Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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यूपी कैबिनेट ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दो महत्वपूर्ण फैसले लिए। फर्जी डिग्री प्रकरण में जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद को परिसमापन के लिए मंजूरी दी गई, जबकि आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ को ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस संचालन की अनुमति मिली। जेएस विश्वविद्यालय ने बीपीएड पाठ्यक्रम में फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां जारी कीं, जिससे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। योगी सरकार ने परिसमापन के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के सीमित संचालन हेतु त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति भी गठित की। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को एलओपी जारी करने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे। इस कदम से राज्य में शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और नियमों के पालन का संदेश मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सख्त कार्रवाई अन्य निजी विश्वविद्यालयों को भी नियमों के पालन के लिए सचेत करेगी।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) ने हाल ही में कैंपस में लगे मोदी विरोधी नारों को लेकर विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। छात्रसंघ ने कहा कि यह पूरी कवायद विश्वविद्यालय की छवि खराब करने और छात्रों के उत्पीड़न को तेज करने की एक संगठित कोशिश है। उन्होंने याद दिलाया कि 5 जनवरी 2020 को नकाबपोश हथियारबंद हमलावरों ने जेएनयू परिसर में घुसकर साबरमती हॉस्टल और अन्य स्थानों पर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। उस रात को शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर खुला हमला किया गया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। JNUSU ने सवाल उठाया कि कोमल शर्मा और एबीवीपी के वे गुंडे कहां हैं, जिन्होंने उस हमले की योजना बनाने और अंजाम देने की बात स्वीकार की थी। छात्रसंघ ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस, जो छोटे-से विरोध पर भी तेज़ी से कार्रवाई करती है, 5 जनवरी 2020 के मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान विवाद के जरिए छात्रों की आवाज दबाने और विश्वविद्यालय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। यह विवाद उमर खालिद और शरजील इमाम की सुप्रीम कोर्ट में जमानत अस्वीकृत होने के बाद छात्रों द्वारा लगाए गए नारों के वीडियो के वायरल होने के बाद उठा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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छत्तीसगढ़ में शादी के बाद मायके से ससुराल जाने वाली करीब 10 लाख महिलाएं मतदाता सूची से बाहर हो गई हैं। घर और पहचान बदलने के कारण इन महिलाओं का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हो पाया। रायपुर जिले में ही लगभग 1 लाख महिलाओं के नाम गायब हैं। कुल 2,12,30,737 मतदाताओं में से 27 लाख 50 हजार से अधिक नाम काटे गए हैं, जिनमें शिफ्ट, मृत्यु और डूप्लीकेट मामले शामिल हैं। प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अब इन महिलाओं को अपने नाम दोबारा जोड़वाने के लिए जोन कार्यालयों का चक्कर लगाना होगा। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 22 जनवरी तक चलेगी और सत्यापन 14 फरवरी तक होगा। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी। सबसे बड़ी वजह शादी के बाद पता बदलना और सिस्टम में गलत एंट्री होने के कारण नाम कट जाना बताया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला केवल काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क पर दुर्घटनाओं का भी गंभीर खतरा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि “सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह कोई कैसे पहचान सकता है?” सुनवाई में कुत्तों के मूड, काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे मुद्दे भी उठाए गए। आवारा कुत्तों के पक्ष में पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मंदिर और सार्वजनिक जगहों पर उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा, और काटने वाले कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बस कुत्तों को काउंसलिंग देना बाकी रह गया है, ताकि वे वापस छोड़े जाने पर किसी को काट न सकें। यह मामला 28 जुलाई 2025 को संज्ञान में आया था और अब तक कुल पांच सुनवाई हो चुकी हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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महाराष्ट्र में नगर परिषद स्तर पर BJP के कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अकोट नगर परिषद में भाजपा ने AIMIM के साथ और अंबरनाथ में कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिलकर अध्यक्ष पद हासिल किया, जिसके बाद पार्टी लाइन पर सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि भाजपा कभी भी कांग्रेस या AIMIM के साथ गठबंधन नहीं कर सकती और ऐसे समझौते पार्टी नियमों का घोर उल्लंघन हैं। उन्होंने बताया कि इन गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं और जिम्मेदार नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सीएम फडणवीस ने यह भी साफ किया कि इन गठबंधनों को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की कोई मंजूरी नहीं थी और स्थानीय स्तर पर लिया गया एकतरफा फैसला अनुशासनहीनता है। वहीं इस मुद्दे पर विपक्ष ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि सत्ता पाने के लिए भाजपा किसी के साथ भी हाथ मिला सकती है, जबकि शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे गठबंधन धर्म और ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के नारे के खिलाफ बताया। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
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सोमनाथ मंदिर के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखा पत्र साझा करते हुए दावा किया कि आज़ाद भारत में सोमनाथ मंदिर के प्रति सबसे नकारात्मक रवैया खुद नेहरू का था। सांसद का आरोप है कि नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 के पत्र में सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक कथाओं को “पूरी तरह झूठा” बताते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण से दूरी बनाई और पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश की। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि नेहरू न केवल सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे, बल्कि उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह दी थी। साथ ही मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर विदेशों में भारत की छवि खराब होने की बात कही और मीडिया कवरेज सीमित रखने के निर्देश दिए। सांसद ने यह भी दावा किया कि नेहरू ने सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से इनकार कर दिया था। इन आरोपों के बाद सोमनाथ मंदिर, नेहरू की नीतियों और धर्मनिरपेक्षता को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है, हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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कर्नाटक के हुबली में बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता के साथ कथित तौर पर पुलिस द्वारा बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केशवपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र की इस घटना से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान महिला के साथ अनुचित व्यवहार हुआ, हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि महिला ने स्वयं सहयोग नहीं किया। पूरे मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही है। पुलिस के अनुसार, कांग्रेस पार्षद सुवर्णा कल्लाकुंतला की शिकायत पर महिला को हिरासत में लिया गया था। मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान हुए विवाद के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस कमिश्नर एन. शशिकुमार ने बताया कि गिरफ्तारी के समय महिला ने विरोध करते हुए खुद कपड़े उतार लिए, जबकि वैन में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। पुलिस का यह भी दावा है कि महिला पर पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस घटना के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं, वहीं प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।
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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की शिकायत पर देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज FIR के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उन पर किए गए आपत्तिजनक कमेंट पुलिस जांच के दायरे में आ गए हैं। आरोप है कि अंकिता के नाम का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ पोस्ट के जरिए उत्तराखंड में दंगे भड़काने और भाजपा की छवि खराब करने की साजिश रची गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सबसे पहले उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने ऐसे पोस्ट शेयर किए या विवादित टिप्पणियां कीं। अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 में सामने आया था, जब ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता लापता हुई और बाद में उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों पर हत्या के आरोप लगे थे, जो फिलहाल अदालत में विचाराधीन हैं। अब सोशल मीडिया विवाद, वीआईपी एंगल, SIT जांच, कोर्ट के निर्देश और 11 जनवरी को प्रस्तावित ‘उत्तराखंड बंद’ के ऐलान के चलते यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी रूप से चर्चा में आ गया है।
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