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भोपाल। कोरोना के वेरिएन्ट को बताने वाली "जिनोम सीक्वेंसिंग" की जाँच "एम्स भोपाल" की प्रयोगशाला में शुरू हो गई है। प्रदेश में होल जिनोम सीक्वेंसिंग (डब्ल्यू.जी.एस) जाँच के लिये एम्स भोपाल को नामांकित किया गया है। एम्स भोपाल को जिनोम सीक्वेंसिंग प्रयोगशाला संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बजट भी दिया गया है।
स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने मंगलवार को उक्त जानकारी देते हुए बताया कि एम्स भोपाल में जिनोम सीक्वेंसिंग जाँच शुरू होने से सभी आवश्यक कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए समय-सीमा में (सोर्स-कोव-2) "होल जिनोम स्वीस्वेंसिग" की रिपोर्ट को प्राप्त करना संभव हुआ है। प्रदेश के 25 जिलों के जनवरी और फरवरी माह के 197 सेम्पल की जाँच रिपोर्ट जारी की गई है।
उन्होंने बताया कि एम्स द्वारा जिनोम सीक्वेंसिंग की जानकारी आईएचआईपी पोर्टल और अंतरराष्ट्रीय जीआईएसएआईडी डेटाबेस में प्रविष्टि भी की गई है। प्रदेश में जिनोम सीक्वेंसिंग जाँच सुविधा होने से मंहगे रिएजेन्ट पर होने वाले व्यय को नियंत्रित किया जा सका है।
स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि होल जिनोम सीक्वेंसिंग की जाँच से सोर्स-कोव-2 की संभावित नई प्रजातियों में वायरस के बर्ताव, जेनेटिक कोड, म्यूटेशन आदि का अध्ययन किया जाता है। इससे कोविड-19 के नवीन स्ट्रेन्स (अल्फा, डेल्टा, डेल्टा प्लस, ऑमिक्रॉन आदि) की जानकारी प्राप्त कर उनके प्रसार की रोकथाम के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाती है।
पूर्व में प्रदेश में जिनोम सीक्वेंसिंग जाँच की सुविधा नहीं होने पर भारत सरकार द्वारा चिन्हांकित रीज़नल जिनोम सीक्वेंसिंग लेबोरेटरी में सेम्पल भेजे जाते रहे हैं।
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