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केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि अब यह योजना ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी’ नाम से जानी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण गरीबों को एक वर्ष में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा, जिसके लिए सरकार 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान कर रही है। ज्ञात हो कि इस योजना की शुरुआत 2005 में मनमोहन सरकार ने की थी और तब से अब तक 15.4 करोड़ लोग इससे सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
कैबिनेट बैठक में न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े ‘शांति बिल 2025’ को भी मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश व आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है। साथ ही ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025’ को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था को विकसित भारत के विज़न से जोड़ने पर केंद्रित है। वर्तमान में मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिन रोजगार मिलता है, लेकिन अब नया नाम और नई संरचना योजना को एक नई पहचान देने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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