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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की रायबरेली सीट से सांसदी को चुनौती देने वाली अधिकार पृच्छा (क्वो वारन्टो) याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2019 के मानहानि मामले में सूरत कोर्ट द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्टे लगा चुका है। ऐसे में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत उनकी अयोग्यता का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। अदालत ने कहा कि राहुल गांधी पर सांसद बने रहने या चुनाव लड़ने की कोई पाबंदी नहीं है।
याचिका लखनऊ के वकील अशोक पांडे द्वारा दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि सूरत की सजा के बाद राहुल गांधी की सदस्यता स्वतः समाप्त हो चुकी है और इसलिए रायबरेली से उनकी सांसदी रद्द की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को निराधार बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश प्रभावी रहते हुए कोई अयोग्यता लागू नहीं की जा सकती। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाए बिना याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट का यह फैसला राहुल गांधी के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में रायबरेली से जीत दर्ज की थी। वहीं, याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार कर रहे हैं।
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