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जुएल ओरम ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के 23वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर के दिलचस्प किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित बीएचईएल में नौकरी के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को मजदूर से मुख्यमंत्री बनते देखा, जिससे उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा मिली। ओराम ने कहा कि उन्होंने विधायक बनने तक का सपना नहीं देखा था, लेकिन जनता ने उन्हें चुनकर आगे बढ़ाया और वे कैबिनेट मंत्री तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि बिना फल की चिंता किए लगातार काम करते रहना चाहिए।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री दुर्गा दास उइके के लंबे भाषण पर ओराम ने हल्का व्यंग्य भी किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इतना विस्तृत भाषण सुनने के बाद और भाषण की जरूरत है क्या? इसके बाद उन्होंने अपने मंत्रालय के शुरुआती दिनों की चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नए मंत्रालय के गठन के बाद शुरुआती दिनों में अधिकारी तक मिलने नहीं आए, क्योंकि उन्हें मंत्रालय के गठन की जानकारी ही नहीं थी।
ओराम ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात और शास्त्री भवन में कक्ष आवंटन का किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि मंत्रालय को व्यवस्थित ढंग से स्थापित करने में काफी संघर्ष करना पड़ा। वरिष्ठ नेताओं से मार्गदर्शन लेने और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई और कुछ ही दिनों में मंत्रालय को शास्त्री भवन में कार्यालय मिल गया। ओराम ने कहा कि चुनौतियां हर कदम पर आती हैं, लेकिन धैर्य और संवाद से रास्ता निकल ही आता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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