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12वीं के छात्र को मिला MBBS एडमिशन का अधिकार
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मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने बिना वकील के सीधेभारत का सर्वोच्च न्यायालय में अपनी पैरवी कर मिसाल पेश की। NEET परीक्षा में 530 अंक हासिल करने के बाद उन्होंने EWS कोटे में MBBS सीट का दावा किया था, लेकिन राज्य सरकार की अधिसूचना में देरी के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका। आर्थिक तंगी के चलते वकील न कर पाने पर अथर्व ने स्वयं कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया और पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

10 फरवरी 2026 को जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष अथर्व ने कहा—“सिर्फ मुझे 10 मिनट दीजिए।” उन्होंने दलील दी कि नीति में देरी का खामियाजा योग्य छात्रों पर नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और माना कि प्रशासनिक विलंब के कारण छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

 

अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ( National Medical Commission ) और मध्यप्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग को सात दिन के भीतर किसी निजी मेडिकल कॉलेज में प्रोविजनल MBBS प्रवेश देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि EWS वर्ग के इस छात्र को नीतिगत देरी के कारण अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।में 10 मिनट की दलील, 12वीं के छात्र को मिला MBBS एडमिशन का अधिकार

Priyanshi Chaturvedi 16 February 2026

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