरक्षा, ट्रैफिक पर खास फोकस है।चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि कथा में देशभर से लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। स्थल पर सभी श्रद्धालुओं के बैठने के लिए 50 हजार वर्ग फीट में 3 वॉटरप्रूफ डोम बनाए जा रहे हैं। इनमें मेन रोड से कुल 11 गेट से एंट्री होगी। इसके लिए कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। जहां पुलिस और वालेंटियर्स व्यवस्था संभालेंगे।श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था ना हो, इसके विशेष इंतजाम किए गए हैं। रूद्राक्ष वितरण को लेकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी रहेगी। आमंत्रण पत्र पर दिए गए QR कोड को स्कैन एवं मिस्ड कॉल कर रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। पंजीयन के पश्चात पं. मिश्रा द्वारा अभिमंत्रित रूद्राक्ष घर-घर बांटे जाएंगे। मंत्री सारंग ने बताया कि भोपाल के बाहर के श्रद्धालुओं के घरों में कोरियर के माध्यम से रूद्राक्ष पहुंचाए जाएंगे। वहीं, भोपाल शहर में आयोजन समिति खुद घरों में जाकर रूद्राक्ष देंगी।पांच दिवसीय कथा में शामिल होने आ रहे भोपाल सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था के लिए 250 से अधिक सामाजिक संगठन धर्मशालाओं में व्यवस्था करेंगे। कथा स्थल पर भी नाश्ते, पेयजल, शरबत व चिकित्सा शिविरों की भी व्यवस्था की जाएगी।भोपाल में पहली बार कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले की शिव महापुराण कथा आयोजित की जा रही है। इस पांच दिवसीय कथा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के भोपाल आने का अनुमान है। यही कारण है कि कथास्थल पर फूली वेंटिलेटेड पंडाल का निर्माण किया गया है। इस पंडाल में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं के आने के साथ ही आयोजन स्थल पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के भोजन व पार्किंग के साथ ही चिकित्सा की भी व्यवस्था की जाएगी। श्री शिव महापुराण कथा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े, इसलिए नरेला उत्सव समिति द्वारा विभिन्न व्यवस्था समितियों का गठन किया गया है, जो कि पंडाल, पेयजल, भोजन, यातायात, स्वास्थ्य, प्रचार से लेकर प्रशासनिक समन्वय तक व्यवस्थाएं संभालेंगी। सभी समितियों के समन्वय के लिए 1 नियंत्रण कक्ष होगा।
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