Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में सोमवार को आयोजित सांसद खेल महोत्सव के समापन समारोह में सियासत और क्रिकेट का दिलचस्प संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा शामिल हुए। इस मौके पर राजनीतिक मंच के अनुभवी खिलाड़ी शिवराज सिंह चौहान ने क्रिकेट की पिच पर भी अपना हुनर दिखाया। जडेजा की गेंद पर आगे बढ़ते हुए लगाए गए उनके शानदार शॉट ने पूरे पवेलियन को तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा दिया। खास बात यह रही कि शिवराज के इस शॉट की सराहना खुद गेंदबाजी कर रहे रविंद्र जडेजा ने भी की और ताली बजाई। शिवराज सिंह चौहान ने इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया, जिसमें वे बल्ला थामे नजर आते हैं और सामने से जडेजा गेंदबाजी करते दिखते हैं। बाउंड्री की ओर गया यह शॉट दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गया और स्टेडियम में मौजूद हजारों लोग उत्साह से झूम उठे। मैच के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने रविंद्र जडेजा की जमकर तारीफ करते हुए कहा, “जडेजा यानी जज्बा, जडेजा यानी जुनून और जडेजा यानी जीत।” उन्होंने कहा कि जडेजा गेंदबाजी में विकेटों की झड़ी लगा दें या बल्लेबाजी में रनों का अंबार, हर फॉर्मेट में वे फिट बैठते हैं। गौरतलब है कि इसी आयोजन में सांची और सिलवानी विधानसभा के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया, जिसके लिए कबड्डी खेल मैदान को अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का रूप दिया गया था। फाइनल की विजेता टीम को ट्रॉफी रविंद्र जडेजा ने प्रदान की, जिसे देखने हजारों दर्शक मैदान में उमड़े।
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मध्यप्रदेश समेत देशभर के सर्राफा बाजार में सोना-चांदी के दाम अचानक नीचे आ गए हैं। बीते तीन महीनों की लगातार तेजी के बाद पिछले चार दिनों से भावों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में सोना और चांदी अपने ऊपरी स्तर से फिसल चुके हैं। जहां चांदी एक समय 4.20 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह करीब 2.40 लाख रुपये पर आ गई है। वहीं सोना भी 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर करीब 1.45–1.50 लाख रुपये पर आ गया है। इस गिरावट को लेकर बाजार में इसे ‘गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश’ कहा जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट इसे क्रैश मानने से इनकार कर रहे हैं। एमपी के सर्राफा विशेषज्ञ नवनीत कुमार का कहना है कि यह गिरावट दरअसल बाजार का ‘करेक्शन फेज’ है, जो लंबे समय की तेजी के बाद आना स्वाभाविक और जरूरी होता है। ग्लोबल मार्केट का दबाव, डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली, बजट के आसपास निवेशकों की सतर्कता और MCX में वायदा कारोबार में बिकवाली इसके प्रमुख कारण हैं। खासकर चांदी पर असर ज्यादा दिखा है क्योंकि इसका इस्तेमाल उद्योगों में भी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह करेक्शन हेल्दी मार्केट का संकेत है, न कि खतरे की घंटी। चांदी में करीब 35 से 40 फीसदी और सोने में करीब 14 फीसदी तक की गिरावट को करेक्शन माना जा रहा है। बाजार जानकारों का अनुमान है कि यह दौर कुछ समय और चल सकता है और मार्च के बाद सोना-चांदी एक बार फिर नई तेजी दिखा सकते हैं। फिलहाल शॉर्ट टर्म निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है।
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसी बीच वडोदरा से मेट्रो रैक की आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। मेट्रो के लिए तीन-तीन कोच वाले कुल 27 रैक मिलने तय हैं, जिनमें से अब तक आठ रैक भोपाल पहुंच चुके हैं। वर्तमान में कमर्शियल रन में केवल दो रैक का ही उपयोग हो रहा है, जबकि शेष छह रैक डिपो में खड़े हैं। ऐसे में जब तक मेट्रो की प्रस्तावित 32 किलोमीटर लंबी लाइन का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए रैक भेजने पर रोक लगा दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन के रैक वडोदरा के पास स्थित प्लांट में बनाए जा रहे हैं और इसके लिए पहले से अनुबंध किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार अब रैक की आपूर्ति लाइन पूरी होने के बाद ही की जाएगी और उस समय की स्थिति के अनुसार उनकी कीमत तय होगी। पहला रैक वर्ष 2023 में भोपाल पहुंचा था और 2024 तक कुल आठ रैक मिल चुके हैं। इस दौरान रैक की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि 2028 तक इनके लगभग 20 प्रतिशत तक महंगे होने की संभावना जताई जा रही है। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, लागत उतनी बढ़ती जाएगी। भोपाल मेट्रो रेल के एमडी चैतन्य कृष्णा के मुताबिक फिलहाल परियोजना की शुरुआती दो लाइनों को प्राथमिकता दी जा रही है और इन्हें तेजी से पूरा करने पर फोकस है। भोपाल मेट्रो परियोजना की कुल लागत 2017-18 में 6,941 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसमें प्रति किलोमीटर 249 करोड़ रुपये का आकलन किया गया था। मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने के लिए लगभग 5,000 करोड़ रुपये की जरूरत है। केंद्रीय बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से भोपाल को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे मेट्रो के साथ-साथ लॉजिस्टिक, हाईवे और सिटी इकोनॉमिक रीजन से जुड़े विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
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हर वर्ष की तरह इस बार भी मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वरधाम में भव्य कन्या विवाह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन खास तौर पर ऐतिहासिक होने जा रहा है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सान्निध्य में होने वाला यह सप्तम कन्या विवाह महोत्सव अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। पहली बार नेपाल की एक बेटी भी बागेश्वरधाम से विवाह के पवित्र बंधन में बंधेगी। महाशिवरात्रि के अवसर पर होने वाले इस सामूहिक विवाह में कुल 300 बेटियों का विवाह संपन्न कराया जाएगा। रविवार को बागेश्वरधाम में वर-वधु पक्ष को बुलाकर पं. धीरेंद्र शास्त्री ने विवाह की शुरुआती सामग्री भेंट की। इसमें वधुओं के लिए लहंगा, चुनरी और वरों के लिए शेरवानी, टोपी, वरमाला सहित अन्य आवश्यक सामग्री शामिल रही। इस दौरान शास्त्री ने अंतरराष्ट्रीय विवाह सम्मेलन को लेकर नियम-कायदों, पहनावे और व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने समधियों को समझाइश देते हुए कहा कि बहू को बेटी की तरह रखें, ताकि किसी भी प्रकार की शिकायत न आए। कार्यक्रम के दौरान माहौल हल्का-फुल्का रहा, जहां महाराज ने कुछ समधियों के साथ हंसी-मजाक भी किया। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक वर-वधु के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार रुपये की एफडी कराई जाएगी, जिसे 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ा जा सकेगा। दूर-दराज से आने वाली बेटियों को 14 फरवरी तक धाम पहुंचने की सलाह दी गई है। व्यवस्थाओं की बात करें तो वर और वधु पक्ष को अलग-अलग वाहन पास, प्रवेश कार्ड और 25-25 सदस्यों के लिए भोजन कूपन दिए गए हैं। साथ ही वर-वधु मंडप और भोजन के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि विवाह समारोह सुव्यवस्थित और श्रद्धापूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर पोस्ट कर कहा कि “वॉशिंगटन में मोगैम्बो खुश है, ऐसा लग रहा है कि PM मोदी ने आखिरकार हार मान ली है।” कांग्रेस का आरोप है कि भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या उनके प्रतिनिधियों से मिल रही है, जो अब एक रूटीन बनता जा रहा है। पार्टी ने इसे सीजफायर की घोषणा की तरह बताया, जहां पहले ट्रम्प ने ऐलान किया और बाद में भारत की प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या इस ट्रेड डील के तहत मोदी सरकार रूस से दूरी बनाने पर राजी हो गई है। पार्टी का कहना है कि ट्रम्प ने दावा किया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। अगर ऐसा है तो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत का क्या होगा। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रम्प के सामने दबाव में नजर आते हैं और अब दोनों नेताओं के बीच पहले जैसी सहजता भी दिखाई नहीं देती। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। ट्रम्प ने दावा किया कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान खरीदेगा और रूस से तेल खरीदना बंद करेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर पोस्ट कर टैरिफ घटाने के फैसले का स्वागत किया और इसे भारत के 1.4 अरब लोगों के लिए सकारात्मक कदम बताया। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि इस डील के कई पहलुओं पर सरकार को देश के सामने साफ जवाब देना चाहिए।
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केंद्रीय बजट 2026 को लेकर राजस्थान में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट को युवाशक्ति को समर्पित और प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को मजबूत करता है और 7 फीसदी की विकास दर के साथ देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएम भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, मेगा टेक्सटाइल पार्क, डेटा सेंटर और सोलर सेक्टर को प्रोत्साहन जैसी घोषणाएं राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देंगी। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं के कौशल विकास, नारी शक्ति के सम्मान और औद्योगिक प्रगति को नई दिशा देगा। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह विकसित भारत की दिशा में मजबूत आधारशिला रखने वाला बजट है। उन्होंने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। दीया कुमारी ने कहा कि इस बजट में हर क्षेत्र के लिए कुछ न कुछ है, जो समग्र विकास को गति देगा।
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आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया आज नाभा जेल से बाहर आएंगे। उनकी रिहाई को लेकर जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुबह से ही समर्थक नाभा जेल के बाहर जुटने लगे हैं और ढोल-नगाड़ों के साथ भंगड़ा कर खुशी जता रहे हैं। मजीठिया करीब सात महीने से नाभा जेल में बंद थे। विजिलेंस ब्यूरो ने बिक्रम मजीठिया को पिछले साल 25 जून को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला करीब 540 करोड़ रुपये की कथित ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। इस केस में 22 अगस्त को मोहाली की अदालत में लगभग 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा। रिहाई से पहले मजीठिया से मिलने वालों का सिलसिला भी जारी रहा। सोमवार को राधा स्वामी सत्संग डेरा ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों नाभा जेल पहुंचे और उन्होंने करीब आधे घंटे तक मजीठिया से मुलाकात की। बाहर आकर ढिल्लों ने कहा था कि मजीठिया के खिलाफ लगे आरोप झूठे हैं और वह पूरी तरह चढ़दी कलां में हैं। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी जेल में उनसे मिल चुके हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के अगले दिन हुई ढिल्लों की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में खासा ध्यान खींचा।
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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दीनारपुर स्थित सीलिंग की जमीन से जुड़े मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने कहा कि अब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से यह आभास मिलता है कि कहीं न कहीं निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की मंशा रही हो सकती है, ताकि समय-सीमा का फायदा लेकर याचिका खारिज हो जाए। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रमुख सचिव की मंशा और भूमिका उनके आगे के आचरण से तय होगी। राज्य सरकार के वकील के आग्रह पर हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग को एक और अवसर देते हुए एक दिन का समय दिया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि सरकार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित की गई है। कोर्ट में पेश रिपोर्ट के अनुसार 2012 से पदस्थ कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में अधिकारी अभी भी सेवा में हैं। न्यायालय ने कहा कि जिन अधिकारियों पर प्रथम दृष्टया यह आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर मामला लंबित रखकर निजी लोगों को राज्य की संपत्ति हड़पने में मदद की, उनके खिलाफ अब भी कार्रवाई संभव है। राज्य की ओर से यह दलील दी गई कि प्रमुख सचिव अवकाश पर थे और अरुणाचल प्रदेश प्रवास के कारण समय पर निर्णय नहीं ले सके। इस पर अदालत ने दो टूक कहा कि अवकाश में कटौती करनी चाहिए थी या नहीं, यह अदालत का विषय नहीं, बल्कि यह राज्य सरकार को तय करना है कि उसके अधिकारी राज्य संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं। उल्लेखनीय है कि दीनारपुर की 9 बीघा सीलिंग भूमि का मामला लंबे समय से लंबित है। शासन यह केस सिविल न्यायालय में हार चुका है। 2008 में दायर पहली अपील 2012 में अदम पैरवी के चलते खारिज हो गई थी, जिसे बहाल कराने के लिए 2019 में आवेदन दिया गया। यह मामला फिलहाल जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की बेंच में विचाराधीन है।
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