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लोकसभा में शुक्रवार को तमिलनाडु के कार्तिगई दीपम उत्सव को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने शून्यकाल के दौरान आरोप लगाया कि डीएमके सरकार मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश की अवमानना कर रही है और तमिलनाडु में “सनातन विरोध का प्रतीक” बन गई है। ठाकुर ने दावा किया कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद श्रद्धालुओं को दीप प्रज्वलित करने नहीं दिया गया और हिंदुओं पर लाठीचार्ज तक हुआ। जैसे ही उन्होंने ये आरोप लगाए, डीएमके सांसद आसन के सामने आकर जोरदार विरोध करने लगे, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
इधर, तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें तिरुपरंकुंद्रम स्थित अरुलमिघु सुब्रमणियस्वामी मंदिर के दीप स्तंभ पर कार्तिगई दीपम प्रज्वलित करने की अनुमति श्रद्धालुओं को दी गई थी। हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 4 दिसंबर को जिला प्रशासन की अपील खारिज कर दी थी और एकल न्यायाधीश का आदेश बरकरार रखा था। आदेश के अमल न होने पर जज ने श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने और CISF को सुरक्षा देने के निर्देश भी दिए, लेकिन विवाद यहीं से और बढ़ गया।
कार्तिगई दीपम विवाद ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है और मामला दिल्ली तक पहुंच गया है। डीएमके, कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने उस आदेश को देने वाले जज जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि संबंधित आदेश न्यायपालिका की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर गंभीर प्रश्न उठाता है। वहीं बीजेपी का कहना है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती, जिसके चलते यह मुद्दा संसद में भी टकराव का कारण बन गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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