Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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आईआईटी दिल्ली के 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने अपनी जड़ों की ओर लौटकर अपने संस्थान को 70 करोड़ रुपये का दान देकर मिसाल कायम की है। आमतौर पर छात्र डिग्री लेने के बाद अपने करियर और निजी जीवन में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन इस बैच ने रीयूनियन के अवसर पर देश और विदेश से कैंपस आकर संस्थान के लिए अपनी दरियादिली दिखाई। यह इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी संस्थान को पासिंग आउट बैच द्वारा इतना बड़ा योगदान मिला है। आईआईटी दिल्ली ने दान की राशि का अधिकांश हिस्सा ‘जनरल एंडोमेंट’ फंड में डालने का निर्णय लिया है, जिससे संस्थान भविष्य की रणनीतिक और शैक्षणिक जरूरतों को पूरा कर सके। इस फंड का इस्तेमाल नए अकादमिक प्रोग्राम, उन्नत प्रयोगशालाओं, छात्रवृत्ति कार्यक्रम और फैकल्टी एक्सीलेंस पर किया जाएगा। इस पहल को नेतृत्व देने वाले पूर्व छात्र रोहित दुबे ने कहा कि यह कदम संस्थान को लौटाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसर तैयार करने की भावना को दर्शाता है। आईआईटी दिल्ली के डीन ऑफ एलुमनी रिलेशंस प्रो. नीलांजन सेनराय ने भी इसे रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण बताया।
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पिछले कुछ दिनों में रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने अरावली मामले और उन्नाव कांड जैसे मामलों पर सरकार से तीखे सवाल पूछकर सबको चौंका दिया है। आम धारणा रही है कि अर्नब सरकार समर्थक रहे हैं, लेकिन अब उनका रुख अचानक बदल गया है। लाइव AMA (Ask Me Anything) में अर्नब ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्रकारिता का मकसद समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि देशहित है। उन्होंने कहा कि अगर आवाज नहीं उठाई जाएगी तो बदलाव नहीं आएगा, और पत्रकारिता का असली उद्देश्य यही होना चाहिए। अरावली मामले पर अर्नब ने कहा कि इसमें सिर्फ सही और गलत है, किसी पार्टी या सरकार का पक्ष नहीं। उन्होंने 20 दिसंबर के अदालत आदेश को गलत बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इसे रोकना पड़ा। अर्नब ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ सच को उजागर करना है और इसके लिए किसी तरह का क्रेडिट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी महसूस किया कि आदेश सही नहीं था, और उनके लिए यह सही और गलत की लड़ाई है, न कि किसी राजनीतिक लाइन की।
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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के पहले चरण की शुरुआत से बुंदेलखंड के 688 गांवों की तस्वीर बदलने जा रही है। 10 तहसीलों में फैली लगभग 4.16 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों में नई उम्मीदें जागेंगी। लंबे समय से सूखे और अनियमित बारिश से परेशान छतरपुर के किसान अब स्थायी पानी मिलने की संभावना देख उत्साहित हैं। परियोजना के तहत गौरिहार में 73,700 हेक्टेयर, छतरपुर में 69,117 हेक्टेयर और बड़ामलहरा-राजनगर में 58 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे रबी और खरीफ की फसलों में वृद्धि होगी, दोहरी फसल और बागवानी के अवसर बढ़ेंगे। केन नदी पर ढोढन बांध, 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर और दो पावर स्टेशनों के निर्माण से पूरा क्षेत्र जल, सिंचाई और बिजली के मामले में मजबूत होगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद छतरपुर बुंदेलखंड में सबसे बड़ा कृषिगत लाभार्थी जिला बनकर क्षेत्रीय विकास की कहानी लिखेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
नए साल में राजगढ़ जिले के खुजनेर से बड़ागांव तक 42 किलोमीटर लंबी टू लेन सड़क का निर्माण शुरू होगा। 132 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सड़क के साथ कालीसिंध नदी पर पुल का निर्माण भी शामिल है। इस सड़क के बनने से भैंसवा माता मंदिर और मां बगलामुखी मंदिर के बीच का मार्ग सुगम होगा और श्रद्धालु कम समय में दोनों शक्तिपीठों के दर्शन कर सकेंगे। टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस सड़क के बनने के बाद वर्तमान 76-83 किलोमीटर का सफर घटकर 42 किलोमीटर रह जाएगा। सड़क खुजनेर से पांदा, भैंसवा माता, खजूरिया घाटा, गगरिया, टिकोन होते हुए बड़ागांव नलखेड़ा तक जाएगी। इससे न केवल श्रद्धालुओं के लिए यात्रा आसान होगी, बल्कि ग्रामीण और व्यापारिक आवागमन भी सुगम होगा, जिससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में तेजी आएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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मध्यप्रदेश के नीमच में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गुड़ से संबंधित बयान के बाद कांग्रेस ने व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि किसानों को सीधे खेतों में गुड़ उगाने के लिए ‘गुड़ के बीज’ उपलब्ध कराए जाएं। प्रदर्शन में तख्तियों पर स्लोगन लिखे गए जैसे, \"मुख्यमंत्री जी बीज दिलाओ, गुड़ की डली खेत में उगाओ\", जिससे किसानों के लिए सीधे खेती की प्रक्रिया आसान हो सके। ज्ञापन में कांग्रेस ने उच्च गुणवत्ता वाले ‘गुड़ के बीज’ बांटने और एक विशेष ‘गुड़ रोपण अधिकारी’ नियुक्त करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पहले मुख्यमंत्री ने एक बीघे में 50 क्विंटल गेहूं उत्पादन की घोषणा की थी और अब गुड़ की खेती की बात कर रहे हैं, जो हास्यजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के बयानों पर आरोप लगाने से पहले अपने मंच से किए गए बयानों की गंभीरता पर ध्यान देना चाहिए।
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मध्य प्रदेश के नीमच जिले की तारापुर ग्राम पंचायत में हुए जिला और ग्राम पंचायत उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार नेमीचंद धाकड़ ने भाजपा समर्थित पवन सेन को 91 मतों से हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। पवन सेन के परिवार का जिले में मजबूत राजनीतिक रसूख होने के बावजूद जनता ने बदलाव पर अपनी मुहर लगाई। यह चुनाव खास इसलिए भी था क्योंकि कुछ महीने पहले 15 पंचों ने तत्कालीन सरपंच के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और 'खाली कुर्सी-भरी कुर्सी' प्रक्रिया के तहत उन्हें पद से हटाया गया था। जीत के बाद नेमीचंद धाकड़ ने कहा कि वे स्वयं भाजपा के कार्यकर्ता हैं और विकास कार्यों के साथ ही पंचायत में भाईचारा और शांति बहाल करेंगे। उन्होंने पेयजल संकट और साफ-सफाई जैसी समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए तुरंत काम शुरू करने का भरोसा दिया। नवनिर्वाचित सरपंच के नेतृत्व में ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है और उम्मीद जताई जा रही है कि पंचायत की अस्थिरता अब खत्म होगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
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इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब मध्य प्रदेश के कटनी शहर में भी पेयजल संकट गंभीर रूप ले रहा है। कई वार्डों में सीवर लाइन की लापरवाही और पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से गंदा पानी घर-घर पहुंच रहा है। शहर के भट्टा मोहल्ला, माधवनगर, दुर्गाजी मंदिर, कटायेघाट मार्ग और कई अन्य इलाकों में लोगों ने खराब और दूषित पानी की शिकायत दर्ज कराई है। नगर निगम की अमृत योजना के तहत इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी के हाथों में पेयजल सप्लाई का प्रबंधन है। सड़क निर्माण और सीवर लाइन कार्यों के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण कई वार्डों में जीवन प्रभावित हो रहा है। शहर में प्रतिदिन 23.5 एमएलडी पानी सप्लाई की जा रही है, जिसमें 18.5 एमएलडी कटायेघाट बैराज और 6 एमएलडी नलकूपों से आता है। नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल मरम्मत और निगरानी की मांग की है।
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भोपाल में मेट्रो ब्लू लाइन और पीडब्ल्यूडी की रोड परियोजनाओं के तहत पेड़ों की कटाई जारी है। गुरुवार को रायसेन रोड आइटीआइ के सामने सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, जबकि अनुमोदन स्पष्ट नहीं था। 11 मील से बंगरसिया रोड पर भी कोर्ट के निर्देश के बावजूद लगभग सभी पेड़ काट दिए गए हैं, जिससे शहर में ठूंठ और उजाड़ दिखाई दे रहा है। अयोध्या बायपास पर करीब आठ हजार पेड़ों पर एनजीटी ने स्टे लगाया है, लेकिन निगम की ओर से कोई ठोस निगरानी व्यवस्था नहीं है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पेड़ काटने पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण की योजना स्पष्ट रूप से पेश की जाए। काटे गए पेड़ों के बदले किस प्रकार के पेड़ लगाए जाएंगे, उनकी उम्र, मोटाई, संख्या और स्थान का विवरण दिया जाए। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग ने बिना अनुमति के 488 पेड़ काट दिए। नीलबड़ क्षेत्र में स्टेडियम निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के लिए भी पेड़ कटने के मामले में एनजीटी ने समिति गठित करने का निर्देश दिया था, लेकिन विभाग की कार्रवाई में कोई बदलाव नहीं आया है।
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