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लोकसभा चुनाव में महायुति को करारी चोट लगी थी। 48 में से सिर्फ 17 सीटें मिलने से एनसीपी प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार काफी निराश थे। उसी दौर में उन्हें याद आए मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें वे स्नेह से ‘मामा’ कहते हैं। अजित पवार ने उन्हें फोन कर एमपी में भाजपा की लगातार जीत का राज पूछा। बाद में अजित पवार ने खुद सार्वजनिक मंच से बताया कि इसी बातचीत ने महाराष्ट्र की आगे की चुनावी रणनीति की दिशा बदल दी।
फोन पर बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की ‘लाड़ली बहना योजना’ का अनुभव साझा किया, जिसने राज्य में भाजपा को जबरदस्त जनसमर्थन दिलाया था। इस योजना के असर से प्रभावित होकर अजित पवार ने महाराष्ट्र में इसी तर्ज पर ‘लड़की बहिन योजना’ लागू करने का फैसला किया। इसके तहत गरीब और पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाने लगी। इसके साथ ही किसानों के लिए पंप सेट पर मुफ्त बिजली जैसे फैसले भी किए गए, जिसने महायुति की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
अजित पवार के मुताबिक, ऐसे वेलफेयर कदमों से सरकार पर आर्थिक बोझ जरूर बढ़ता है, लेकिन जनता से सीधा जुड़ाव भी बनता है। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव में सीमित समय बचा था और ऐसे में महिला-केंद्रित योजनाएं महायुति के लिए गेमचेंजर साबित हुईं। यही वजह रही कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन को बंपर जीत मिली और ‘मामा शिवराज’ से मिली सलाह को अजित पवार ने महाराष्ट्र की जीत का अहम सबक बताया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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