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नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या नॉमिनेशन किया जा रहा है या आवेदन बुलवाए गए हैं? नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। कोर्ट में सरकार ने पिछले लोकसभा चुनाव के पहले हलफनामा दिया था कि तीन महीने में नियुक्तियां की जाएंगी। उसका पालन नहीं हुआ।नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने साेशल मीडिया एक्स पर पाेस्ट कर लिखा आज मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के रिक्त पद की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति की बैठक बुलाई गई है। इस प्रस्तावित नियुक्तियों में कई तरह की आपत्तियां हैं…
1) नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में (नॉमिनेशन है या एप्लीकेशन (आवेदन) बुलवाये गए हैं।)
2) माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय हाई कोर्ट के ऑर्डर
3) न्यायालयों में सरकार द्वारा दिए गए हलफनामों
4) एक्ट में निर्धारित समय सीमा के संबंध में
5) नामांकित किए गए कैंडिडेट्स कि योग्यता
6) पद का नाम अपने विवेक से बदलना
7) समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधत्व
8) विशेष लोगों को फायदा पहुंचाने को लेकर (उनको गोपनीय रूप से पद रिक्त होने की सूचना देकर आवेदन बुलवाए गये )
9) इस प्रक्रिया को इतने सीक्रेटिव (गोपनीय) तरीके के छुप-छुप के करने के संबंध में
10) बार बार एक ही व्यक्ति विशेष को चयनित कर अध्यक्ष का प्रभार देने के संबंध में।
11) मानव अधिकार एक्ट के विभिन्न प्रावधानों को लेकर
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