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Nishikant Dubey ने कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्रीJawaharlal Nehru पर असम को भाषा और क्षेत्रीय विवादों के जरिए विभाजित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 19 मई 1961 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने असम में ऐसी नीतियां लागू कीं, जिनसे स्थानीय लोगों और बंगाली भाषी समुदाय के बीच तनाव बढ़ा। दुबे ने दावा किया कि असमिया भाषा को शिक्षा, सरकारी कामकाज और नौकरियों में अनिवार्य बनाने के फैसले ने हालात को और गंभीर कर दिया।
बीजेपी सांसद ने सिलचर गोलीकांड का जिक्र करते हुए कहा कि बराक वैली में बंगाली भाषी समुदाय के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस फायरिंग में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार ने स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किया। दुबे ने यह भी कहा कि कांग्रेस की नीतियों ने असम में सामाजिक और भाषाई विभाजन को बढ़ावा दिया।
इससे पहले भी निशिकांत दुबे ने नेहरू सरकार पर कई ऐतिहासिक मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। वहींAmit Shah ने भी हाल ही में असम में एक रैली के दौरान कांग्रेस और नेहरू परिवार पर राज्य की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था। शाह ने कहा था कि वर्तमान सरकार ने असम में शांति और विकास के लिए कई समझौते किए हैं और राज्य की सुरक्षा को मजबूत किया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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