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नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।* भारत ने 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके लिए वाणिज्य विभाग और इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद EEPC इंडिया ने चिंतन शिविर में मंथन किया। शिविर में FTA के बेहतर उपयोग, बाजार पहुंच बढ़ाने और कच्चे माल की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
चर्चा में नीति निर्माता, उद्योग के दिग्गज और विशेषज्ञ शामिल हुए। इनपुट लागत में अस्थिरता, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक ट्रेड बाधाओं से निर्यात पर पड़ रहे असर पर चिंता जताई गई।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत के निर्यात ने मजबूती दिखाई है। अप्रैल-सितंबर 2026-27 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात 14% बढ़कर 476.20 बिलियन डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक व्यापारिक निर्यात में हिस्सेदारी 2% से बढ़ाकर 15-20% करने की क्षमता है।
*पहली छमाही में 70 बिलियन डॉलर पार*
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में इंजीनियरिंग निर्यात 70 बिलियन डॉलर को पार कर गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 20% अधिक है। अग्रवाल ने कहा कि इस साल इंजीनियरिंग निर्यात 140 अरब डॉलर को पार कर सकता है।
उन्होंने क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO), सस्टेनेबिलिटी और जलवायु से जुड़े व्यापार उपायों जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य और उद्योग-सरकार सहयोग जरूरी बताया।
संयुक्त सचिव विमल आनंद ने कहा कि मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए EEPC इंडिया को 2030 तक 300 बिलियन डॉलर के लक्ष्य पर विचार करना चाहिए। उन्होंने QCO पर श्वेत पत्र तैयार करने और सभी इंजीनियरिंग पैनलों से फीडबैक लेने का सुझाव दिया।
EEPC इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि उद्योग-सरकार के सहयोग से इंजीनियरिंग क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा और इस वित्त वर्ष में पिछले साल का रिकॉर्ड टूटेगा।
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