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मप्र विधानसभा में उठा प्रश्नकाल में सदस्यों के सवालों के जवाब नहीं दिए जाने का मुद्दा
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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन मंगलवार को सदन में प्रश्नकाल में कांग्रेस के बाला बच्चन ने सदस्यों के सवालों के जवाब नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान पॉइंट ऑफ ऑर्डर नहीं उठाया जा सकता है, इसलिए इस मामले में अभी चर्चा नहीं हो सकती। इस पर बाला बच्चन ने कहा कि जब मुख्यमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि सदस्यों के सवाल के जवाब हर हाल में दिया जाना है तो वित्त मंत्री जवाब क्यों नहीं देते हैं? इसको लेकर दो मिनट तक बहस की स्थिति बनी रही। इसके बाद प्रश्न काल शुरू हुआ।
 
आज प्रश्नकाल के दौरान बालाघाट से कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने सवाल किया कि महिला और बाल विकास विभाग में 15 साल से सहायक ग्रेड 3, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं की गई है। कर्मचारी परेशान हैं और उनकी कार्य क्षमता पर असर पड़ रहा है। सरकार इस मामले में क्या कहना चाहती है? इस पर महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि अभी प्रमोशन पर स्टे है। जब इस मामले में अंतिम निर्णय होगा तो कार्रवाई की जाएगी।
 
विधायक झूमा सोलंकी ने जनसंपर्क राशि को लेकर पूछा सवाल
सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क की राशि को लेकर सवाल उठाया। पूछा कि प्रभारी मंत्री द्वारा इसके लिए राशि का अनुमोदन कब किया गया? इस पर मंत्री कृष्णा गौर ने जवाब में कहा कि मामले में कार्य एवं शाखा प्रभारी इरशाद सुखी, सहायक ग्रेड 3 का निलंबन हुआ था। तत्कालीन जिला योजना अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर, जिला योजना अधिकारी को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। आगे भी जांच कर लेंगे।
 
विधायक सोलंकी ने मामले में खरगोन के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग को भी घेरा। कहा कि प्रभारी मंत्री इस मामले में ध्यान नहीं देते हैं। अभी भी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। इस पर मंत्री सारंग ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। इस मामले में विधायक से चर्चा कर आगे की कार्रवाई करेंगे।

खनिज विभाग द्वारा आवंटित फंड को लेकर सदन में विपक्ष का हंगामा
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक गंगा सज्जन सिंह ने खनिज विभाग द्वारा आवंटित फंड के मामले में जानकारी मांगी। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में 15 करोड़ रुपये से काम करने का मामला उठाया। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक के 15 करोड़ के काम से संबंधित मामले का जवाब दिया जाना चाहिए। इसके बाद सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
 
भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि विधायक के सवाल के जवाब में कहा गया है कि खनिज मद से कार्य किए जाने संबंधी कोई प्रावधान नहीं है तो क्या डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड से राशि देने पर रोक लगा दी गई है, यह स्पष्ट किया जाए। इसके जवाब में मंत्री चैतन्य कश्यप ने कहा कि डीएमएफ राशि जिले में अलग से खर्च की जाती है। रॉयल्टी की राशि राज्य स्तर पर आती है और राज्य के अंदर बजट के प्रावधान के अनुसार उसका वितरण होता है।

पुरानी पेंशन योजना पर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
वहीं, कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने पुरानी पेंशन की बहाली का मामला उठाते हुए कहा कि प्रदेश में 2005 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को नई पेंशन योजना में लाया गया है। उन्हें पुरानी पेंशन योजना में कब लाया जाएगा? क्या सरकार पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर विचार कर रही है? जब राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब में पुरानी पेंशन योजना बहाली पर काम हो रहा है तो मध्यप्रदेश क्यों पीछे है? ओपीएस की बहाली के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसलिए बाकी सवाल नहीं उठते हैं।
 
इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक चंदा सुरेंद्र सिंह गौर ने पलेरा के महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रदीप मिश्रा के स्थानांतरण का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मिश्रा द्वारा गलत जानकारी दिलाई गई है। उन्हें कब हटाया जाएगा? इसका जवाब देते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि तबादला नीति के तहत सीमित संख्या में स्थानांतरण किए जाने का प्रावधान था इसलिए तबादला नहीं हो सकता है। इस मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।
Kolar News 5 August 2025

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