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कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की वेयरहाउसिंग व्यवस्था को लेकर सरकार पर बोला हमला
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भाेपाल । मप्र वेयरहाउसिंग का ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है। हालत यह है कि प्रदेश के 7000 से ज्यादा निजी वेयरहाउस संचालकों को किराए तक का भुगतान नहीं हो रहा है। कई संचालक तो ऐसे हैं जिन्हें वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन ने तीन-तीन साल से एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया है। कई वेयरहाउस बैंकों द्वारा एनपीए घोषित हो चुके हैं और कई होने की कगार पर हैं। मध्य प्रदेश की वेयरहाउसिंग व्यवस्था की स्थिति काे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने प्रदेश सरकार पर बड़ा हमला बाेला है।

 

दरअसल कमलनाथ ने शनिवार काे उक्‍त बातें साेशल मीडिया एक्स पर पाेस्ट करते हुए कही हैं।  उन्हाेंने कहा कि सरकार ने मार्कफेड, सिविल सप्लाई निगम और नेफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से निजी वेयरहाउस लिए, लेकिन किराया और भुगतान रोक दिया। लोगों ने सरकार पर भरोसा करके जमीन गिरवी रखकर करोड़ों के वेयरहाउस बनाए थे। अब तीन-तीन साल से पैसा न मिलने के कारण वे बैंक के कर्ज में डूब चुके हैं। कई मालिक अपने घर, जमीन और जेवर बेचकर ईएमआई भर रहे हैं और फिर भी कर्ज बढ़ता ही जा रहा है।

 

वेयरहाउस के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं


पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आगे कहा कि पूरे प्रदेश में 8600 से अधिक वेयरहाउस हैं, जिनकी कुल क्षमता 4.20 करोड़ मीट्रिक टन है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 79.57 लाख मीट्रिक टन का ही उपयोग किया। यानी सरकार ने गोदाम खाली छोड़ दिए, और जिन लोगों ने करोड़ों लगाकर यह व्यवस्था खड़ी की, उन्हें बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया। न भुगतान कर रही है, न गोदाम खाली कर रही है और न कोई स्पष्ट नीति बना रही है। एक वेयरहाउस मालिक बताते हैं कि उन्होंने सरकार के भरोसे कर्ज लेकर बड़ा गोदाम बनाया। सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि पाँच साल तक लगातार भंडारण मिलेगा, लेकिन सच्चाई यह है कि तीन साल से सरकार की तरफ से एक रुपया तक नहीं मिला। अब बैंक नीलामी की नोटिस भेज रहा है। यह स्थिति सरकार की नीतियों और गैरजिम्मेदारी का ज्वलंत उदाहरण है। दूसरे मालिक बताते हैं कि उनका आधा गोदाम खाली पड़ा है,  जो हिस्सा भरा है, उसका भी किराया महीनों से नहीं मिला। किश्तें अटक गई हैं, कर्ज बढ़ गया है और उनका पूरा व्यवसाय ठप हो गया है। सरकार न तो वेयरहाउस खाली कर रही है न भुगतान कर रही है और न समाधान बता रही है।

 

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आर्थिक दुर्घटना


कमलनाथ ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जब देश में भंडारण की जरूरत बढ़ रही है तब मध्यप्रदेश में हजारों वेयरहाउस ताले डालकर खड़े हुए हैं। प्याज भंडारण का पैसा भी अटका है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान सरकार ने रोक रखा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि एक आर्थिक दुर्घटना है जिसे सरकार ने खुद पैदा किया है। सरकार से स्पष्ट सवाल उठते हैं, आखिर हजारों करोड़ रुपये का भुगतान क्यों नहीं किया गया? वेयरहाउस खाली क्यों रखे गए? भुगतान रोकने का फैसला किसने और क्यों लिया? और उन हजारों लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा जो सरकार पर भरोसा करके आज कर्ज में डूब चुके हैं?

पूर्व मुख्यमंत्री ने आराेप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर सरकार तमाशा देख रही है। किसानों, व्यापारियों और वेयरहाउस मालिकों की मेहनत और पूंजी को नष्ट कर दिया गया है। यह प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सरकार द्वारा की गई आर्थिक हत्या है। जनता अब जवाब मांग रही है और सरकार को यह जवाब देना ही चाहिए। 

 
Kolar News 29 November 2025

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