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उज्जैन । सावन-भादौ मास में निकलने वाली सवारियों की क्रम में भाद्रपद मास के प्रथम सोमवार को विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की छठी सवारी पूरे प्रोटोकॉल और धूमधाम के साथ निकलीं। भगवान अवंतिकानाथ ने पालकी में सवार होकर नगर का भ्रमण किया और अपनी प्रजा का हाल जाना। इस दौरान भगवान महाकाल ने छह स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए। कृष्ण जन्माष्टमी और बाबा महाकाल की सवारी के सुयोग पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था दिखाई दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री शर्मा भगवान महाकाल की सवारी में भी शामिल हुए।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष विभाष उपाध्याय, विधायक महेश परमार, महापौर मुकेश टटवाल, वरिष्ठ आईपीएस विजय कटारिया, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भगवान महाकाल के दर्शन कर पालकी का पूजन किया और सवारी में शामिल हुएं। पूजन-अर्चन शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर का षोड़शोपचार से पूजन-अर्चन किया गया।
महाकालेश्वर भगवान षष्ठम सवारी में पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव और नन्दी रथ पर उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं रथ पर श्री घटाटोप विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी गई।
भगवान महाकाल की सवारी में बैतूल जिले के गोंड जनजातीय कलाकारों द्वारा ठात्या नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी गईं। बैतूल के मिलाप इवने व अविनाश धुर्वे के नेतृत्व में जनजातीय दल सवारी में भजन मंडलियों के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चला। धोती, कुर्ता, पगड़ी, रंग-बिरंगा थुरा, जाकेट एवं कवडी और बैलो की पुछ के बलों से बनी कौडी वाले वस्त्र, पैरों में घुघरु और हाथ में बासुरी धारण किए नृत्य डाल द्वारा ढोल, टिमकी, ताशा, मंजीरा, बासुरी आदि परंपरागत वाद्य यंत्रों पर मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इससे पूर्व दल द्वारा महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के संबंध नृत्य कर भगवान की आराधना की गई।
भगवान महाकाल की सवारी शाम चार बजे मंदिर से प्रस्थान पर हरसिद्धिपाल पहुँची। यहां बीएसएफ एवं पुलिस बैंड द्वारा सुमधुर शिव भजनों की प्रस्तुति दी गई। भगवान महाकालेश्वर का पूजन और जलाभिषेक पुजारी आशीष गुरु आदि द्वारा किया गया। भगवान महाकालेश्वर चंद्रमोलेश्वर के स्वरुप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए शाम छह बजे शिप्रा तट पर पहुँचे। इसके पश्चात मां शिप्रा नदी के जल से भगवान का जलाभिषेक किया गया।
वापसी में भगवान महाकाल की सवारी जैसे ही गोपाल मंदिर पहुंची, वहां हरि-हर मिलन का अद्भुत नजारा दिखाई दिया। श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा का बाबा की पालकी का स्वागत किया गया और भव्य रूप में आरती का गायन हुआ। सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
प्रमुख झलकियां
- सवारी में भजन मंडलियों द्वारा मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी गई।
- भगवान कृष्ण और भगवान शिव का स्वरूप धारण किए श्रद्धालु सवारी में चलें
- जगह-जगह आकर्षक रंगोलियों के माध्यम से सवारी का स्वागत किया गया
- दो चलित रथ के माध्यम से सवारी का सजीव प्रसारण किया गया
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