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नई दिल्ली। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) देश में चल रहे छठे विशेष अभियान में भाग लेकर अपने मुख्यालय और परिचालन क्षेत्रों में ई-कचरे के दायित्वपूर्ण प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। छठा विशेष अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा, जिसमें महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के सभी प्रतिष्ठानों में व्यवस्थित अपशिष्ट संग्रह, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अभियान के तहत अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों के माध्यम से इस्तेमाल से हटाए गए इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के संग्रह और दायित्वपूर्ण निपटान की सुविधा के लिए महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड क्षेत्रों में ई-कचरा संग्रह कियोस्क स्थापित किए गए हैं। मुख्यालय और परिचालन क्षेत्रों के कर्मचारी इस अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए, स्वच्छता पहल में योगदान दे रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण के दायित्वपूर्ण प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। कचरे या रसायनों से हवा, मिट्टी और भूजल दूषित होने तथा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके जोखिमों सहित अनुचित ई-अपशिष्ट निपटान के हानिकारक प्रभावों के बारे में कर्मचारियों और आस-पास के समुदायों को जानकारी देने के लिए जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। अभियान के कार्यान्वयन चरण के पहले सप्ताह में, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड ने 240 चिन्हित स्थानों में से 73 स्थलों की सफाई की, 10 लाख वर्ग फुट के लक्षित क्षेत्र के मुकाबले 3 लाख 06 हजार 663 वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई की। अभियान में 600 मीट्रिक टन कबाड़ के निपटान का भी लक्ष्य रखा गया है और इस्तेमाल से बाहर की गई उच्च क्षमता वाली 350 हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी बैटरियों का निपटान कर राजस्व अर्जित हुआ है। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, छठे विशेष अभियान में शामिल होकर कार्यस्थल की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और दायित्वपूर्ण ई-कचरा प्रबंधन की अपनी प्रतिबद्धता द्वारा स्वच्छ, अधिक संवहनीय और संसाधन-कुशल भविष्य के राष्ट्रीय उद्देश्य में सहयोग दे रहा है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब के प्रमुख जिलों जिनमें संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर शामिल हैं तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद जैसे जिलों में विशेष निगरानी करने का आह्वान किया ताकि फसल कटाई के रुझानों का आकलन किया जा सके और पराली जलाने की संभावित घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सके। यादव ने प्रभावी निगरानी के लिए पराली जलाने से संबंधित आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में फसल कटाई के संभावित समय का पूर्वानुमान उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करने वाली मौसम संबंधी परिस्थितियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है ताकि तदनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने हस्तक्षेपों के प्रभाव का प्रभावी आकलन करने और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सुधारात्मक उपायों की पहचान करने का भी आह्वान किया। इस बात पर जोर देते हुए कि निगरानी केवल उपग्रह आंकड़ों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए, श्री यादव ने कहा कि जिला कलेक्टरों को जमीनी स्तर पर आकलन करना चाहिए और प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई को मजबूत करना चाहिए ताकि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकें। उन्होंने रेखांकित किया कि उपग्रह निगरानी में दोपहर 3 बजे के बाद आने वाले अंतराल (सैटेलाइट पास न होने) के दौरान ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के जरिए पराली जलाने पर सख्त निगरानी रखी जाए। धान कटाई के मौजूदा सीजन में पराली (फसल अवशेष) प्रबंधन को मिशन मोड में अमलीजामा पहनाने के लिए आज कृषि भवन, नई दिल्ली में महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने दो-टूक कहा कि फसल कटाई और रबी बुवाई के बीच समय बहुत कम बचा है, इसलिए प्रशासनिक अमले को फाइलों से निकलकर सीधे जमीन पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। जिला स्तर पर जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) की त्वरित बैठकें आयोजित कर सख्त निगरानी और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए। पराली समस्या नहीं, किसान की आय और मिट्टी की सेहत सुधारने का माध्यम बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धान की कटाई चल रही है और किसान को अगली फसल की बुवाई की जल्दी है। ऐसे में केवल यह कह देना कि पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा। हमें किसान को आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना होगा। पराली जलाने से न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व जलकर राख हो जाते हैं। हमें अपनी धरती माता और मिट्टी की सेहत को बचाना है। पराली खेत में मिले तो जैविक खाद बनती है और खेत से बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनती है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पराली की आग रोकना नहीं, बल्कि एक ऐसा सशक्त तंत्र विकसित करना है जिससे किसान को पराली जलाने की आवश्यकता ही न पड़े और पर्यावरण अनुकूल खेती के जरिए कार्बन क्रेडिट जैसी संभावनाओं का लाभ भी अन्नदाताओं को मिले। मध्य प्रदेश और राजस्थान में घटनाओं पर चिंता, युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के विश्लेषण पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि संतोष की बात है कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर की अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3% और उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की उल्लेखनीय कमी आई है, साथ ही पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने के मामले में हुई वृद्धि को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन दोनों राज्यों से कहा कि प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू की जाए। उन्होंने कहा कि चूंकि अभी कटाई का एक बड़ा हिस्सा बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वे भी कतई ढिलाई न बरतें और पूरी सतर्कता रखें।मशीनों का शत-प्रतिशत उपयोग हो, पुरानी मशीनें बंद न पड़ें केंद्रीय मंत्री चौहान ने मशीनों की कार्यशीलता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 और नई मशीनें दी गई हैं। चौहान ने निर्देश दिए कि नई मशीनें बांटने के साथ-साथ पुरानी बंद पड़ी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराकर उन्हें चालू किया जाए, अन्यथा मशीनों की कमी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) को सक्रिय करने पर जोर देते हुए कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें मिलना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। केंद्र से भरपूर आर्थिक मदद; पंजाब जल्द भेजे यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट फंड्स की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत वर्ष 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की गई है (जिसमें पंजाब को ₹2,056.50 करोड़, हरियाणा को ₹1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को ₹868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹59 करोड़ शामिल हैं)। चालू वर्ष 2026-27 के लिए भी 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन तय कर 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, आवंटित राशि के धीमे उपयोग पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान को समय पर साधन मिलने चाहिए। विशेष रूप से पंजाब सरकार से आग्रह किया गया कि वह पूर्व में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) तत्काल केंद्र को भेजे ताकि योजना की अगली किस्त बिना किसी रुकावट के तुरंत जारी की जा सके। सूखे क्षेत्रों में पराली चारे का बने सहारा, उद्योगों से सीधे जुड़ें किसान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है, वहां पराली को चारे के रूप में सुरक्षित संग्रहित कर मवेशियों तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही, थर्मल पावर प्लांट्स में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और 2G बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी सप्लाई चेन जोड़ी जाए। उन्होंने राज्यों से कहा कि स्वीकृत आपूर्ति परियोजनाओं को बिना देरी के धरातल पर शुरू कराया जाए। पूसा-44 जैसी अधिक समय लेने वाली किस्मों के स्थान पर कम अवधि वाली उन्नत किस्मों (जैसे पूसा 2090, PR126 आदि) को बढ़ावा दिया जाए ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का पर्याप्त समय मिल सके।राज्यों को हरसंभव सहायता का भरोसा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का मुख्य दायित्व राज्यों का है, लेकिन केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चे पर हर कदम पर राज्यों और अन्नदाताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने सभी भागीदार मंत्रालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और जिला प्रशासनों से आह्वान किया कि वे इसे एक साझा राष्ट्रीय संकल्प मानकर कार्य करें ताकि हमारे खेत प्रदूषणमुक्त और किसान खुशहाल बन सकें।
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रायपुर। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है। *शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें* मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी। *युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर* मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। *जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं* मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।मुख्यमंत्री साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। *जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत* मुख्यमंत्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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भोपाल। मंत्रि-परिषद की बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रालय में हुई। शत-प्रतिशत शासकीय स्वामित्व वाली 'जबलपुर-इंदौर भोपाल इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 'पीएम-आशा' योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई।मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये तथा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की योजनाओं की निरंतरता को मंजूर की गई। प्रदेश में आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 5,232 करोड़ रुपये एवं शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की निरंतरता की स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा व मैहर में महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों तथा जनजातीय सांदीपनि विद्यालयों के छात्र परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) 'जबलपुर-इंदौर - भोपाल इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा। कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा। इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को 'मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013' के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनाँमिक हबो के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा। विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।सोयाबीन उपार्जन पर उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' ( पीएम-आशा) के तहत संचालित 'प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम' (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है जिसे आवश्यकता पड़ने पर संशोधित किया जा सकेगा। योजना के तहत किसानों को भुगतान उनके पंजीकृत रकबे और विगत वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा। किसी किसान ने यदि योजना अवधि से पूर्व यानी 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटाकर केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान मान्य किया जाएगा। योजना में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है। सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर किया जाएगा जो 22 अक्टूबर 2026 से आगामी 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन विगत 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय कर उसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। मंडी में बिक्री मूल्य यदि एमएसपी के बराबर या उससे अधिक रहता है तो कोई प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। बिक्री मूल्य यदि एमएसपी से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक रहता है तो किसान को एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की राशि मिलेगी। वहाँ बिक्री मूल्य मॉडल रेट के बराबर या कम होने पर किसान को एमएसपी और घोषित मॉडल रेट के अंतर की राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। योजना के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियां गठित की जाएंगी। भावांतर राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी मंडी बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड द्वारा संचालित मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। कोष में राशि अपर्याप्त होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये की साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए 241.88 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार विद्यार्थियों के परिवहन की दर 10 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 21 हजार रूपये प्रतिवर्ष करने के साथ प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत मूल्य वृद्धि भी की जायेगी। विद्यार्थियों की परिवहन व्यवस्था, आउटसोर्स के माध्यम से आईटी- आधारित प्लेटफार्म एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था उपयोग किये जाने की शर्त अनुसार संचालित की जायेगी। निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यालय की स्थापना के लिए 24 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने नवगठित 4 जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के लिए 24 नवीन पदों के सृजन व प्रतिस्थापन से 12 पदों की स्वीकृति दी है। साथ ही भारत सरकार की योजनाएं समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाडी व पोषण 2.0 अंतर्गत भारत सरकार की स्वीकृति अनुसार आउटसोर्स के आधार पर मानव संसाधन की भी स्वीकृति दी है। बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रूपये की स्वीकृति बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3076.37 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार बुरहानपुर जिले की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 922 करोड़ 91 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। परियोजना अन्तर्गत बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 42 गांवों की लगभग 17,700 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। मंत्रि-परिषद ने रायसेन जिले की बारना वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 82 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य पूर्व निर्मित बारना परियोजना की नहरों का विस्तारीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण किया जाना है। वर्तमान में बारना परियोजना से कुल 91,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। मंत्रि-परिषद ने मंदसौर जिले की कयामपुर-सीतामऊ दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 750 करोड़ 83 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। योजना से मंदसौर के 1,12,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली जिले की चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 1,320.14 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना अन्तर्गत दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से 32,125 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए 15,557.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 15,557.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकरण, न्यायालय में कम्प्यूटराइजेशन, विशेष न्यायालय से संबंधित योजनाओं सहित कुल 11 योजनाओं की निरंतरता के लिए 1,624.69 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई हैं विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 150 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। राज्य के समस्त अधीनस्थ न्यायालयों यथा जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालयों आदि में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्तों एवं कार्यालय व्ययों के देयकों के भुगतान आदि संबंधी योजनाओं के लिए 12,252.66 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए 1,530 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। राज्य सूचना आयोग की स्थापना आदि के लिए 71 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग अन्तर्गत राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर जारी रखने के लिए 71 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भत्ते आदि व्यय संबंधी योजना के लिए 69 करोड़ 61 लाख रूपये और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 2 करोड़ 20 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 1,697 करोड़ 62 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय आयुष मिशन, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष पद्धति को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रारंभ की गई है। प्रदेश में इस योजना से आयुष, चिकित्सालय एवं औषधालय, महाविद्यालय के विकास एवं नवीन स्थापना के लिए आवश्यक निधि प्राप्त होती है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्वीकृत 7 आयुर्वेद महाविद्यालय एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से 1 आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण कार्य जिला डिण्डोरी में किया जा रहा है। आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना की 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल , 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3,535 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार आयुष महाविद्यालय से संबंधित योजना के लिए 3072.54 करोड़ रूपये, शासकीय होम्योपैथी महाविद्यालय के लिए 280 करोड़ 5 लाख रूपये, यूनानी महाविद्यालय के लिए 182 करोड़ 20 लाख रूपये और स्व. पं. उद्धवदास मेहता वैद्य शास्त्री आयुर्वेद सम्मान पुरस्कार के लिए 31 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। इस अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत 07 आयुर्वेद महाविद्यालय, 01 होम्योपैथी महाविद्यालय एवं 01 यूनानी महाविद्यालय का स्थापना व्ययतथा भवनों का निर्माण कार्य किया जाता है। शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2,875.20 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7122 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है। योजना के क्रियान्वयन से शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय एवं कम्प्यूटर कक्ष, प्राचार्य, स्टॉफ रूम और कैंपस निर्माण के साथ-साथ शिक्षण कक्षों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरेक्टिव पैनल, एवं सुरक्षा के लिए कैमरे आदि की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को सुविधायें प्राप्त होगी।
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रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब हमें नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संकल्प को पूरा करने में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। *नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब उसकी पीड़ा और निशानियों को भी मिटाना है : अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की उस पीड़ा का परिचय देती है, जिसे यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया। इससे बड़ा मानवाधिकारों का हनन कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देने से पाँच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी। हमें इन घावों पर मरहम लगाना होगा। नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना होगा और उनके सम्मानपूर्वक जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से बस्तर के उन दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचा रही है, जो दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। उन्होंने बताया कि आज 500 से अधिक गाँवों में सड़क और बिजली की सुविधाएँ पहुँची हैं। घरों तक नल से जल पहुँचाने और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ अंचलों के बच्चों, महिलाओं और परिवारों को बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले अनेक गाँवों के लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पाते थे। राशन प्राप्त करने के लिए उन्हें कई दिनों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब गाँवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था कर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गाँव और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। *सुरक्षा शिविरों से सेवा केंद्रों तक, बस्तर में परिवर्तन का नया अध्याय* मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित सुरक्षा शिविरों ने शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इन शिविरों को सेवा और विकास के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खाली हो रहे सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में परिवर्तित करना राज्य सरकार का महत्वपूर्ण संकल्प है। इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी, ताकि युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहाँ स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियाँ भी प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा आजीविका गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बस्तर में हो रहे परिवर्तन की नई तस्वीर है। जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बलों की तैनाती आवश्यक थी, अब वहीं से जनसेवा, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित होंगे। *खेती, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से बढ़ेगी बस्तर के परिवारों की आय* मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी विशेष प्राथमिकता दे रही है।
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रायपुर। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है। *शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें* मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी। *युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर* मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। *जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं* मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।मुख्यमंत्री साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। *जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत* मुख्यमंत्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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नई दिल्ली। दिल्ली में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा, कहा कि किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाने के साथ ही भारत अब केवल अपना पेट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में बिना मानक के कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी और इसके नियमन हेतु जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन होगा। *अभाव के दौर से आत्मनिर्भरता और रिकॉर्ड उत्पादन तक का सफर* केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में देश की कृषि यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि एक दौर वह था जब देश को पीएल-480 के तहत आयातित अनाज पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज भारतीय किसानों के परिश्रम और आधुनिक नीतियों के दम पर देश खाद्यान्न में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत आज चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं में दूसरे स्थान पर है। अब समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक भंडारण, प्रबंधन और वैश्विक निर्यात की है। *'आप अमृत निकालिए, हम उसे नीति बनाकर लागू करेंगे'* चौहान ने नीति-निर्माण में छात्र और किसान संगठनों की विशेषज्ञता को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन दिन-रात जमीनी हकीकत के बीच काम करते हैं। उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित विशेषज्ञों और छात्रों से आह्वान किया, \"आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।\" उन्होंने घोषणा की कि अधिवेशन के निष्कर्षों पर विस्तृत कार्ययोजना बनाने के लिए वे अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर सीधा काम होगा। *कृषि छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता* कृषि शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि किसी को भी सिर्फ फीस लेकर डिग्री बांटने की दुकान चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं द्वारा ली जाने वाली बीएससी (एजी) और एमएससी (एजी) जैसी तकनीकी डिग्रियों का पूरा मान रहे और वे व्यर्थ न जाएं। *छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' मॉडल* भारत में औसत जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) जरूरी है। अनाज के साथ-साथ फल, सब्जी, औषधीय खेती, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को जोड़कर ही किसानों की आजीविका को सुरक्षित व समृद्ध बनाया जाएगा। साथ ही, आधुनिक तकनीक जैसे एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स को खेती से जोड़ने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एग्रीविज़न के 10 वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन किया।
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भोपाल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' को वित्त वर्ष 2030-31 तक निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया है। कुल 53 हज़ार 428 करोड़ रूपए की इस योजना से देशभर के 3 करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी निर्णयों के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता का दायरा बढ़ाने और सहायता राशि में वृद्धि का निर्णय भी लिया गया है। अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी लाभ मिल सकेगा। पेंशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा भी समाप्त कर दी गई है। यह दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा का सम्बल देने तथा उनके जीवन को और अधिक सम्मानपूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।
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भोपाल, 14 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए संचालित “e-Zero FIR” व्यवस्था के तहत देवास पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। बैंक अधिकारी बनकर पेंशन कार्ड अपडेट कराने और टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर सेवानिवृत्त कर्मचारी से 6 लाख 03 हजार रूपए की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को देवास पुलिस ने 1500 किलोमीटर दूर बिहार के कटिहार जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद जब्त किए हैं। थाना कोतवाली, देवास क्षेत्र निवासी 62 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को साइबर ठगों ने बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया। ठगों ने पेंशन कार्ड अपडेट कराने तथा टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर उनसे कुल 6 लाख 3 हजार रूपए की राशि विभिन्न माध्यमों से अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। शिकायत प्राप्त होने पर थाना कोतवाली में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री पुनीत गेहलोद के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम द्वारा साइबर ठगी से संबंधित बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल नंबरों तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। तकनीकी साक्ष्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम बिहार के कटिहार जिले पहुंची और आरोपी की पतारसी करते हुए उसे गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर उसके घर की अलमारी से साइबर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद विधिवत जब्त किए। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ तथा विवेचना में प्राप्त तकनीकी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी गिरोह के मुख्य आरोपियों का संबंध जामताड़ा, झारखंड से होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन तथा ठगी की शेष राशि के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के उद्देश्य से संचालित “ऑपरेशन साइबर” के तहत जिला साइबर सेल द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में e-Zero FIR के तहत अब तक कुल 130 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं, जिनमें 26 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा आरोपियों से लगभग 98 लाख 52 हजार रूपए की राशि जब्त की गई है।
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भोपाल । उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सर्किट हाउस नवीन भवन सभागार में आयोजित बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार में लिप्त व्यक्तियों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादक और सप्लायर पर भी कड़ी कार्रवाई करें। नशे के सौदागरों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ नशे से पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास पर भी ध्यान देना आवश्यक है। नशामुक्ति केन्द्रों को सक्रिय करके इनके माध्यम से नशे से पीड़ितों का समुचित पुनर्वास करें। कलेक्टर नशे के शिकार व्यक्तियों की सूची बनाकर उन्हें नशामुक्ति केन्द्रों में समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा और पूरा विन्ध्य तेजी से विकास कर रहा है। कृषि, उद्योग और व्यापार में वृद्धि होने से लोगों की आमदनी बढ़ी है। अधोसंरचना विकास के कार्य क्षेत्र के विकास को गति दे रहे हैं। युवा पीढ़ी अगर कोरक्स और अन्य नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गई तो हर तरह का विकास निरर्थक हो जाएगा। आज विकास के जो कार्य हो रहे हैं उसका सर्वाधिक लाभ वर्तमान में जो युवा हैं उन्हें ही मिलेगा। कोरेक्स और अन्य नशीले पदार्थों के अपराधियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई लगातार की जा रही है। उत्तरप्रदेश राज्य से भी समन्वय बनाकर नशे के सप्लायरों पर कार्रवाई की गई है। अवैध नशीले पदार्थ जहाँ बनाए जाते हैं वहाँ तक पहुंचकर भी कार्रवाई की जाएगी। देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने 2029 तक देश को नशे से मुक्त करने का संकल्प लिया है। इसके लिए समन्वय के साथ कार्ययोजना बनाएं और लगातार कार्रवाई करें। नशामुक्त भारत अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों तथा आम जनता को भी भागीदार बनाएं। बैठक में उप मुख्यमंत्री ने शहर में रात में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार तथा चौराहों और व्यस्त सड़कों पर अवैध रूप से खड़े ठेलों को व्यवस्थित कराने के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने कहा कि रीवा संभाग में पिछले 18 महीनों में कोरेक्स, गांजा, एमडी ड्रग्स, अवैध शराब तथा हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की गई है। संभाग में 1615 नशे के सौदागरों को जेल भेजा गया है। इनसे 5535 किलो 931 ग्राम गांजा, 97665 शीशी कोरेक्स, 413310 नग नशील टैबलेट कैप्सूल तथा 450 अफीम के हरे पेड़ जब्त किए गए हैं। अभियान के तहत 123.6 ग्राम हेरोइन, 206.54 ग्राम स्मैक, 244 ग्राम ब्राउन शुगर तथा 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की गई हैं। इनकी कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपए है। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में लिप्त 181 दो पहिया वाहन तथा 131 चार पहिया वाहन जब्त किए गए हैं। इनकी कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपए है। पुलिस विभाग ने संभाग में शराब के अवैध कारोबार करने वालों के विरूद्ध 11998 प्रकरण दर्ज कर 12199 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनसे 35890 लीटर अवैध देशी शराब तथा 22807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई है। इसकी कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपए है। अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। बैठक में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि नशे के शिकार 50 व्यक्तियों को इसी सप्ताह चिन्हित करके उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केन्द्रों में भर्ती कर लिया जाएगा। कोरेक्स के शिकार व्यक्तियों का पुनर्वास के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भावना मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव पाठक, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय अनिल दुबे तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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