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कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर बंगाल और केरल—दोनों राज्यों में असमंजस गहराता जा रहा है। बंगाल में जहां प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश नेता अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं, वहीं कुछ नेता लेफ्ट के साथ तालमेल की वकालत कर रहे हैं। इसी बीच केरल कांग्रेस ने बंगाल में लेफ्ट से गठबंधन का कड़ा विरोध जताया है। केरल यूनिट का तर्क है कि ऐसे गठबंधन से राज्य में कांग्रेस की मजबूत संभावनाओं को नुकसान पहुंचेगा और भाजपा को फायदा मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बंगाल में नए प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं, जबकि पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी लेफ्ट से तालमेल की बात कह चुके हैं। आलाकमान ने जमीनी हालात जानने के लिए 33 जिलाध्यक्षों की राय ली, जिनमें से 30 ने अकेले चुनाव लड़ने, 2 ने लेफ्ट से गठबंधन और 1 ने टीएमसी के साथ तालमेल का समर्थन किया। इसी बीच केरल कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि बंगाल में लेफ्ट से गठजोड़ का असर केरल में नकारात्मक संदेश के रूप में जाएगा।
इंडिया ब्लॉक में पहले से चल रही उथल-पुथल के बीच कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह फैसला और चुनौतीपूर्ण हो गया है। अकेले चुनाव लड़ने से गठबंधन की एकता पर सवाल उठ सकते हैं, वहीं तालमेल न होने पर लेफ्ट की नाराजगी का भी खतरा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 23 जनवरी को दिल्ली में केरल और बंगाल के नेताओं की बैठक बुलाई है, जहां विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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