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विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान भाजपा के बहादुर सिंह ने पूर्ववर्ती और वर्तमान बजट की तुलना करते हुए लिंगभेद वाली टिप्पणी की, जिसे लेकर सदन और सियासी हलकों में विवाद पैदा हो गया। उन्होंने भाजपा सरकार के बजट को “जवानी का बजट” और कांग्रेस के बजट को “बुढ़ापे का बजट” बताते हुए तुलना लड़के और लड़की के जन्म से की। बहादुर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार के पहले तीन बजट में “छोरा” पैदा हुआ और उसका स्वागत किया गया, जबकि कांग्रेस के अंतिम बजट में “छोरी” पैदा हुई।
सदन में उनके इस बयान पर कई भाजपा सदस्य हंसते नजर आए और सभापति ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। कांग्रेसी सदस्यों ने आपत्ति जताई, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इस घटना ने विधानसभा की गरिमा और विधायकों की मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है, जबकि विपक्ष और जनसंगठनों ने इसे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान बताया।
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि बहादुर सिंह की टिप्पणी जेंडर भेदभाव को दर्शाती है और तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करने की बात कही और साथ ही विधायकों के लिए स्पष्ट शब्दावली जारी करने पर जोर दिया, ताकि भविष्य में कोई जेंडर विरोधी बयान न दे सके।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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