Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में एक बार फिर सख्त और विवादित तेवरों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने अंतर्राष्ट्रीय कानून को लेकर बेहद बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून की कोई परवाह नहीं है और न ही इसकी जरूरत महसूस होती है। ट्रंप के इस बयान को वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिस पर कई देशों ने सवाल खड़े किए हैं। इंटरव्यू में ट्रंप ने चीन-ताइवान तनाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि जब तक वे राष्ट्रपति हैं, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा। साथ ही यूरोप और यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वे सत्ता में नहीं होते तो रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता। उन्होंने यह भी दोहराया कि नाटो को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है और अमेरिका ही इस गठबंधन की असली चिंता करता है।
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इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कोलकाता ऑफिस और कंपनी के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। हालात को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 जनवरी को हुई पूरी कार्रवाई के क्रम और घटनाक्रम पर ईडी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने इस मामले में पहले ही अपने मूल मंत्रालय यानी केंद्रीय वित्त मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी है और अब गृह मंत्रालय को भी अलग से रिपोर्ट देगी। वहीं, छापेमारी के दौरान ईडी को सुरक्षा देने वाली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने भी अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है। सीआरपीएफ गृह मंत्रालय के अधीन आता है, ऐसे में मंत्रालय पूरे मामले की हर परत की समीक्षा कर रहा है। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मौके पर पहुंचना इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम पहलू बन गया। पहले वह प्रतीक जैन के आवास पहुंचीं और फिर पुलिस अधिकारियों के साथ I-PAC ऑफिस गईं, जहां से कुछ कागजी और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के साथ बाहर निकलीं। अब गृह मंत्रालय ने ईडी को निर्देश दिया है कि वह बताए कि छापेमारी के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से क्या-क्या बाधाएं आईं और मुख्यमंत्री के साथ मौजूद वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका क्या रही। ईडी की यह रिपोर्ट कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय तैयार कर दिल्ली मुख्यालय भेजेगा, जिसके बाद इसे गृह मंत्रालय को सौंपा जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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उत्तर प्रदेश दिवस–2026 इस बार सिर्फ एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, सांस्कृतिक विरासत और विकास सामर्थ्य को देश-दुनिया के सामने रखने वाला भव्य उत्सव बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 24 से 26 जनवरी, 2026 तक प्रस्तावित तीन दिवसीय आयोजन को जनभागीदारी, नवाचार और गरिमा के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यूपी दिवस का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा, उपलब्धियों और सकारात्मक छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करना है। सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि यूपी दिवस के कार्यक्रम प्रदेश के सभी जनपदों के साथ-साथ देश के सभी राजभवनों और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भी आयोजित किए जाएं। राजभवनों में होने वाले आयोजनों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री भाग लेंगे और प्रवासी यूपीवासियों से संवाद करेंगे। वहीं, विदेशी दूतावासों के माध्यम से यूपी की संस्कृति, कला, निवेश संभावनाओं और मानव संसाधन को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी। इस तरह यूपी दिवस-2026 को डायस्पोरा एंगेजमेंट और प्रदेश गौरव के एक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित किया जाएगा।
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ग्वालियर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने 24 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गुरुवार को अधिकतम तापमान गिरकर 10.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य से 11.1 डिग्री कम है। मौसम विभाग ने इसे सीवियर कोल्ड डे घोषित किया है। इससे पहले 5 जनवरी 2001 को अधिकतम तापमान 9.8 डिग्री दर्ज किया गया था। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है। दिनभर धूप नहीं निकली, जिससे लोगों को दिन में भी रात जैसी ठिठुरन का अहसास हुआ। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे ग्वालियर के लिए और चुनौतीपूर्ण रहेंगे। कश्मीर से आ रही बर्फीली हवाओं और 12.6 किमी ऊंचाई पर 260 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही जेट स्ट्रीम के कारण घना कोहरा बना हुआ है। न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री दर्ज किया गया, जिससे दिन-रात के तापमान में सिर्फ 3 डिग्री का अंतर रह गया। दृश्यता बेहद कम होने से यातायात प्रभावित हुआ और लोग अलाव व हीटर का सहारा लेने को मजबूर रहे। मौसम विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल ठंड से राहत के आसार नहीं हैं।
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इंदौर के भागीरथपुरा मामले ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को खुलकर सामने ला दिया है। एक ओर पार्टी का एक खेमा पूरी सक्रियता के साथ सड़क पर उतरकर सरकार को घेरने में जुटा है, तो वहीं दूसरा धड़ा पूरी तरह नदारद दिखाई दे रहा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तक इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं। सिंघार ने दो दिन तक इंदौर में डेरा डालकर साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस का एक वर्ग इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। भागीरथपुरा प्रकरण में सज्जन सिंह वर्मा, शोभा ओझा और स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता अब तक मौके पर नहीं पहुंचे हैं। इसके साथ ही कुछ पूर्व शहर अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी ने भी गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दी है। इसी बीच युवक कांग्रेस ने 9 से 15 जनवरी तक सांकेतिक सत्याग्रह का ऐलान किया है, जिससे साफ है कि संगठन का एक हिस्सा आक्रामक रुख अपनाए हुए है, लेकिन पूरी कांग्रेस एक सुर में नजर नहीं आ रही।
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महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले बीजेपी ने अनुशासनहीनता पर बड़ा कदम उठाया है। 15 जनवरी को होने वाले मतदान से पहले मुंबई बीजेपी ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले 26 नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। इनमें कई दिग्गज नेता और पूर्व नगरसेवक भी शामिल हैं। टिकट न मिलने से नाराज़ इन नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय पर्चे दाखिल किए थे। बार-बार समझाइश के बावजूद नामांकन वापस न लेने पर पार्टी ने यह सख्त कार्रवाई की। मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में पूर्व पार्षद आसावरी पाटील, नेहल शाह, जान्हवी राणे समेत कई नेताओं के नाम शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर लिया गया है। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि गठबंधन धर्म और पार्टी अनुशासन किसी भी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर है। इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ को मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले पार्टी की अंदरूनी एकजुटता बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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मध्यप्रदेश में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने राजनीतिक गलियारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। कमलनाथ सरकार में पूर्व गृहमंत्री रहे बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के बेटे प्रखर कासलीवाल और एक कारोबारी के बेटे की इंदौर में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह हादसा शुक्रवार सुबह रालामंडल क्षेत्र के तेजाजी नगर बायपास पर हुआ, जब जन्मदिन की पार्टी से लौट रही कार पीछे से एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और शवों को बाहर निकालने के लिए कटर का सहारा लेना पड़ा। हादसे में एक युवती गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज जारी है। इस हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। एमवाय अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर शोक संदेश जारी करते हुए दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घायल युवती के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इसे हृदयविदारक घटना बताते हुए बाला बच्चन और अन्य शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। तीन युवाओं की असमय मौत से तीन परिवारों की खुशियां एक पल में उजड़ गईं।
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शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में अवैध खनन के बड़े मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। खनिज विभाग की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी ने भाजपा मंडल अध्यक्ष वीनस गोयल और उनके दो भाइयों भावेश गोयल व राजेश गोयल पर कुल 54 करोड़ 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि चंगेज पहाड़िया पर पिछले दो वर्षों से मुरम और बोल्डर का अवैध उत्खनन किया जा रहा था, जिससे पूरी पहाड़ी को खोद दिया गया। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश खनिज अवैध खनन, परिवहन और भंडारण निवारण नियम 2022 के तहत की गई है। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक जुर्माने की राशि 30 दिन के भीतर खनिज खाते में जमा करनी होगी, अन्यथा आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही करैरा एसडीएम को स्थल और खसरा अभिलेख की जांच कर अवैध कॉलोनी या छोटे भूखंडों की खरीद-फरोख्त पाए जाने पर नगर पालिका अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह अवैध खनन लंबे समय तक खुलेआम 10 से 12 मशीनों के जरिए चलता रहा, लेकिन सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया, जिससे स्थानीय स्तर पर संरक्षण के आरोप भी लग रहे हैं।
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