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उज्जैन में संकटमोचन हनुमान मंदिर के विस्थापन के दौरान आस्था से जुड़ा भावुक दृश्य सामने आया। नगर निगम की टीम ने मंदिर को हटाने की प्रक्रिया के तहत करीब 12 घंटे तक काम किया, लेकिन खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को अपनी जगह से नहीं हिलाया जा सका। बताया जा रहा है कि प्रतिमा जमीन के करीब तीन फीट नीचे एक शिला में मजबूती से जमी हुई है। इससे इसे बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालना निगम की टीम के लिए बड़ी चुनौती बन गया। कार्रवाई की शुरुआत पूजा और आरती के बाद की गई। पहले मंदिर के आसपास की दीवारें हटाई गईं और फिर शिखर को विशेष कटर की मदद से सावधानीपूर्वक अलग किया गया। बारिश और सुरक्षा को देखते हुए मौके पर शेड भी लगाया गया। प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए फोम और कपड़ों से ढकने के बाद उसे क्रेन की मदद से सीधा उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिली। इसके बाद प्रतिमा के आसपास की जमीन को और खोदकर उसकी स्थिति और आधार को समझने का काम शुरू किया गया। विस्थापन की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर मौजूद रहे। प्रतिमा के नहीं हिलने पर कई भक्त भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। लोगों के बीच यह चर्चा भी होती रही कि बाबा यहां से नहीं हटना चाहते। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं को याद करते हुए एक महिला ने बताया कि संकटमोचन हनुमान के प्रति उसकी गहरी आस्था है और उसकी मनोकामना पूरी होने के बाद वह मंदिर से जुड़ी रही। इस पूरे घटनाक्रम ने विकास कार्य के बीच आस्था और भावनाओं को एक बार फिर सामने ला दिया।
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‘हनुमान अंश’ फिल्म में बुंदेली भजन को अपनी आवाज देने वाले दृष्टिहीन गायक सुनील लोधी इन दिनों देशभर में चर्चा में हैं। सागर जिले के जैसीनगर ब्लॉक के अगरा गांव के रहने वाले सुनील ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर खास पहचान बनाई है। उनकी आवाज में गाए भजन सोशल मीडिया पर खूब पसंद किए जा रहे हैं। सुनील लोधी की इसी प्रतिभा से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें अपने निवास पर आमंत्रित किया और परिवार के साथ उनका सम्मान किया। मुख्यमंत्री निवास पर सुनील लोधी ने तंबूरा के साथ भजन प्रस्तुत किए। उनकी गायकी सुनकर मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिभा की सराहना की और उत्साह बढ़ाया। सीएम ने सुनील को सम्मान के तौर पर एक लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही उन्हें संस्कृति विभाग से जोड़ने की दिशा में मदद करने का आश्वासन भी दिया। सबसे खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने सुनील की आंखों के इलाज की व्यवस्था कराने की बात कही, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है। सुनील लोधी लंबे समय से गांव-गांव जाकर तंबूरा बजाते हुए भजन गाते रहे हैं। ‘मोरे संकट के कटैया’ और ‘मैंने तुम्हारे भरोसे हनुमान’ जैसे उनके भजनों को लोगों ने खूब पसंद किया। उनकी प्रतिभा की चर्चा फिल्म जगत तक पहुंची, जिसके बाद उन्हें ‘हनुमान अंश’ में बुंदेली भजन गाने का मौका मिला। फिल्म के भजन के लोकप्रिय होने के बाद सुनील की पहचान प्रदेश से बाहर भी बनी। अब मुख्यमंत्री की पहल से उनके इलाज की उम्मीद बढ़ी है और उनके प्रशंसक भी उनके बेहतर भविष्य की कामना कर रहे हैं।
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अलवर नगर निगम चुनाव में भाजपा के समर्थन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को शहर में रोड शो किया। हेलीकॉप्टर से अलवर पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वन राज्यमंत्री संजय शर्मा, पूर्व सांसद डॉ. करण सिंह, रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह समेत भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने पूजा-अर्चना की। मंदिर दर्शन के बाद मुख्यमंत्री खुली जीप में सवार होकर शहर के प्रमुख बाजारों से निकले। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता नजर आए और पार्टी ने नगर निगम के सभी वार्डों में जीत का दावा किया। रोड शो के दौरान वन राज्यमंत्री संजय शर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उस समय वे मुख्यमंत्री के साथ खुली जीप में सवार थे। असहज महसूस होने पर उन्होंने जीप में ही नीचे बैठकर कुछ देर आराम किया। वहीं, रोड शो के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद एक भाजपा कार्यकर्ता का करीब सवा लाख रुपए कीमत का मोबाइल फोन गायब हो गया। मोबाइल नहीं मिलने से कार्यकर्ता परेशान नजर आया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि रोड शो का कार्यक्रम निर्धारित तरीके से आगे बढ़ता रहा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस दौरान सरकार की प्राथमिकताओं और युवाओं के लिए रोजगार को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार बेहतर विकल्प मिल सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को आगे बढ़ाने के साथ किसान, मजदूर और महिलाओं समेत सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। उन्होंने प्रदेश के विकास के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कही।
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उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद माह के समापन अवसर पर भगवान महाकाल की अंतिम और प्रमुख राजसी सवारी आज नगर भ्रमण पर निकलेगी। इस भव्य धार्मिक आयोजन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। सिंधिया परिवार की परंपरा के अनुसार गोपाल मंदिर पहुंचने पर उनकी ओर से भगवान महाकाल को पगड़ी भेंट की जाएगी और पूजन-अर्चन के साथ आरती की परंपरा निभाई जाएगी। सवारी को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं और करीब 7 किलोमीटर के पूरे मार्ग पर लगभग 2 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। राजसी सवारी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। सवारी महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, पानदरीबा, कहारवाड़ी और रामानुजकोट होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, कमरी मार्ग, कंठाल, सतीगेट और गोपाल मंदिर होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ने की संभावना है। राजसी सवारी में भगवान महाकाल के अलग-अलग दिव्य स्वरूपों के दर्शन होंगे। रजत पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश और डोल रथ पर अन्य प्रमुख मुखारविंद शामिल रहेंगे। इस आयोजन का आकाशवाणी के जरिए दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक लगातार 8 घंटे सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरे सवारी मार्ग पर विशेष इंतजाम किए हैं।
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मृतक परिवारों को 4-4 लाख की आर्थिक सहायता की घोषणा सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताया। देवड़ा ने कहा कि शराब पीने की घटना को जाति के आधार पर देखना सही नहीं है। ऐसे मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। लाशों के ऊपर राजनीति नहीं करना चाहिए। सरकार जांच के बाद किसी भी दोषी को नहीं छोड़ेगी फिर चाहे वह कोई भी हो कोई भी बड़ा अधिकारी हो। हम मामले की जड़ तक जाएंगे। देवड़ा ने कहा कि सागर की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया गया। लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अभी तक 20 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं और 10 की गिरफ्तारी हो चुकी है।अब तक 13 लोगों के पोस्टमार्टम हुए हैं। इनमें जहरीली शराब से मौत की पुष्टि हुई है। बाकी प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा। सरकार की ओर से उनके उपचार की व्यवस्था की जा रही है। प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। मृतक परिवारों को 4-4 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। देवड़ा ने ये भी कहा कि मध्यप्रदेश में यदि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। लोगों से अपील है की कि यदि कहीं अवैध या जहरीली शराब बनाए जाने अथवा बेचे जाने की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना सरकार को दें।
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छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में भूपेश बघेल के खिलाफ विरोध के स्वर सामने आए थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने राजनीतिक स्तर पर उनकी भूमिका को उपयोगी नहीं माना, जिसके चलते संगठन में जिम्मेदारी बदली गई है। अब बघेल को असम का प्रभार दिया गया है, जबकि राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव को अहम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाओं के बीच नए प्रभारी सचिन पायलट के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी। वहीं, अरुण साव ने नक्सलवाद से जुड़े मुद्दे पर भी कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद काफी हद तक कमजोर हुआ है और देश व संविधान के खिलाफ सोच रखने वाले लोगों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे लोग भी आगे चलकर सही रास्ते पर आएंगे। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी भूपेश बघेल की भूमिका को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल जहां भी राष्ट्रीय राजनीति में जिम्मेदारी लेकर गए, वहां विवाद और असफलता की स्थिति बनी। पंजाब का उदाहरण देते हुए चंद्राकर ने कहा कि बघेल के प्रभारी बनने के बाद कांग्रेस में गुटबाजी और अंदरूनी कलह बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि भूपेश बघेल राष्ट्रीय स्तर पर अब तक अपनी राजनीतिक क्षमता साबित नहीं कर पाए हैं।
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रायसेन जिला जेल में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। घटना में प्रहरी दिग्विजय सिंह घायल हो गए। उन्हें तत्काल रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर भोपाल एम्स रेफर कर दिया गया। घटना के बाद जेल परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल जैसी सुरक्षित जगह के अंदर आरोपी के पास हथियार पहुंचा कैसे। जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 9 बजे उस समय हुई, जब जेल का स्टाफ अपनी ड्यूटी पर तैनात था। आरोपी नीलेश ठाकुर पर पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद था। बताया जा रहा है कि वह जेल का गेट खुलवाकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसने जेल प्रहरी पर फायर कर दिया। उस समय जेल में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम भी प्रस्तावित था। इसी कार्यक्रम के लिए आरोपी फलों की टोकरी लेकर गेट के पास पहुंचा था। पुलिस अब घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों और आरोपी के पास हथियार पहुंचने के तरीके की पड़ताल कर रही है। घटना की जानकारी मिलते ही रायसेन एसपी आशुतोष गुप्ता समेत पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जेल स्टाफ से पूछताछ शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एसपी ने कहा कि जेल परिसर के भीतर हथियार पहुंचना गंभीर मामला है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई और आरोपी को हथियार किस तरह मिला। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में 17 अगस्त की सुबह भगदड़ जैसी स्थिति में कम से कम सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। घटना सावन के तीसरे सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के दौरान हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार बिजली के तार या पोल से जुड़ी अफवाह के बाद भीड़ में अचानक घबराहट फैली और लोग इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक उस समय मंदिर परिसर में भारी भीड़ थी। दो ट्रेनों के आने के कारण भी श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने की बात सामने आई है। भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई और कई लोग गिर गए। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया। घटना की जांच शुरू कर दी गई है और प्रशासन वास्तविक कारणों की पुष्टि कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में मौतों की संख्या को लेकर अंतर रहा, लेकिन कई स्वतंत्र रिपोर्टों में सात मौतों की पुष्टि की गई है। ऐसे धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और आपातकालीन रास्तों की पर्याप्तता पर अब सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन आगे की जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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