Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने और “बात सीट की नहीं, जीत की है” जैसे नारे के बीच अब सहयोगी दलों और विरोधियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला और उनके दावों को “झूठ” करार दिया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान का समर्थन करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव लगातार बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन उनके दावे कभी सच साबित नहीं होते। उन्होंने कहा, “2022 में उन्होंने 400 सीटें जीतने की बात कही थी, 2024 में सरकार बनाने का दावा किया था और 2017 में भी इसी तरह के बयान दिए थे, लेकिन सब गलत साबित हुए। अखिलेश यादव 100 फीसदी झूठ बोलते हैं और उन्हें खुद नहीं पता कि कौन सी सीट जीतेंगे।” राजभर ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर उन्हें राजनीति की इतनी समझ होती तो वे उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के सपने नहीं देखते। वहीं भाजपा नेता और मंत्री अनिल राजभर ने भी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि साल के 365 दिन जनता के बीच रहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चौबीसों घंटे काम करती है। गौरतलब है कि यूपी में आगामी चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग और रणनीति को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
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भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। 13 दिन बाद आज शाम 5 बजे ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। इससे पहले भोपाल एम्स में दिल्ली एम्स की चार सदस्यीय मेडिकल टीम ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने अंतिम संस्कार की जानकारी देते हुए कहा कि परिवार लंबे समय से निष्पक्ष जांच और दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहा था। वहीं मां का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार अब भी मामले की सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि पहले पोस्टमार्टम में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने दिल्ली एम्स मेडिकल बोर्ड को पत्र लिखकर निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की मांग की थी। परिवार का कहना है कि पहले पोस्टमार्टम में कई पहलुओं की सही तरीके से जांच नहीं हुई, इसलिए दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत पड़ी। वहीं ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने कहा कि अंतिम संस्कार में कौन शामिल होगा, यह व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार किसी को औपचारिक निमंत्रण नहीं दे रहा है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “एक युवती की ससुराल में अप्राकृतिक मौत और कथित संस्थागत पूर्वाग्रह” से जुड़ा मामला बताते हुए सूचीबद्ध किया है। गौरतलब है कि नोएडा निवासी 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। 12 मई की रात परिवार से बातचीत के कुछ घंटों बाद उसकी मौत की खबर आई, जिसके बाद पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया।
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वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में VIP और स्पर्श दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी करने वाले 25 दलालों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। चौक और दशाश्वमेध थानों की संयुक्त कार्रवाई में रविवार सुबह अभियान चलाकर यह गिरफ्तारी की गई। पुलिस के अनुसार ये लोग लंबे समय से मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं को झांसा देकर पैसे ऐंठ रहे थे। जानकारी के मुताबिक चौक थाना पुलिस ने 22 और दशाश्वमेध थाना पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा है। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि कई दिनों से मंदिर के आसपास अवैध रूप से VIP दर्शन कराने के नाम पर ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद सुबह 4 से 5 बजे के बीच विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात कर आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए दलाल श्रद्धालुओं को VIP दर्शन का झांसा देकर 500 से 2000 रुपये तक वसूलते थे। कुछ आरोपी खुद को पुजारी या न्यास का कर्मचारी बताकर लोगों को भ्रमित करते थे। कार्रवाई के दौरान कुछ आरोपी भागने की कोशिश भी कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ा। सभी के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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राजस्थान के चूरू जिले के तारानगर क्षेत्र में कुछ युवा छात्रों ने इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से जुड़ी बड़ी समस्या का समाधान पेश करने का दावा किया है। ब्रह्म नगर निवासी छात्र सिद्धार्थ शर्मा और उनकी टीम—सुनील मीणा व आयुष जावर—ने मिलकर “सोलर असिस्टेड स्मार्ट ईवी चार्जिंग सिस्टम विद वायरलेस चार्जिंग” विकसित किया है। यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों को बिना प्लग लगाए, ऑटोमैटिक तरीके से चार्ज करने का दावा करती है। छात्रों के अनुसार यह सिस्टम वायरलेस चार्जिंग तकनीक पर आधारित है, जिसमें पार्किंग या चार्जिंग जोन में लगाए गए विशेष प्लेटफॉर्म से वाहन को ऊर्जा मिलती है। जैसे ही कोई इलेक्ट्रिक वाहन निर्धारित क्षेत्र में पार्क होता है, चार्जिंग प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। इस तकनीक को सोलर एनर्जी से भी जोड़ा गया है, जिससे सौर पैनलों के जरिए बिजली उत्पन्न कर चार्जिंग में उपयोग किया जाएगा। इससे पारंपरिक बिजली खपत कम होने और ऊर्जा संरक्षण में मदद मिलने का दावा किया गया है। टीम का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में शॉपिंग मॉल, हाइवे ढाबों और पार्किंग जोन में उपयोगी साबित हो सकती है, जहां वाहन पार्क करते ही चार्ज होने लगेंगे। यहां तक कि ट्रैफिक सिग्नलों पर भी इस सिस्टम के इस्तेमाल की संभावना बताई गई है, जिससे रेड लाइट पर खड़े वाहन भी चार्ज हो सकेंगे। हालांकि यह तकनीक अभी विकास और परीक्षण चरण में है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में एक संभावित नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।
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Patrakar Priyanshi Chaturvedi
ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील को अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं, लेकिन विपक्ष के साथ-साथ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस समझौते को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच फिल्म क्रिटिक कमाल राशिद खान (केआरके) ने भी ट्रंप पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ट्रंप के पुराने बयानों का जिक्र किया, जिनमें ईरान में सत्ता परिवर्तन, बिना शर्त सरेंडर, यूरेनियम नियंत्रण और तेल संसाधनों पर अमेरिकी पकड़ जैसी बातें शामिल थीं। केआरके ने तंज कसते हुए कहा कि अब सामने आ रही डील में अमेरिका को ही ईरान की कई शर्तें माननी पड़ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस पूरे विवाद में असली जीत किसकी हुई, इसका जवाब दुनिया जानती है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते में 60 दिनों तक सीजफायर बढ़ाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने जैसी शर्तें शामिल हैं। वहीं ट्रंप समर्थक इसे युद्ध की बजाय बातचीत से समाधान निकालने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। हालांकि समझौता अभी पूरी तरह अंतिम नहीं माना गया है, लेकिन इसने अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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Tamil Nadu में मुख्यमंत्री Joseph Vijay ने सत्ता संभालते ही कई बड़े प्रशासनिक बदलाव शुरू किए हैं। उन्होंने अपने काफिले के लिए आम ट्रैफिक न रोकने का आदेश दिया है और अलग लेन व्यवस्था लागू की गई है। महिला सुरक्षा के लिए ‘सिंगप्पेन फोर्स’ बनाई गई है, जबकि हर थाने में 24 घंटे सीसीटीवी और शिकायत दर्ज करने की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। इसके अलावा 21 साल से कम उम्र वालों को शराब बेचने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में मंदिरों, स्कूलों और बस स्टैंड के 500 मीटर दायरे में आने वाली 717 शराब दुकानों को बंद करने का फैसला भी लिया गया है। Kerala में नई यूडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री V. D. Satheesan ने मंत्रियों और जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया है। मंत्रियों को अपने आवास और कार्यालय दोनों जगह आम लोगों से मिलने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के काफिले में अब सिर्फ दो वाहन रहेंगे और सरकारी आवासों के लग्जरी रेनोवेशन पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने आशा वर्करों का मानदेय ₹3 हजार बढ़ाकर ₹12 हजार प्रति माह कर दिया है। साथ ही राज्य में देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंत्रालय बनाया गया है। वहीं West Bengal में मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने वीआईपी कल्चर कम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस को साफ कहा है कि उनके काफिले के लिए आम लोगों को न रोका जाए। सरकार विधानसभा कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट शुरू करने जा रही है। इसके अलावा 1 जून से महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू करने की तैयारी है और मदरसों सहित सभी शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी की घटना को लेकर बड़े खुलासे सामने आए हैं। 21 वर्षीय नासिर बेस्ट नाम के युवक ने सुरक्षा चेकपॉइंट के नजदीक फायरिंग की, जिसके बाद यूएस सीक्रेट सर्विस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे और पूरी तरह सुरक्षित रहे। गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और व्हाइट हाउस को करीब 30 मिनट तक लॉकडाउन में रखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी पहले से ही जांच एजेंसियों की निगरानी में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई संदिग्ध पोस्ट मिले हैं, जिनमें वह खुद को “असली ओसामा बिन लादेन” बताता था। इतना ही नहीं, उसने राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर धमकी भरे संदेश भी साझा किए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी कभी खुद को ईश्वर तो कभी ईसा मसीह बताने जैसी बातें भी ऑनलाइन करता था, जिससे उसकी मानसिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नासिर बेस्ट एक रिवॉल्वर लेकर संदिग्ध तरीके से घूम रहा था और उसने अचानक तीन राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस ने उसे मौके पर ही ढेर कर दिया, हालांकि इस दौरान एक आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की और भविष्य में और कड़े सुरक्षा इंतजामों की जरूरत पर जोर दिया। फिलहाल एफबीआई और मेट्रोपॉलिटन पुलिस मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं।
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अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने 21 मई को लॉस एंजेलिस में 26 वर्षीय भारतीय नागरिक परमिंदरपाल सिंह को गिरफ्तार किया। आईसीई की लॉस एंजेलिस यूनिट ने सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिका में अवैध प्रवासियों और आपराधिक रिकॉर्ड वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। आईसीई के मुताबिक परमिंदरपाल सिंह पर वाहन चोरी, बड़ी चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और तोड़फोड़ जैसे गंभीर आरोप हैं। एजेंसी ने उसे “क्रिमिनल नॉन-सिटिजन” बताते हुए हिरासत में लिया है। फिलहाल आरोपी को लॉस एंजेलिस के एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। मामले की सुनवाई इमिग्रेशन कोर्ट में होगी, जिसके बाद उसके डिपोर्टेशन पर फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि आईसीई अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के अधीन काम करने वाली संघीय एजेंसी है, जो इमिग्रेशन और कस्टम्स कानूनों को लागू करती है। एजेंसी अवैध प्रवासियों, वीजा अवधि से अधिक समय तक रहने वालों और आपराधिक मामलों में शामिल विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करती है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से आईसीई की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद भी बढ़े हैं। मानवाधिकार और प्रवासी संगठनों ने एजेंसी पर कठोर और मनमानी कार्रवाई के आरोप लगाए हैं।
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