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पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विधानसभा सचिवालय के बीच विवाद गहरा गया है। मामला तब बढ़ा जब टीएमसी की ओर से सांसद और पार्टी महासचिवAbhishek Banerjee के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा सचिवालय को भेजा गया। इस पत्र में विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। हालांकि, सचिवालय ने पत्र को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसके लिए कम से कम 80 विधायकों के समर्थन वाला औपचारिक प्रस्ताव आवश्यक है।
विवाद बढ़ने पर विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन दायर कर पिछले वर्षों 2011, 2016 और 2021 में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि पहले किन नियमों के आधार पर नियुक्तियां हुईं और इस बार अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है। उनका आरोप है कि विधानसभा सचिवालय पारदर्शिता नहीं बरत रहा और प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया जा रहा है।
इधर विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष के नेता की नियुक्ति विधायकों की आंतरिक सहमति और औपचारिक प्रक्रिया से ही संभव है। सचिवालय से जुड़े अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी बाहरी नेता के हस्ताक्षर इस प्रक्रिया में मान्य नहीं हो सकते। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और अब सबकी नजर विधानसभा सचिवालय के अगले कदम पर टिकी है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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