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पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन को मजबूत करने के लिए अन्य राज्यों से अनुभवी नेताओं को तैनात किया है। इन नेताओं को बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक पार्टी की आंतरिक कलह सुलझाने, कमजोर क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने और टीएमसी से मुकाबले की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे और जनसभाओं के दौरान टीएमसी पर हमला कर पार्टी ने चुनावी तैयारी का संदेश साफ कर दिया।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक से वरिष्ठ नेताओं को बंगाल में बुलाया है। इनमें यूपी के मंत्री जेपीएस राठौर, उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत, राजस्थान के भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष कैलाश चौधरी, यूपी के पूर्व मंत्री सुरेश राणा, हरियाणा भाजपा महासचिव संजय भाटिया और कर्नाटक के पूर्व मंत्री सी टी रवि शामिल हैं। इन नेताओं को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वे राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को रिपोर्ट करेंगे।
बीजेपी का लक्ष्य राज्य में वोट शेयर में कम से कम 5% का इजाफा करना है, ताकि 2021 के चुनाव में टीएमसी के 48.02% वोटों के मुकाबले पार्टी को बराबरी का मौका मिले। पार्टी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और संगठनात्मक रूप से 2026 में 2021 की तुलना में मजबूत स्थिति में है। विशेष रूप से बंगाल में कायस्थ समुदाय का प्रभाव 78 सीटों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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