Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार, 6 फरवरी को स्थगित कर दी गई है। स्पीकर ओम बिरला ने यह निर्णय विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते लिया। अब सदन की कार्यवाही 9 फरवरी को सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगी। इससे पहले कई दिनों से बजट सत्र 2026 के दौरान विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन और विरोध की वजह से सदन में चर्चा बाधित हो रही थी। विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस और टीएमसी के सांसद विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इसमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील, भारत-चीन बॉर्डर विवाद, राहुल गांधी को बोलने से रोकना और 8 कांग्रेस सांसदों के निलंबन जैसे मामले शामिल हैं। उनके लगातार हंगामे के कारण सदन का काफी समय व्यर्थ चला गया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी हंगामे पर नाराजगी जताई और कहा कि लगातार स्थगित होने से बजट पर सामान्य चर्चा और अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए नुकसानदेह है और सदन में नियमों के अनुसार ही कार्यवाही होनी चाहिए।
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दुनिया भर में नौकरियों का संकट गहराता जा रहा है। मीडिया संस्थानों से लेकर वैश्विक टेक कंपनियों तक बड़े पैमाने पर छंटनी देखी जा रही है। प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने न्यूजरूम और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग टीम में भारी कटौती की है। पश्चिम एशिया की पूरी टीम हटाई गई, जबकि दिल्ली, बीजिंग, कीव और बर्लिन जैसे प्रमुख ब्यूरो या तो बंद कर दिए गए हैं या सीमित कर दिए गए। इसे पारंपरिक मीडिया के लिए डिजिटल दबाव और घटते संसाधनों का संकेत माना जा रहा है। टेक सेक्टर में हालात और भी गंभीर हैं। 2025 में वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने 1.2 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म कीं। इंटेल ने करीब 24 हजार, टीसीएस ने 20 हजार, वेरिजोन ने 15 हजार और एक्सेंचर ने 11 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। माइक्रोसॉफ्ट, एसएपी और तोशिबा जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी हजारों पद घटाए। विशेषज्ञों के मुताबिक लागत नियंत्रण, कारोबारी पुनर्गठन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ता फोकस इसके पीछे की बड़ी वजहें हैं, जहां ऑटोमेशन मानव श्रम की जगह ले रहा है। 2026 की शुरुआत भी राहत लेकर नहीं आई है। अमेजन ने चार महीनों के भीतर 30 हजार कॉरपोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया, जबकि ओरेकल में 20 से 30 हजार तक की संभावित छंटनी की अटकलें हैं। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, 41% कंपनियां आने वाले वर्षों में एआई के कारण वर्कफोर्स घटाने की तैयारी में हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि एआई, बिग डेटा और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां तेजी से उभर सकती हैं, जिससे रोजगार का स्वरूप बदलेगा, खत्म नहीं होगा।
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फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपने नाम को लेकर विवादों में घिरी हुई है। ब्राह्मण समाज ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई है, जिससे देशभर में विरोध प्रदर्शन और FIR दर्ज हुई हैं। अब उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस फिल्म पर खुलकर आपत्ति जताई है और इसे ब्राह्मणों का अपमान बताते हुए तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पंडितों को घुसपैठिया बताकर अपमानित करना गंभीर चिंता का विषय है और बीएसपी की मांग है कि केंद्र सरकार इस जातिसूचक फिल्म पर तुरंत रोक लगाए। वहीं, फिल्म के निर्देशक नीरज पांडेय ने सफाई दी है कि फिल्म केवल एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ काल्पनिक किरदार के नाम के रूप में किया गया है। उन्होंने कहा कि कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है, न कि किसी जाति, धर्म या समुदाय पर। उनका यह भी कहना है कि फिल्म किसी का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसे समझने के लिए पूरा फिल्म देखना जरूरी है। ब्राह्मण समाज का विरोध देश के कई हिस्सों में जारी है। भोपाल और लखनऊ समेत कई शहरों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फिल्म के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में मांग की गई है कि फिल्म का टाइटल आपत्तिजनक है और इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।
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राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक बड़ा नवाचार किया है। अब छात्र मोबाइल ऐप के माध्यम से परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे और फीस का भुगतान भी ऑनलाइन कर पाएंगे। इससे विद्यार्थियों को कियोस्क सेंटर के चक्कर, लंबी कतारों और अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी। इस पहल के साथ राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है, जिसने विद्यार्थियों के लिए समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। विश्वविद्यालय द्वारा “आरआरएसयू छिंदवाड़ा” मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया, जिसकी जानकारी कुलगुरु प्रो. इंद्र कुमार त्रिपाठी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिए लॉगिन कर परीक्षा फॉर्म और फीस जमा कर सकेंगे। भविष्य में इसी ऐप के माध्यम से परीक्षा परिणाम और डिजिटल अंकसूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। ऐप के उपयोग को लेकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे आसानी से इसका लाभ उठा सकें। कुलगुरु प्रो. इंद्र कुमार त्रिपाठी ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने शोध को प्रोत्साहित करने के लिए श्री बादलभोई फैलोशिप और कुं रघुनाथ शाह फैलोशिप शुरू करने का निर्णय लिया है। इन फैलोशिप के तहत भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य, शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान परंपरा, संस्कृति और तकनीक जैसे विषयों पर शोध करने वाले शोधार्थियों को एक वर्ष तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे विश्वविद्यालय में शोध और अकादमिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा अमेरिका के साथ ट्रेड डील और एपस्टीन फाइल्स को लेकर दिए गए बयान को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने तीखा हमला किया। राहुल ने संसद में कहा था कि एपस्टीन फाइल्स में “अभी और माल है, इसमें और कबाब है।” इस बयान पर कंगना ने प्रतिक्रिया दी और कहा, “जिस इंसान की इतनी नीच सोच हो सकती है, इतनी खराब और भ्रष्ट बुद्धि हो सकती है, उससे आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं?” राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील और पीएम मोदी की नीतियों पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक अडानी के खिलाफ केस असल में प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव डालने के लिए है और एपस्टीन फाइल्स में अभी बहुत कुछ है जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। राहुल ने दावा किया कि इसी वजह से पीएम मोदी पर दबाव है और देश को यह समझना होगा कि वे कुछ मामलों में कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया पर हलचल मची। कंगना ने अपने बयान में राहुल गांधी की शब्दावली और उनकी सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है। वहीं राहुल गांधी का फोकस अमेरिका-भारत ट्रेड डील, चीन सीमा विवाद और न्यायिक मामलों पर केंद्रित रहा।
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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही पारित कर दिया गया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री की बात नहीं सुनाए जाने के बावजूद धन्यवाद प्रस्ताव पास हो गया। पिछली बार ऐसा 10 जून 2004 को हुआ था, जब तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने से रोक दिया गया था। बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब और भारत-अमेरिका संभावित ट्रेड डील को लेकर विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। लोकसभा शुरू होते ही विपक्ष ने नारेबाजी की, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर बाद बजट पर चर्चा फिर शुरू हो सकती है। राज्यसभा में भी राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर हंगामा हुआ। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप पाठक ने बच्चों के गायब होने का मामला उठाया और कहा कि हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो रहा है। वहीं, कांग्रेस के निलंबित सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि जब तक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बात करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तब तक विपक्ष पीएम मोदी को बोलने नहीं देगा। उन्होंने लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया की निंदा भी की।
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पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की कथित रेप और मौत के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों पर उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर इस मामले में किसी मंत्री या मंत्री के बेटे की संलिप्तता है तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाए, “मैं गारंटी देता हूं कि 24 घंटे के अंदर उसे जेल भेजा जाएगा।” राबड़ी देवी ने गुरुवार को सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया था कि इस पूरे मामले को सरकार बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और घटना को आत्महत्या बताने की कोशिश की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की आशंका सामने आने के बाद डॉक्टरों को गलत ठहराने का प्रयास हुआ। दबाव बढ़ने पर मामला एसआईटी और बाद में सीबीआई को सौंपा गया, जिससे राबड़ी देवी ने पूरे प्रकरण को लीपापोती करार दिया। इन आरोपों पर शुक्रवार को सम्राट चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि बिना सबूत ऐसे गंभीर आरोप लगाना गलत है। उन्होंने राबड़ी देवी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे जनता के सामने नाम बताती हैं और उसमें किसी मंत्री या उसके बेटे की भूमिका सामने आती है, तो सरकार बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई करेगी। इस बयान के बाद मामला और अधिक राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को धोखाधड़ी और गंभीर अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर की गई, जिसके तहत सिद्दीकी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। आरोपों में दस्तावेजों की हेराफेरी, फर्जीवाड़ा और विश्वविद्यालय प्रशासन में गंभीर गड़बड़ियां शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद सिद्दीकी को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में कार्रवाई कर चुका है और अब यूनिवर्सिटी की फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और स्टाफ से जुड़े संदिग्ध ट्रांजैक्शंस की जांच कर रहा है। अल फलाह यूनिवर्सिटी पहले भी विवादों में रह चुकी है। जांच में सामने आया था कि लाल किला ब्लास्ट केस में दोषी डॉ. उमर नबी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे, जबकि उनके दो सहयोगियों को कथित “व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क” से जोड़ा गया था। वहीं नवंबर 2024 में NAAC ने फर्जी एक्रेडिटेशन दावों को लेकर यूनिवर्सिटी को शो-कॉज नोटिस जारी किया था, जिसके बाद संस्थान की वेबसाइट ऑफलाइन कर दी गई थी। अब ED ने साफ किया है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी वित्तीय स्रोतों और संदिग्ध फंडिंग की गहन जांच जारी रहेगी।
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