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बिहार की राजनीति में हलचल तब बढ़ गई जब पटना उच्च न्यायालय ने 2025 विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 42 विधायकों को नोटिस जारी किया। इनमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और जदयू विधायक चेतन आनंद जैसे नाम शामिल हैं। हारने वाले प्रत्याशियों ने आरोप लगाया है कि विजयी उम्मीदवारों ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथपत्र (Form-26) में अधूरी या गलत जानकारी दी। प्रारंभिक सुनवाई में न्यायमूर्ति शशि भूषण प्रसाद सिंह की बेंच ने आरोपों को विचारणीय पाते हुए जवाब तलब किया है।
याचिकाओं में मुख्य आरोप यह हैं कि कुछ विधायकों ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों, संपत्ति विवरण और अन्य अनिवार्य सूचनाओं को या तो छुपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया। कुछ सीटों पर मतदान और मतगणना में अनियमितता के भी आरोप लगाए गए हैं। निर्वाचन नियमों के अनुसार प्रत्याशियों को अपने आपराधिक इतिहास और संपत्ति का पूरा खुलासा करना अनिवार्य है। हाई कोर्ट ने इन आरोपों पर संबंधित विधायकों से निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 के तहत आता है। यदि अदालत को यह साबित हो जाता है कि गलत जानकारी जानबूझकर दी गई और उससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ, तो धारा 100 के तहत सदस्यता रद्द की जा सकती है। वहीं, झूठा हलफनामा देने पर धारा 125A के तहत सजा या जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल मामला प्रारंभिक चरण में है; विधायकों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद ही तय होगा कि किसी की कुर्सी पर वास्तविक खतरा है या नहीं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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