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रायपुर, 22 अक्टूबर।* राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई जुहार के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं और महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है और जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं उपस्थित थीं।
*नुआखाई केवल उत्सव नहीं, कृषि संस्कृति और एकता का प्रतीक*
राष्ट्रपति ने प्रदेशवासियों को नुआखाई की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और भारतीय जीवन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि नुआखाई हमारी कृषि परंपरा को सहेजने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का पर्व है। अन्न केवल भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। इसलिए अन्न का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
*युवाओं को दिया सफलता का मंत्र - ज्ञान के साथ विनम्रता जोड़ें*
राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि बड़े सपने देखें, अपने विचारों को व्यापक बनाएं और अपनी सफलता को समाज एवं राष्ट्र की सेवा से जोड़ें। परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन हर युवा के भीतर कुछ नया करने और अपनी पहचान बनाने की ललक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को जीवन में सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए। पुस्तकें पढ़ें, प्रश्न पूछें, नई चीजों को समझें और अपने कौशल को निरंतर विकसित करें। लक्ष्य तय करें और चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करें। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव जोड़ना चाहिए। आपका ज्ञान किसी जरूरतमंद के काम आए और आपकी सफलता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बने, तभी उपलब्धि सार्थक है। राष्ट्र निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है।
*2047 तक विकसित भारत के लिए महिला भागीदारी जरूरी*
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी है। आधी आबादी को आगे बढ़ाए बिना देश पूरी क्षमता से प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने पुरुषों, विशेषकर युवाओं से कहा कि वे अपनी बहनों और बेटियों को ऐसा वातावरण दें, जहां वे बिना बाधा के सपने पूरे कर सकें। महिलाओं के प्रति सम्मान शब्दों में ही नहीं, सोच और आचरण में भी दिखना चाहिए।
*छत्तीसगढ़ में विकास का उजियारा*
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति से युवा नक्सलवाद का भटकाव छोड़ मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इससे युवाओं, उनके परिवारों और पूरे देश के विकास को गति मिल रही है।
*नुआखाई एकता और सेवा का पर्व - राज्यपाल*
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि नुआखाई नई फसल के स्वागत के साथ धरती माता के प्रति कृतज्ञता और किसानों के सम्मान का पर्व है। यह हमारी कृषि संस्कृति और सामाजिक एकता को मजबूत करता है। राष्ट्रपति का संघर्ष, सादगी और सेवाभाव हम सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर ज्ञान और नवाचार से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
*राष्ट्रपति का जीवन प्रेरणास्रोत - मुख्यमंत्री साय*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जीवन ओडिशा के छोटे से गांव से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर, देश की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं और ओडिया समाज ने प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बताया कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवा शक्ति केंद्र में है। इसके लिए गीदम, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़ और कवर्धा में पांच नए मेडिकल कॉलेज, नवा रायपुर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट जहां 4 हजार युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा, 6 लाख विद्यार्थियों को AI प्रशिक्षण, 100 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड, फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी, निफ्ट और नाइलिट की स्थापना तथा अग्निवीरों को पुलिस भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण जैसे कदम उठाए गए हैं।
इस दौरान सेवा संकल्प अभियान के रक्तदान महाकुंभ में 2,548 लोगों ने रक्तदान किया, जिनमें 1,188 महिलाएं शामिल थीं, जो नारी शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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