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मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2026 का आयोजन 7 से 12 सितंबर तक किया जाएगा। परीक्षा प्रदेश के 12 संभागीय और जिला मुख्यालयों पर एक ही शिफ्ट में आयोजित होगी। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होने वाली इस परीक्षा में कुल 3775 अभ्यर्थी शामिल होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से करीब 90 मिनट पहले पहुंचना होगा। यानी अभ्यर्थियों को सुबह 8:30 से 9 बजे के बीच सेंटर पर उपस्थित होना जरूरी रहेगा। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए राज्य सेवा के 156 पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। परीक्षा के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर समेत 12 शहरों में केंद्र बनाए गए हैं। आयोग की ओर से परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हर केंद्र पर ऑब्जर्वर की तैनाती रहेगी, जबकि सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ई-प्रवेश पत्र स्कैनिंग और एचएचएमडी से जांच जैसी व्यवस्थाएं भी लागू रहेंगी। अभ्यर्थियों को केंद्र पर केवल बॉल पेन, पारदर्शी पानी की बोतल, ई-प्रवेश पत्र और वैध पहचान पत्र ले जाने की अनुमति होगी। जरूरी दवाइयां लेने वाले अभ्यर्थी उन्हें भी साथ रख सकेंगे। एमपीपीएससी की गाइडलाइन के मुताबिक, परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश से पहले जांच प्रक्रिया पूरी करनी होगी, इसलिए आखिरी समय में केंद्र पहुंचने से बचने की सलाह दी गई है। पुरुष और महिला अभ्यर्थियों की तलाशी अलग-अलग व्यवस्था के तहत की जाएगी। वहीं, राज्य वन सेवा मुख्य परीक्षा-2026 का आयोजन 27 सितंबर को प्रस्तावित है। परीक्षा से जुड़ी एडमिट कार्ड, केंद्र, नियम और अन्य जरूरी जानकारी के लिए अभ्यर्थियों को एमपीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी निर्देशों को ही अंतिम मानना होगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘खेलो इंडिया संवाद’ के जरिए देशभर के युवाओं और खिलाड़ियों से वर्चुअली बातचीत की। 1,500 से ज्यादा स्थानों पर जुड़े युवाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को ओलंपिक में अपनी भागीदारी और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों की तैयारी अभी से शुरू करने पर जोर दिया। पीएम ने कहा कि देश के हर जिले में खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जरूरत उन्हें पहचानने, सही प्रशिक्षण देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण जरिया है। उन्होंने युवाओं से स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने के बजाय खेल के मैदान और स्पोर्ट्स सेंटर से जुड़ने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को ओलंपिक के उन खेलों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी, जिनमें अभी देश की भागीदारी कम है। उन्होंने सर्फिंग जैसे नए खेलों को बढ़ावा देने के साथ मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने और खिलाड़ियों को हर स्तर पर बेहतर अवसर देने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में कई मौजूदा और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी भी शामिल हुए। पीएम मोदी ने भारतीय खिलाड़ियों और पैरा एथलीट्स की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि खेलों में नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन और स्पोर्ट्स साइंस जैसे क्षेत्रों में भी करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं। वहीं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि देश में खेलों को लेकर बदलाव सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सोच में भी बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि आज खिलाड़ी तिरंगे को दुनिया के मंच तक पहुंचाने के साथ देश के युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
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दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में सड़क के गड्ढों को लेकर आनंद विभाग मंत्री और पथरिया विधायक लखन पटेल का बयान चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान जब उनसे सड़कों की खराब हालत और गड्ढों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बुंदेली अंदाज में कहा कि अपने दद्दा से पूछो, उन्होंने पहले सड़क देखी भी थी या नहीं। मंत्री का कहना था कि पहले इलाके में सड़कें ही नहीं थीं, जबकि अब लोग सड़कों पर गड्ढों की शिकायत कर रहे हैं। उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। मंत्री लखन पटेल ने अपने बयान में कहा कि पहले सड़कें नहीं होने के कारण आज की सड़कों में दिखाई देने वाले गड्ढों को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को अब गड्ढे नजर आ रहे हैं, उन्होंने पहले की सड़क व्यवस्था देखी ही नहीं है। जिले में सड़क की बदहाली को लेकर पहले भी ग्रामीणों और छात्रों की ओर से विरोध की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में मंत्री के बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार के आनंद विभाग के मंत्री भी आनंद में हैं और युवाओं को सड़क की जगह गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। पटवारी के इस बयान के बाद सड़क की स्थिति और मंत्री के बयान को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। इससे पहले भी लखन पटेल सड़कों से जुड़े अपने बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं।
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ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र की स्पष्टीकरण याचिका पर सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल करने के लिए 17 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। कोर्ट ने अपने 11 मार्च के आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया, यानी पिछला फैसला फिलहाल प्रभावी रहेगा और मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च के फैसले में ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ माता-पिता की आय या वेतन के आधार पर किसी परिवार को क्रीमी लेयर में शामिल करना उचित नहीं होगा। इसके लिए माता-पिता का पद, सामाजिक स्थिति और नौकरी की श्रेणी जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, बैंकों या निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को केवल अधिक वेतन मिलने के आधार पर आरक्षण के लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता। इसी आदेश को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले का असर UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2025 की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है, जिसको लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। केंद्र सरकार ने 958 सफल उम्मीदवारों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया को पुराने नियमों के तहत जारी रखने की अनुमति मांगी है। सरकार का कहना है कि इन उम्मीदवारों ने परीक्षा उस समय लागू नियमों के आधार पर दी थी और नोटिफिकेशन से लेकर परिणाम तक की प्रक्रिया उसी व्यवस्था के तहत पूरी हुई। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से केंद्र की याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट अब 17 सितंबर को मामले की आगे सुनवाई करेगा।
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एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने अजित पवार की विमान दुर्घटना से जुड़े मामले को लेकर महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमित ठाकरे के खिलाफ कथित तौर पर कुछ ही घंटों में FIR दर्ज होने का हवाला देते हुए पूछा कि अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के मामले में अब तक FIR क्यों नहीं हुई। सुले ने कहा कि छोटे मामलों में तेजी से कार्रवाई हो रही है, लेकिन उनके भाई की मौत जैसे गंभीर मामले में जांच की स्थिति को लेकर परिवार को स्पष्ट जानकारी नहीं है। सुप्रिया सुले ने अजित पवार गुट के नेताओं पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद उनके गुट के कई विधायक और सांसद सत्ता में हैं, लेकिन FIR और जांच को लेकर किसी ने सवाल नहीं उठाया। वहीं अमित ठाकरे से जुड़ा मामला पुणे के एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने की कथित घटना से संबंधित है। सुले ने दोनों मामलों में कार्रवाई की गति को लेकर सरकार से सवाल किया है। अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट के पास विमान हादसे में मौत हुई थी। इस दुर्घटना की जांच DGCA और Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB कर रहे हैं। शुरुआती जांच में खराब मौसम, कम दृश्यता और लैंडिंग से जुड़े कुछ तकनीकी व इंफ्रास्ट्रक्चर पहलुओं की जांच की बात सामने आई थी। हादसे की वजह और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसी बीच सुले के सवालों ने महाराष्ट्र की सियासत में विमान हादसे की जांच और FIR को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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मध्यप्रदेश बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री ने दिनभर भोपाल में कार्यक्रमों और कैबिनेट बैठक में हिस्सा लेने के बाद शाम को दिल्ली पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भाजपा संगठन से जुड़े कामकाज और प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद मध्यप्रदेश बीजेपी में संभावित बदलाव को लेकर सियासी अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। दरअसल, प्रदेश में संगठन स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। इसी बीच बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की, जबकि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी उनसे मिलने पहुंचे। नरोत्तम मिश्रा को संगठन में नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं। ऐसे में एक ही दिन में पार्टी के प्रमुख नेताओं की सक्रियता ने प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। दिल्ली में नितिन नवीन और मुख्यमंत्री मोहन यादव की बैठक को इसी संगठनात्मक गतिविधि से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में प्रदेश संगठन के कामकाज, सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय के साथ आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ। हालांकि, संगठन में किसे और कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन नेताओं की लगातार मुलाकातों के बीच प्रदेश बीजेपी में बड़े बदलाव की संभावना को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं।
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रायसेन जिला जेल में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। घटना में प्रहरी दिग्विजय सिंह घायल हो गए। उन्हें तत्काल रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर भोपाल एम्स रेफर कर दिया गया। घटना के बाद जेल परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल जैसी सुरक्षित जगह के अंदर आरोपी के पास हथियार पहुंचा कैसे। जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 9 बजे उस समय हुई, जब जेल का स्टाफ अपनी ड्यूटी पर तैनात था। आरोपी नीलेश ठाकुर पर पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद था। बताया जा रहा है कि वह जेल का गेट खुलवाकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसने जेल प्रहरी पर फायर कर दिया। उस समय जेल में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम भी प्रस्तावित था। इसी कार्यक्रम के लिए आरोपी फलों की टोकरी लेकर गेट के पास पहुंचा था। पुलिस अब घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों और आरोपी के पास हथियार पहुंचने के तरीके की पड़ताल कर रही है। घटना की जानकारी मिलते ही रायसेन एसपी आशुतोष गुप्ता समेत पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जेल स्टाफ से पूछताछ शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एसपी ने कहा कि जेल परिसर के भीतर हथियार पहुंचना गंभीर मामला है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई और आरोपी को हथियार किस तरह मिला। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में 17 अगस्त की सुबह भगदड़ जैसी स्थिति में कम से कम सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। घटना सावन के तीसरे सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के दौरान हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार बिजली के तार या पोल से जुड़ी अफवाह के बाद भीड़ में अचानक घबराहट फैली और लोग इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक उस समय मंदिर परिसर में भारी भीड़ थी। दो ट्रेनों के आने के कारण भी श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने की बात सामने आई है। भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई और कई लोग गिर गए। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया। घटना की जांच शुरू कर दी गई है और प्रशासन वास्तविक कारणों की पुष्टि कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में मौतों की संख्या को लेकर अंतर रहा, लेकिन कई स्वतंत्र रिपोर्टों में सात मौतों की पुष्टि की गई है। ऐसे धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और आपातकालीन रास्तों की पर्याप्तता पर अब सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन आगे की जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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