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मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। कार्बन डाईऑक्साइड के बाद मीथेन गैस राज्य में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनती जा रही है। सैटेलाइट आधारित आकलन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मीथेन और अन्य प्रदूषकों के प्रमुख स्रोतों की पहचान की गई है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में उद्योग और परिवहन से उत्सर्जन हो रहा है, जबकि सिंगरौली में कोयला खनन मीथेन का बड़ा स्रोत बताया गया है। सागर, मुरैना, रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में पशुपालन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन भी चिंता का विषय है। जलवायु विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक बढ़ते प्रदूषकों का असर आने वाले वर्षों में तापमान पर पड़ सकता है। 2030 के दशक तक मध्यप्रदेश में औसत अधिकतम तापमान में करीब 1.8 से 2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 2 से 2.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र अपेक्षाकृत तेजी से गर्म होने वाले इलाकों में शामिल है। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिलों में जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता कम होने के कारण जोखिम ज्यादा माना गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाने से निकलने वाला ब्लैक कार्बन भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। उत्सर्जन कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और साफ ईंधन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है। खेती में बेहतर तकनीक अपनाकर धान से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को काफी हद तक घटाया जा सकता है, जबकि चारे के बेहतर प्रबंधन से पशुपालन क्षेत्र में मीथेन उत्सर्जन में 10 से 15 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है। कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को नियंत्रित करने, बायोगैस को बढ़ावा देने और उद्योग-परिवहन के लिए अलग-अलग उत्सर्जन लक्ष्य तय करने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही रियल टाइम मॉनिटरिंग और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों के जरिए प्रदूषण पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई गई है।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद नगर निगम ने राजधानी की इमारतों की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए हैं। MCD के सभी जोन के बिल्डिंग विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने इलाकों में निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों को 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपनी होगी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 6 लोग घायल हुए हैं। इस घटना के बाद पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर 10 सितंबर को सुनवाई करेगा और जरूरत पड़ने पर केस को हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार कर सकता है। हादसे की जांच के दौरान बिल्डिंग मालिकों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है। पुलिस ने प्रॉपर्टी मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उर्मिला और हरिराम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली है। पुलिस अब PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की तलाश कर रही है और हादसे में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। वहीं MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी निलंबित किया है। साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को दिया गया है। सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG संचालित होने की जानकारी है। यह इलाका पहले पुनर्वास के लिए बसाया गया था, लेकिन बाद में आसपास के शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार के साथ यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गई और कई मकान PG में बदल गए। MCD के अनुसार, इस साल किए गए सर्वे में करीब 27.84 लाख इमारतों की जांच की गई थी, जिनमें 19 को खतरनाक पाया गया। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की कई पुरानी इमारतों पर बाद में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण हुआ है, जिससे उनकी संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में हादसे के बाद व्यापक जांच से कमजोर इमारतों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करने पर जोर बढ़ गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के मौके पर भाजपा देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने जा रही है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के जनसेवा और सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने के अवसर पर विशेष आयोजन होंगे। इसी कड़ी में गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक ‘सेवा यात्रा’ निकालने की योजना है, जो 17 राज्यों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान युवाओं की टीमें बनाई जाएंगी और विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों के जरिए प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और सरकार की उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। नितिन नवीन के मुताबिक 7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ भी आयोजित की जाएगी। इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में बाइक रैलियां और पदयात्राएं निकाली जाएंगी। भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों को विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दिलाने की भी योजना है। वडनगर से वाराणसी तक प्रस्तावित यात्रा को प्रधानमंत्री के जन्मस्थान और उनके मौजूदा संसदीय क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रतीक के तौर पर पेश किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इन आयोजनों के जरिए सेवा, विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाया जाएगा। अभियान की जानकारी देते हुए भाजपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने और प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में किए गए कार्यों का भी उन्होंने जिक्र किया। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों को ‘भारत के प्रथम गांव’ के रूप में विकसित करने की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इन क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की भूमिका को लेकर दृष्टिकोण में बदलाव किया है
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भोपाल । विकास के नाम पेड़ों की बलि दे दी गई। अब इसको लेकर एनजीटी सख्त है। नितिन सक्सेना मामले की सुनवाई को लेकर एनजीटी ने नगर निगम, वन विभाग से रिकॉर्ड मांगा है। कहा गया कि पेड़ काटने के बाद उनकी भरपाई नाम मात्र की हुई। पौधों की कम जीवितता दर गंभीर है। केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है। एनजीटी ने कहा है मरे पौधों की जगह दोबारा पौधे लगाए जाएं। 100 प्रतिशत सर्वाइवल हो। सड़क किनारे और मीडियन में लगाए जाने वाले 10 हजार पौधों, हुजूर तहसील में आवंटित जमीन पर लगाए गए 70 हजार पौधों का साइटवार विवरण और तस्वीरें देने के लिए कहा गया है। पांच साल में लगाए गए पौधों की औसत ऊंचाई, मोटाई और सर्वाइवल प्रतिशत का रिकार्ड भी मांगा है। छह अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। राशि मिली पर नहीं शुरू हुआ काम डीएफओ पर्यावरण वानिकी मंडल की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पौधारोपण के लिए राशि मिलने के बावजूद 2026 के मानसून में पौधारोपण शुरू नहीं हुआ। एनजीटी ने इस देरी पर भी रिपोर्ट मांगी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पिछले पांच वर्षों में एनएचएआई और अन्य एजेंसियों से मिली राशि तथा उसके बदले किए गए पौधारोपण का जिला-वार ब्यौरा देना होगा।
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मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी जी ने नगरीय निकायों के उपचुनाव स्थगित किए जाने पर निर्वाचन आयोग और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, तब ऐन वक्त पर चुनावों को आगामी आदेश तक स्थगित करना लोकतंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ने कहा कि नगरपालिका, नगर निगम और नगर पंचायत के उपचुनाव स्थगित कर दिए गए हैं, जबकि जनपद पंचायत और जिला पंचायत के उपचुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं। आखिर एक ही प्रदेश में चुनावों को लेकर यह दोहरा मापदंड क्यों?उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर होते हैं। ऐसे में भाजपा को यह डर क्यों सता रहा है कि पार्टी के सिंबल पर चुनाव होने पर जनता उसे नकार सकती है?अगर भाजपा को अपनी लोकप्रियता और जनसमर्थन पर इतना ही भरोसा है, तो फिर चुनाव से भागने की जरूरत क्यों पड़ रही है? कहा कि निर्वाचन आयोग कोई राजनीतिक दल नहीं है, जिसे सत्ता की सुविधा और राजनीतिक गणित के हिसाब से चुनाव कराने अथवा रोकने का अधिकार हो। चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और उन्हें मनमाने तरीके से स्थगित करना संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। पटवारी ने कहा कि 7 सितंबर 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र में नगरीय निकायों के उपचुनाव को आगामी आदेश तक स्थगित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले निर्वाचन कार्यक्रम जारी किया जा चुका था। अब अचानक चुनाव रोकने का फैसला प्रदेश की जनता के मन में कई सवाल खड़े कर रहा है। पटवारी के सवाल जब चुनाव घोषित किए गए थे, तब क्या प्रशासन को कानून-व्यवस्था, अतिरिक्त सुरक्षा बल, बारिश, आपदा राहत कार्य और आगामी त्योहारों की जानकारी नहीं थी?यदि ये कारण पहले से मौजूद थे, तो चुनावी कार्यक्रम जारी करने से पहले इनका आकलन क्यों नहीं किया गया? पटवारी ने कहा कि यह केवल चुनाव स्थगित करने का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि मध्यप्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया किसके दबाव और किसके राजनीतिक हित के अनुसार संचालित हो रही है। उन्होंने कहा भाजपा की हार का डर चुनाव रोककर नहीं छिपाया जा सकता। मध्यप्रदेश की जनता सब देख रही है। चुनाव आज नहीं तो कल होंगे, लेकिन जब जनता फैसला करेगी तो सत्ता का पूरा खेल सामने आ जाएगा।” पटवारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव स्थगित करने के वास्तविक कारणों को प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली राजनीतिक दबाव से प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जनता का अधिकार है, किसी सरकार की सुविधा नहीं। कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं करेगी।
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने धर्म के नाम पर लूट और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ के खिलाफ यात्रा का औपचारिक ऐलान कर दिया है। उन्होंने 20 अक्टूबर, 2026 को विजयादशमी के दिन उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर पारदर्शिता, सत्य और श्रद्धा की रक्षा तथा सामाजिक सद्भाव के लिए निकाली जा रही है। उन्होंने यात्रा से जुड़ने को इच्छुक लोगों के लिए गूगल फॉर्म भी जारी किया है। सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जारी वीडियो संदेश में दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु श्री राम करोड़ों सनातनियों की आस्था और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौर को याद करते हुए कहा कि 1988-89 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा शुरू किए गए राम शिला पूजन अभियान में वैचारिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने भी हिस्सा लिया था और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दिया था। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा चंदे और चढ़ावे का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में करोड़ों रुपये के घपले की बात सामने आई है और चंदे तथा चढ़ावे के धन से निजी संपत्तियां और वाहन खरीदे जाने जैसे प्रकरण सामने आए हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि हमारी आस्था के बिंदु और हमारी चढ़ोत्तरी को लूटा गया है, इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए गठित ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भी चढ़ावे की लूट में शामिल हैं और पूरी सरकार चम्पत राय को बचाने में लगी हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है और इसी भावना को लेकर उन्होंने शिवधाम (उज्जैन) से रामधाम (अयोध्या) तक \"सनातन स्वाभिमान यात्रा\" निकालने का निर्णय लिया है। यात्रा का ध्येय वाक्य होगा \"यतो धर्मस्ततो जयः\"। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या दल का विरोध करना नहीं, बल्कि धर्म और आस्था के नाम पर कथित भ्रष्टाचार एवं लूट के खिलाफ जनजागरण करना है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि लोग धर्म के नाम पर हो रही लूट और अधर्म के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं तो वे इस यात्रा से जुड़ें। यात्रा में सहभागिता के लिए उन्होंने एक गूगल फॉर्म भी जारी किया है, जिसके माध्यम से इच्छुक लोग अपना पंजीयन करा सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आइए, मिलकर सनातन स्वाभिमान की इस यात्रा को जन-जन तक पहुंचाएं।
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भोपाल में खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाली तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। बागसेवनिया थाने में दर्ज FIR के अनुसार, तृप्ति ने एक कारोबारी को मध्यप्रदेश पर्यटन निगम की एडिशनल डायरेक्टर बताकर पंचमढ़ी, तवा और रातापानी स्थित होटल-रिसॉर्ट कम कीमत पर लीज पर दिलाने का भरोसा दिया था। इस मामले में उसके भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक यह तृप्ति के खिलाफ चौथी FIR है, जबकि भोपाल में यह दूसरा मामला दर्ज हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कारोबारी गगन उपवंशी की मुलाकात अगस्त 2025 में एक रिश्तेदार के जरिए तृप्ति और उसके भाई से हुई थी। तृप्ति ने खुद को IAS अधिकारी और एमपीटी में एडिशनल डायरेक्टर बताकर अपनी पहचान का प्रभाव बनाया और कारोबारी को भरोसे में लिया। इसके बाद होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 49.96 लाख रुपये लिए गए। इसमें 14 दिसंबर को 17 लाख, 23 फरवरी को 13 लाख और 31 मार्च को 15 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी रकम ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ली गई। शिकायत के बाद पुलिस ने तृप्ति, उसके भाई और साथी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तृप्ति फिलहाल अशोकनगर जेल में बंद है। बागसेवनिया पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, ताकि ठगी के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इससे पहले पुलिस ने उसके भोपाल स्थित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई फर्जी अवॉर्ड और ट्रॉफियां बरामद की थीं। इनमें अशोक स्तंभ लगी एक ट्रॉफी भी शामिल थी, जिस पर तृप्ति को अधिकारी के तौर पर दर्शाया गया था। पुलिस को शक है कि ऐसे फर्जी सम्मान और पहचान का इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव जमाने और ठगी के लिए भरोसा पैदा करने में किया जाता था।
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रायसेन जिला जेल में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। घटना में प्रहरी दिग्विजय सिंह घायल हो गए। उन्हें तत्काल रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर भोपाल एम्स रेफर कर दिया गया। घटना के बाद जेल परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल जैसी सुरक्षित जगह के अंदर आरोपी के पास हथियार पहुंचा कैसे। जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 9 बजे उस समय हुई, जब जेल का स्टाफ अपनी ड्यूटी पर तैनात था। आरोपी नीलेश ठाकुर पर पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद था। बताया जा रहा है कि वह जेल का गेट खुलवाकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसने जेल प्रहरी पर फायर कर दिया। उस समय जेल में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम भी प्रस्तावित था। इसी कार्यक्रम के लिए आरोपी फलों की टोकरी लेकर गेट के पास पहुंचा था। पुलिस अब घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों और आरोपी के पास हथियार पहुंचने के तरीके की पड़ताल कर रही है। घटना की जानकारी मिलते ही रायसेन एसपी आशुतोष गुप्ता समेत पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जेल स्टाफ से पूछताछ शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एसपी ने कहा कि जेल परिसर के भीतर हथियार पहुंचना गंभीर मामला है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई और आरोपी को हथियार किस तरह मिला। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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