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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को तोड़ने वाले आज इतिहास के पन्नों में सिमट चुके हैं। पीएम ने कहा कि करीब 1000 साल पहले आक्रांताओं को लगा था कि वे सोमनाथ को नष्ट कर जीत गए हैं, लेकिन आज मंदिर पर फहराती ध्वजा हिंदुस्तान की शक्ति और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं और समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए कहा कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली थी, तब उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने पर भी आपत्ति जताई गई थी। पीएम मोदी ने कहा कि जिन देशों के पास अपनी विरासत होती है, वे उस पर गर्व करते हैं, लेकिन आजादी के बाद कुछ लोगों ने गुलामी की मानसिकता के चलते अपनी ही विरासत को भुलाने की कोशिश की।
पीएम मोदी ने कहा कि 1026 में गजनवी और बाद में खिलजी ने सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि आज सोमनाथ पर पहले हमले के 1000 साल और पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं। विदेशी आक्रांताओं और मजहबी कट्टरपंथियों ने सदियों तक भारत को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन न सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत। इससे पहले पीएम मोदी ने मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की और शिवलिंग का अभिषेक किया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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