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भोपाल, 26 अक्टूबर 2026।* मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा जिले के रोझौही-सरई कला क्षेत्र में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु परियोजना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सिंघार ने कहा कि वह एक दिन पहले ही आंदोलन स्थल पर जाकर जल सत्याग्रह कर रहे ग्रामीणों से मिले हैं और उन्हें अपना समर्थन दिया है।
सिंघार ने कहा कि इस परियोजना में ग्रामसभा की सहमति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उनके अनुसार ग्रामसभा ने 3 सितंबर 2026 को सर्वसम्मति से ड्रिलिंग की सहमति देने से इनकार कर दिया था और पंचायत ने 5 सितंबर को पत्र क्रमांक 48 के माध्यम से कलेक्टर को इसकी सूचना भी दी थी। इसके बावजूद 23 सितंबर को NOC क्रमांक 147/2026 जारी कर दी गई, जिसमें 4 सितंबर के कथित सहमति पत्र का हवाला दिया गया है।
उन्होंने बताया कि सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागायुक्त और कलेक्टर से शिकायत कर इस कथित सहमति पत्र की जांच और NOC निरस्त करने की मांग की है। सिंघार ने सवाल उठाया कि जब ग्रामसभा ने अनुमति नहीं दी तो प्रशासन ने किस आधार पर ड्रिलिंग की अनुमति जारी की और कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई।
*भाजपा राज में सब बिकाऊ है - सिंघार*
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने SHANTI Act, 2025 के माध्यम से निजी कंपनियों के लिए परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने का रास्ता खोल दिया है। मध्यप्रदेश में भी निजी परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें रीवा में टाटा पावर, कटनी और छिंदवाड़ा में अडानी समूह तथा मंदसौर में बजाज समूह के प्रस्ताव शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि रोझौही और सरई कला क्षेत्र में 1500 से अधिक परिवार और 5000 से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी, अनुसूचित जाति के परिवार, छोटे किसान और खेतिहर मजदूर शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन के दौरान बुजुर्ग आदिवासी महिला विमला कोल की मृत्यु का भी उल्लेख किया गया है।
*सुरक्षा मानकों और अध्ययन पर उठाए सवाल*
सिंघार ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि AERB के 2014 के सुरक्षा मानकों के तहत परमाणु संयंत्र के आसपास 1, 5, 16 और 30 किलोमीटर के सुरक्षा एवं निगरानी क्षेत्र होते हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित रिएक्टर कहां स्थापित होंगे और इन दायरों में कितने गांव, परिवार, कृषि भूमि तथा वनाधिकार पट्टे आते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA), भूकंपीय जोखिम, जल उपलब्धता, आबादी वितरण और विकिरण प्रभाव से संबंधित अध्ययन कराए गए हैं या नहीं और आपातकालीन तैयारी व आपदा प्रबंधन योजना क्या है। चेरनोबिल (1986) और फुकुशिमा (2011) जैसी दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि स्थानीय आबादी और पर्यावरण की सुरक्षा का आकलन किस आधार पर किया गया है।
उन्होंने सरकार से चार सवाल पूछे - ग्रामसभा के विरोध के बावजूद अनुमति क्यों दी गई, कथित सहमति पत्र की जांच पर क्या कार्रवाई हुई, सुरक्षा और पर्यावरणीय अध्ययन पूरे हुए हैं या नहीं और प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा कैसे होगी।
*पन्ना केन-बेतवा दौरे का भी किया जिक्र*
प्रेस वार्ता के दौरान सिंघार ने 24 अक्टूबर को अपने पन्ना केन-बेतवा दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, 27 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर का नारियल पानी पिलाकर अनशन समाप्त कराया और जिला जेल में बंद दिव्या अहिरवार और उनकी मां से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री ने एक महीने में जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक नतीजा नहीं आया है।
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