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संसद में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन बिलों पर तीखी बहस देखने को मिली, जहां विपक्ष ने सरकार पर संविधान से छेड़छाड़ के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार संविधान को “हाइजैक” करने की कोशिश कर रही है, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने मांग उठाई कि मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, वरना इस कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
विपक्ष के इन आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और यह संभव नहीं है। इस मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच भी तीखी बहस हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का समर्थन सभी करते हैं, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को इसमें शामिल करने पर स्पष्टता जरूरी है। जवाब में अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सपा चाहती है तो वह अपनी पार्टी के टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें प्रस्तावित हैं, जिनका अंतिम निर्धारण परिसीमन प्रक्रिया के बाद होगा। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा और भेदभावपूर्ण करार दे रहा है। साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा राजनीतिक टकराव का केंद्र बनने वाला है।
Patrakar sneha singh
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