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नई दिल्ली। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभागों के राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने यहां “स्पेस, सोवरेनिटी एंड न्यू इकॉनॉमी” विषय पर आयोजित मीडिया राउंडटेबल के दौरान कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर है, अगले सात से आठ वर्ष में बढ़कर 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।मंत्री महोदय ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ द्वारा आयोजित इस राउंडटेबल में भाग लिया। उन्होंने कहा कि भारत को अब अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करने से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वाणिज्यिक अंतरिक्ष कंपनियों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय उद्यमों के विस्तार और वैश्विक बाजारों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के लिए घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय निवेश में वृद्धि, उत्पाद की मांग, नियामकीय अनुमोदनों में तेजी और सतत व्यावसायिक मॉडल आवश्यक होंगे। चर्चा में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि देश अपनी संप्रभु अंतरिक्ष क्षमताओं को वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्पर्धी उद्योगों में कैसे परिवर्तित कर सकते हैं, निजी पूंजी कैसे आकर्षित कर सकते हैं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं का विकास कैसे कर सकते हैं। प्रतिभागियों ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका और निजी अंतरिक्ष उद्यमों के विस्तार से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की। इस अवसर पर अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केन्द्र (इन-स्पेस) के संवर्धन निदेशक विनोद कुमार तथा स्टेमबोर्ड और लिंगो की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नासा की पूर्व इंजीनियर और ब्लू ओरिजिन की अंतरिक्ष यात्री आइशा बोवे शामिल थीं। इस सत्र में अंतरिक्ष उद्योग, उद्यमिता, शिक्षा जगत और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि निजी अंतरिक्ष कंपनियों के विकास के लिए मांग उत्पन्न करना आवश्यक है। सरकार के उपयोग-आधारित दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख सरकारी ग्राहकों की उपलब्धता और अवधारणा के प्रमाण (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट) से जुड़ी परियोजनाओं को समर्थन देने से उद्यमों को अपनी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने और उन्हें व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है। ग्राहकों का एक पूर्वानुमेय आधार कंपनियों को उत्पादन में निवेश करने, बाजार के लिए तैयार उत्पाद विकसित करने और आय के सतत स्रोत स्थापित करने का विश्वास प्रदान कर सकता है। उन्होंने समय पर नियामकीय अनुमोदन, कारोबार की लागत कम करने और आपूर्ति शृंखला के बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थापना या निर्यात लाइसेंस प्राप्त करने की इच्छुक कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक अनुमोदन मिल पाने चाहिए। अंतरिक्ष उत्पादों से संबंधित जीएसटी उपायों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सुधारों का लाभ उद्योग को व्यावहारिक रूप से मिलना चाहिए। निवेश तभी टिकाऊ बनता है, जब व्यवसायों को उत्पाद की मांग, कुशल प्रक्रियाएं और वाणिज्यिक विकास का स्पष्ट मार्ग उपलब्ध हो। निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संबंध में मंत्री ने कहा कि भारत स्वदेशी क्षमताओं को लगातार सुदृढ़ करते हुए निवेश और साझेदारियों के नए अवसर खोल रहा है। अधिक निवेश से प्रौद्योगिकी विकास, विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को बढ़ावा मिल सकता है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए घरेलू क्षमताएं महत्वपूर्ण बनी रहती हैं। उन्होंने भारतीय सरकारी संस्थानों और निजी उद्यमों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ साझेदारियां बढ़ाने का आह्वान किया। इस दृष्टिकोण से भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ने, अपने ग्राहक आधार का विस्तार करने और राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना व्यापक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में योगदान देने में मदद मिल सकती है। इसका उद्देश्य भारत में सार्वजनिक और निजी उद्यमों की क्षमताओं को विदेशों में स्थित भागीदारों की दक्षताओं के साथ जोड़ना है। मंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल अंतरिक्ष में हासिल की गई उपलब्धियों के लिए ही विशिष्ट नहीं है, बल्कि पृथ्वी पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग के लिए भी जाना जाता है। उपग्रह संचार, भू-स्थानिक अनुप्रयोग और पृथ्वी अवलोकन प्रौद्योगिकियां अवसंरचना विकास, परियोजनाओं की निगरानी, कृषि, आपदा प्रबंधन और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग प्रदान कर रही हैं। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने परियोजनाओं की मंजूरी, कार्यान्वयन की समय-सीमा की निगरानी और विकास कार्यों की जियो-टैगिंग में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग का उल्लेख किया। भारत म्यांमार, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित पड़ोसी देशों को भी आपदा प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष-आधारित जानकारी और सहायता प्रदान कर रहा है। ये अनुप्रयोग दर्शाते हैं कि अंतरिक्ष क्षमताओं में निवेश से सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, विकास को समर्थन और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के नए अवसरों का सृजन किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का व्यापक आर्थिक महत्व तकनीकी उपलब्धियों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों और नागरिकों की आवश्यकताओं से जोड़ने में निहित है। प्रक्षेपण यानों और उपग्रहों के साथ-साथ, भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों के बाजार का विस्तार करने में डाउनस्ट्रीम सेवाएं, डेटा-आधारित समाधान और औद्योगिक अनुप्रयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उद्देश्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत को अपने तकनीकी सामर्थ्य को लगातार विकसित करते हुए वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर अपने उद्योग के लिए अवसरों का विस्तार करना चाहिए। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने से निवेश, प्रौद्योगिकी विकास, आपूर्ति शृंखला में एकीकरण और नए बाजारों तक पहुंच को बढ़ावा मिल सकता है। मंत्री ने प्रगतिशील विचारों के प्रति खुला दृष्टिकोण बनाए रखने और प्रौद्योगिकी तथा उद्योग की आवश्यकताओं में बदलाव के अनुरूप नीतियों को अपनाने के महत्व पर भी बल दिया। निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलना इस बात को दर्शाता है कि स्थापित सार्वजनिक संस्थानों के साथ-साथ नए प्रतिभागियों को भी योगदान देने के अवसर प्रदान करना कितना महत्वपूर्ण है। भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास का अगला चरण तकनीकी क्षमताओं को व्यावसायिक रूप से सफल उद्यमों में बदलने पर निर्भर करेगा। अधिक निवेश, पूर्वानुमेय मांग, कुशल नियामक प्रक्रियाएं, स्वदेशी क्षमताएं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका को और व्यापक बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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नारायणपुर। सेवा संकल्प अभियान के अंतिम दिवस नारायणपुर में आयोजित जिला स्तरीय पंच-सरपंच प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम में ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि गांवों के विकास और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में पंच-सरपंचों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की जरूरतों को समझकर विकास की प्राथमिकताएं तय करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। ’जनविश्वास और जनभागीदारी से ही ग्रामीण विकास की योजनाओं के बेहतर परिणाम’ नारायणपुर के सिनेमा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में वन मंत्री कश्यप ने विकसित भारत जी राम जी योजना की सफलता के लिए पंचायत प्रतिनिधियों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंच-सरपंच गांवों में जाकर लोगों को योजनाओं के उद्देश्य और लाभ की जानकारी दें। पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करें। उन्होंने कहा कि जनविश्वास और जनभागीदारी से ही ग्रामीण विकास की योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।’ पंचायत प्रतिनिधि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित निगरानी करें’ कश्यप ने पंचायतों में स्वीकृत निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा में पूरा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, छात्रावास, सामुदायिक भवन, बालिका शौचालय, मुक्तिधाम, सड़क, पुल-पुलिया और महतारी सदन जैसे जनोपयोगी कार्यों का समय सीमा में पूर्णता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित निगरानी करें, ताकि ग्रामीणों को जल्द बेहतर सुविधाएं मिल सकें। ’स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर’ वन मंत्री ने ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने मछली पालन और बतख पालन के लिए क्षेत्र की संभावनाओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने तथा पात्र हितग्राहियों को इन गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
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भोपाल । मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया जाएगा। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार ने बताया कि कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश सहित देश के अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन को आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड-चेन अधोसंरचना, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजारों से जोड़ना है। सम्मेलन में देश के प्रमुख निवेशक, निर्यातक, मत्स्य उद्यमी, स्टार्ट-अप्स और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग लेकर मत्स्य उद्योग में निवेश एवं व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। मध्यप्रदेश में लगभग 4 लाख 50 हजार हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध है, जो अंतर्देशीय मत्स्य पालन, केज कल्चर और मत्स्य आधारित उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं प्रदान करता है। राज्य सरकार का प्रयास इस जल संपदा का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को प्रोत्साहित करना तथा मत्स्य पालकों की आय एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है। कॉन्क्लेव में 'मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026' तथा अंतर्देशीय राज्यों की मत्स्य निर्यात क्षमता को बढ़ाने से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन किया जाएगा। कार्यक्रम में एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का वर्चुअल उद्घाटन भी होगा। साथ ही प्रदेश के जलाशयों एवं अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास से संबंधित परियोजनाओं के प्रशासनिक स्वीकृति-पत्र प्रदान किए जाएंगे। सम्मेलन में मत्स्य पालन से जुड़े हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), मत्स्य सहकारी समितियों, स्टार्ट-अप्स तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए जाएंगे। कॉन्क्लेव मध्यप्रदेश को अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के साथ मत्स्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे मत्स्य क्षेत्र में नवीन निवेश आकर्षित करने, आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने को गति मिलेगी।
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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के लिए खेत में खाद-बीज, बिजली-पानी की बेहतर व्यवस्था करने से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। वर्तमान में देश-दुनिया में न्यूट्रिशन बेस्ड फूड की मांग लगातार बढ़ रही है ऐसे में मध्यप्रदेश विशेष लाभ की स्थिति में है। प्रदेश अन्न उत्पादन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। दलहन, मिलेट और मत्स्य उत्पादन में भी मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी है। प्रदेश का खाद्य उत्पादन से लेकर खाद्य प्रसंस्करण तक मजबूत इको-सिस्टम है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रहा सोयाबीन का उत्पादन हमारे किसानों के साथ-साथ प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था के लिए विशेष महत्व रखता है। सोयाबीन हमारे किसानों की गाढ़ी कमाई होने के साथ-साथ घर-घर का पोषण और उद्योगों के लिए कच्चा माल है। प्रदेश का सोया खेतों से निकलकर दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है, साथ ही प्रदेश में उद्योगों को भी गति मिल रही है। देश में सोयाबीन की कुल खेती का 45 प्रतिशत क्षेत्रफल मध्यप्रदेश में है। देश के कुल उत्पादन में मध्यप्रदेश का हिस्सा 35 प्रतिशत से अधिक है। प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में सोयाबीन का उत्पादन होता है। प्रदेश के सोयाबीन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और मेहनत का पूरा सम्मान दिलाने के लिए अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने सोयाबीन भावांतर योजना की शुरूआत की थी। पिछले वर्ष सोयाबीन उत्पादक लगभग 7 लाख 17 हजार किसानों के खाते में 1 हजार 475 करोड़ रूपए की भावांतर राशि का अंतरण किया गया। इस वर्ष भी पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है। वर्ष 2025-26 में सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5 हजार 328 रूपए प्रति क्विंटल किया गया था। खेतों में सोयाबीन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ ही प्रदेश में सोयाबीन से जुड़ी फूड प्रोसेसिंग इकाइयों तथा संबंधित उद्योगों पर सब्सिडी भी दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि सोयाबीन की वास्तविक ताकत इससे जुड़ी वैल्यू एडेड चेक में है। खेत में सोयाबीन का उत्पादन, उद्योगों में इसका प्रसंस्करण और खाद्य तेल तथा प्रोटीन उत्पादों का निर्माण और उनकी देश-दुनिया के बाजारों तक पहुंच, किसानों को समृद्धि और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। किसानों की आय, देश की पोषण सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को शक्ति देने की इस प्रक्रिया को सशक्त करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। सोयाबीन से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योगों में आधुनिक तकनीक तथा निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आवश्यक संवैधानिक और विधिक कार्यवाही किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि OBC वर्ग को सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक न्याय दिलाने तथा शासन-प्रशासन में उसकी समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में उल्लेख किया* कि वर्ष 2019 में राज्य शासन द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के संबंध में विधिक प्रावधान किए गए थे। इस विषय में माननीय उच्च न्यायालय के संबंधित न्यायिक निर्णयों और वर्तमान विधिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।उमंग सिंघार ने मांग की कि मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण संबंधी प्रावधानों को संविधान की नौवीं अनुसूची* में शामिल कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए तथा इस दिशा में केंद्र सरकार के समक्ष आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने OBC समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक स्थिति और प्रतिनिधित्व से जुड़े अद्यतन एवं विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर आवश्यक विधिक प्रस्ताव तैयार करने पर भी जोर दिया। सिंघार ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के संबंधित निर्णयों और लागू संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उपलब्ध विधिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही हो सके। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की गई कार्यवाही की समीक्षा करने, आवश्यक निर्णय लेने और मामले के शीघ्र निराकरण के लिए समयबद्ध पहल करने का भी आग्रह किया। उमंग सिंघार ने आशा व्यक्त की कि राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री इस महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय के विषय पर संवैधानिक मर्यादाओं और विधिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके।
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ग्वालियर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी जी आज ग्वालियर दौरे पर रहे। दौरे के दौरान झांसी रेलवे स्टेशन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।इसके पश्चात श्री पटवारी ने दतिया स्थित माँ पीतांबरा शक्तिपीठ मंदिर में माँ के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। इसके बाद डबरा में आयोजित कुशवाहा समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह में श्री जीतू पटवारी शामिल हुए। समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को शिक्षा, परिश्रम और प्रतिभा के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। पटवारी ने सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की शुभकामनाएँ दीं।दौरे के अगले चरण में जीतू पटवारी ग्वालियर में आयोजित ग्वालियर पूर्व विधानसभा के कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक गतिविधियों एवं पार्टी को मजबूत बनाने से जुड़े विषयों पर संवाद किया गया।
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भोपाल। मप्र विधानसभा सचिवालय में पदस्थ भृत्य शुभम सोनी (मोनी) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सचिवालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में शुभम सोनी द्वारा शासकीय सेवा/नौकरी दिलाने के बदले धनराशि लेने के आरोप सामने आए हैं। वीडियो में धनराशि देने वाले व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक रूप से उन पर आक्षेप लगाए जा रहे हैं। पहले भी जारी हो चुके हैं कारण बताओ नोटिस आदेश में उल्लेख है कि इसके पूर्व भी कतिपय प्रकरणों में अनुचित कृत्यों के लिए सचिवालय द्वारा सोनी को अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनके आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।सचिवालय ने माना है कि उनका यह कृत्य प्रथम दृष्टया पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, अवांछनीय आचरण तथा *\"मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3\"* के विपरीत है, जो एक शासकीय सेवक के लिए अत्यंत गरिमाहीन एवं कदाचार की श्रेणी में आता है।इसी आधार पर *मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम 1990 के नियम-7 सहपठित मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9* के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और उनका मुख्यालय विधानसभा सचिवालय, भोपाल रहेगा। उन्हें स्थापना शाखा में नियमित उपस्थिति दर्ज करानी होगी। विधानसभा अध्यक्ष के नाम का गलत उपयोग, जांच के आदेश इस संबंध में विधानसभा के अवर सचिव माधव दफ्तरी द्वारा पुलिस को पत्र भी लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि 15 अक्टूबर की रात्रि से सोशल मीडिया/व्हाट्सएप पर वायरल वीडियो में विधानसभा में कार्यरत भृत्य द्वारा नौकरी के लिए लेन-देन की बात कही जा रही है, और उक्त प्रकरण में अध्यक्ष, मध्यप्रदेश विधानसभा का नाम जोड़ा जा रहा है, जो उचित नहीं है। वीडियो क्लिप (पेन ड्राइव में संधारित) जांच होगी।
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भोपाल। धार जिले के राजगढ़ थाना पुलिस ने ग्राम चौबारा के वन क्षेत्र में अवैध रूप से की जा रही गांजे की खेती का पर्दाफाश करते हुए 3,345 गांजे के पौधे, कुल 3,695 किलोग्राम वजन के, जब्त किए हैं। जब्त पौधों की अनुमानित कीमत 4 करोड़ 43 लाख रुपए आंकी गई है।पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश कैलाश मकवाणा के निर्देशन में संचालित नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक धार श्री सचिन शर्मा के मार्गदर्शन में थाना राजगढ़ पुलिस ने यह कार्रवाई की है। *दो दिनों तक वन क्षेत्र में सर्चिंग कर की कार्रवाई* 13 अक्टूबर को ग्राम चौबारा के वन क्षेत्र में अवैध गांजे की खेती की सूचना मिलने पर राजगढ़ थाना पुलिस टीम ने धार-झाबुआ जिले के सीमावर्ती वन क्षेत्र में लगातार दो दिनों तक दिन-रात सर्चिंग कर अवैध रूप से उगाए गए गांजे के पौधों की पहचान कर उन्हें जब्त किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर कपास एवं तुवर की फसल के बीच तथा निचले स्थानों पर गांजे के पौधे उगाए गए थे। वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर अवैध खेती किए जाने की आशंका सहित अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस द्वारा अवैध खेती में संभावित रूप से संलिप्त अन्य व्यक्तियों, सहयोगियों तथा मादक पदार्थों के उत्पादन एवं तस्करी से जुड़े नेटवर्क के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी है। पुलिस आमजन से अपील करती है कि मादक पदार्थों की अवैध खेती, उत्पादन एवं तस्करी से संबंधित जानकारी तत्काल पुलिस को दें और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग करें।
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