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एशियन गेम्स के पांचवें दिन भारत के खाते में तीन और मेडल जुड़े। शूटिंग के स्कीट मिक्स्ड टीम इवेंट में अनंतजीत सिंह नारूका और परिनाज धालीवाल की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। फाइनल में भारतीय जोड़ी ने 48 में से 44 निशाने सटीक लगाए और तीसरे स्थान पर रही। इस पदक के साथ मौजूदा एशियन गेम्स में शूटिंग में भारत के कुल आठ मेडल हो गए हैं, जिनमें चार सिल्वर और चार ब्रॉन्ज शामिल हैं। वहीं, भारत की कुल पदक संख्या बढ़कर 15 हो गई है, जिसमें एक गोल्ड, छह सिल्वर और आठ ब्रॉन्ज शामिल हैं। वुशु में रोशिबिना देवी ने महिलाओं के 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल मुकाबले में उनका सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ, जहां भारतीय खिलाड़ी को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, फाइनल तक पहुंचकर रोशिबिना ने भारत के लिए एक और पदक पक्का किया। इसके साथ ही उन्होंने एशियन गेम्स में लगातार तीसरी बार मेडल जीतने की उपलब्धि हासिल की। वह लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला वुशु खिलाड़ी बन गई हैं। रोइंग में भी भारत को सफलता मिली, जहां सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। पांचवें दिन मिले इन तीन पदकों से भारतीय दल की पदक संख्या 15 तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, मेजबान चीन ने भी पदकों की संख्या के मामले में 100 का आंकड़ा पार कर लिया है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से शूटिंग, वुशु और रोइंग में पदकों का सिलसिला आगे बढ़ा है।
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एशियन गेम्स 2026 में भारत ने अपने पहले गोल्ड मेडल का खाता खोल दिया है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने फाइनल मुकाबले में श्रीलंका को 147 रन से हराकर इतिहास रच दिया। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 216 रन बनाए। स्मृति मंधाना ने 79 रन और ऋचा घोष ने 49 रन की तेजतर्रार पारी खेली, जबकि शेफाली वर्मा ने 48 रन बनाए। 217 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और महज 69 रन पर ऑलआउट हो गई। मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी और शेफाली वर्मा व स्मृति मंधाना ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 99 रन जोड़े, जो एशियन गेम्स में किसी भी विकेट के लिए तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी बताई गई है। शेफाली ने 29 गेंदों में 48 रन बनाए, जबकि स्मृति मंधाना ने 45 गेंदों पर 79 रन की पारी खेली। इस दौरान स्मृति ने अपने इंटरनेशनल करियर में 11 हजार रन पूरे किए और टी20 क्रिकेट में अपना 37वां अर्धशतक भी लगाया। पारी के आखिरी हिस्से में ऋचा घोष ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 22 गेंदों में 49 रन ठोककर भारत का स्कोर 200 के पार पहुंचा दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम की आधी बल्लेबाज महज 49 रन के स्कोर तक पवेलियन लौट गईं और इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली। श्रीलंका की पूरी टीम 69 रन पर सिमट गई और भारत ने 147 रन से बड़ी जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। यह एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट में भारत का लगातार दूसरा गोल्ड है। इससे पहले 2022 में भी भारतीय टीम ने श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। अब क्रिकेट फैंस की नजर पुरुष टीम पर होगी, जो 24 सितंबर से शुरू होने वाले टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव करने उतरेगी।
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भोपाल l मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पारिवारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस पब्लिक स्कूल, नेहरू नगर में महिला पुलिस कर्मियों के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए 60 बच्चों की क्षमता वाले नवनिर्मित वात्सल्य झूलाघर (डे-केयर सेंटर) का पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा द्वारा शुभारंभ किया गया। झूलाघर की सुविधा से ड्यूटी के दौरान छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को सुविधा एवं राहत मिलेगी। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस विभाग में महिला आरक्षक, महिला सब इंस्पेक्टर, डीएसपी सहित विभिन्न रैंक पर महिला अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। वर्तमान समय में पति-पत्नी दोनों के नौकरीपेशा होने की स्थिति भी सामान्य है। पहले संयुक्त परिवार व्यवस्था में दादा-दादी अथवा परिवार के अन्य सदस्य बच्चों की देखभाल कर लेते थे, लेकिन बदलते समय में नौकरी के लिए परिवार से बाहर रहना पड़ता है। ऐसे में छोटे बच्चों की देखभाल एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के छोटे बच्चों की उचित देखभाल बहुत जरूरी है, ताकि वे निश्चिंत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। पुलिस सेवा की प्रकृति ऐसी है कि कई बार लंबी अवधि तक ड्यूटी करनी पड़ती है, देर रात तक ड्यूटी रहती है तथा त्योहारों के अवसर पर भी पुलिसकर्मियों को अपने दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में झूलाघर जैसी सुविधा बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करने के साथ ही पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सहयोग करेगी। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि बच्चों की देखभाल की समुचित व्यवस्था पुलिस परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। इससे विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यावसायिक दायित्वों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगी। इसी अवसर पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवारों के लिए गरबा कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की तैयारियों एवं अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की गई।
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मध्यप्रदेश के देवास जिले के पुंजापुरा में सेवा संकल्प अभियान के तहत सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक के जरिए 35.42 लाख हितग्राहियों के खातों में पेंशन की राशि ट्रांसफर की। इसी कार्यक्रम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली जुड़े और सेवा संकल्प बाइक यात्रा में शामिल राइडर्स से बातचीत की। उन्होंने यात्रा के दौरान मिले अनुभवों और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से हुए संवाद के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवास के बाइक राइडर दीपेश गोठी से भी बातचीत की। दीपेश ने बताया कि यात्रा के दौरान वे अलग-अलग क्षेत्रों की भाषा और लोगों से जुड़ी बातें सीख रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने वडनगर के व्यापारियों के संपर्क नंबर लिए हैं, क्योंकि वे खुद भी कारोबार से जुड़े हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उन्होंने सेवा के साथ अपना काम भी कर लिया। पीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं में कारोबार और उद्यमिता को लेकर रुचि बढ़ना सकारात्मक संकेत है। हरदा की माहेश्वरी धर्मशाला में भी बाइक राइडर्स से वर्चुअल संवाद हुआ। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क संपर्क का विस्तार हुआ है और गांवों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंची है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि करीब 21 साल पहले बंद हुई मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम की बस सेवाएं फिर शुरू की जा रही हैं। प्रस्तावित बस सेवा नगरीय क्षेत्रों, प्रदेश के भीतर और अंतरराज्यीय मार्गों पर संचालित करने की योजना है, जिससे यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे।
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भोपाल। मध्य प्रदेश में परिवहन सेवाओं के नाम पर पुरानी बसों को मैदान में उतारने और बसों के रंग को लेकर की जा रही बहस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार 10-10 साल पुरानी बसों को कबाड़खाने से निकालकर डेंटिंग-पेंटिंग कराकर सड़क पर उतार रही है और फिर इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। पटवारी ने कहा कि किसी भी नई सेवा की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ होना अच्छी बात है, लेकिन कुछ बसें शुरू करके उसे बड़ी उपलब्धि बताना और लगातार बड़े-बड़े आंकड़े गिनाना सिर्फ प्रचार का हिस्सा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 300 बसें शुरू की जा रही हैं और प्रचार किया जा रहा है। सरकार को यह भी स्वीकार करना चाहिए कि मध्य प्रदेश में पिछले करीब 25 वर्षों से भाजपा की ही सरकार रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में कमियां हैं तो उनकी जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती। उन्होंने कहा, “25 साल से आपकी ही सरकार है। अगर कोई पाप हुआ है तो आपके ही लोगों ने किया है, इसे भी स्वीकार करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार और भाजपा से जुड़े लोग बसों के रंग को लेकर बहस कर रहे हैं, जबकि असली सवाल बसों की उम्र, फिटनेस, सुरक्षा और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं का है। उन्होंने कहा कि सिर्फ डेंटिंग-पेंटिंग और रंग बदलने से 10 साल पुरानी बस नई बस नहीं बन जाती। सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि सड़क पर उतारी जा रही बसों की वास्तविक स्थिति क्या है, उनकी फिटनेस कैसे सुनिश्चित की गई है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया और अब पुरानी बसों को नए रंग-रूप में पेश करके उपलब्धि का प्रचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सुगम सेवा का जिक्र करते हुए कहा कि यदि यह सेवा समाप्त हुई है तो इसकी जिम्मेदारी भी पिछली भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों पर तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को नई शुरुआत का श्रेय लेने के साथ-साथ पुरानी व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए। “सुगम सेवा अगर समाप्त हुई तो उसका दोष भी शिवराज सिंह चौहान की सरकार का था। उन्होंने कहा कि जनता को लंबे भाषणों और विज्ञापनों की नहीं, बल्कि जमीन पर बेहतर और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की जरूरत है। पटवारी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पेट्रोल-डीजल से जुड़े पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि देश की जनता से पेट्रोल-डीजल सस्ता करने को लेकर जो उम्मीदें दिखाई गई थीं, उस पर सरकार को जवाब देना चाहिए। नितिन गडकरी द्वारा देश के सामने कही गई बातों का भी जवाब मिलना चाहिए। जनता जानना चाहती है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर किए गए दावों का क्या हुआ और आम लोगों को राहत क्यों नहीं मिली।
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भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, खसरा-रूबेला, डायरिया एवं मलेरिया नियंत्रण तथा दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए की जा रही कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बालाघाट में महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपसी समन्वय के साथ स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर निरंतर निगरानी, समय पर उपचार, टीकाकरण, पोषण, स्वच्छता और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी रहें। बालाघाट को आदर्श जिले के रूप में विकसित किया जाए उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि गंभीरता, समर्पण और बेहतर समन्वय के साथ सेवा प्रदाय किया जाए तो बालाघाट की सभी पंचायतों को सुमन पंचायत बनाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान प्रयासों को निरंतर बनाए रखते हुए बालाघाट को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श जिले के रूप में विकसित किया जाए। शुक्ल ने कहा कि बालाघाट जैसे जनजातीय एवं भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभागों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिलकर काम करें और मैदानी स्तर पर प्रत्येक गतिविधि की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट कलेक्टर श्री कुमार सत्यम तथा जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि सुमन पंचायत के रूप में पंचायतों को विकसित करने के लिए एक वर्ष की अवधि में शून्य मातृ एवं शिशु मृत्यु सुनिश्चित करना प्रमुख मानकों में शामिल है। गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का चिन्हांकन एवं फॉलोअप, संस्थागत प्रसव, प्रसवोत्तर एवं नवजात देखभाल और समय पर रेफरल जैसी सेवाओं की प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना इसका लक्ष्य है। इन मानकों की सतत पूर्ति और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी के आधार पर पंचायतों को सुमन पंचायत के रूप में विकसित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एएनसी चेकअप का कवरेज 90 प्रतिशत तक पहुंचना महत्वपूर्ण प्रगति है। इसे शत-प्रतिशत तक ले जाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं का समय पर चिन्हांकन, नियमित फॉलोअप तथा आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में समय से भर्ती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बर्थ वेटिंग होम की उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं है। अधिकारी एवं मैदानी अमला पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ कार्य करें। इसी गति से प्रयास जारी रहे तो बालाघाट की सभी पंचायतों को सुमन पंचायत के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बालाघाट में किए जा रहे कार्यों को प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित कर पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बनाने पर जोर दिया। खसरा-रूबेला नियंत्रण के लिए विशेष निगरानी बालाघाट में खसरा नियंत्रण के लिए बुखार एवं दाने वाले मामलों की विशेष निगरानी की जा रही है। ऐसे संदिग्ध मामलों में खसरा-रूबेला की जांच सुनिश्चित की जा रही है। नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान कर उन्हें MR वैक्सीन से सुरक्षित करने के लिए कैच-अप राउंड एवं आउटब्रेक रिस्पॉन्स इम्युनाइजेशन (ORI) गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अब तक लगभग 27 हजार बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि ORI के अंतर्गत 1 से 10 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 15 हजार बच्चों का टीकाकरण किया गया है। संदिग्ध रोगियों को आवश्यकता अनुसार विटामिन-A की खुराक दी जा रही है तथा फीवर-रैश सर्विलांस लगातार जारी है। दुर्गम एवं कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में दूरस्थ गांवों की मैपिंग कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण एवं विशेष सर्विलांस किया जा रहा है। वैक्सीन को दूरस्थ क्षेत्रों तक समय पर पहुंचाने के लिए अल्टरनेट वैक्सीन डिलीवरी (AVD) व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है। डायरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान जिले में दस्त एवं डायरिया नियंत्रण के लिए घर-घर स्तर पर ओआरएस एवं जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अब तक 1,63,902 परिवारों को ओआरएस तथा 1,60,431 परिवारों को जिंक उपलब्ध कराया गया है। गंभीर स्थिति वाले 734 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर सफल उपचार किया गया है। जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार की क्षमता बढ़ाते हुए बाल रोग बेड की संख्या 50 से बढ़ाकर 150 तथा PICU बेड की संख्या 10 से बढ़ाकर 21 की गई है। दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए मोबिलाइजेशन की व्यवस्था की गई है। मलेरिया नियंत्रण के लिए घर-घर स्क्रीनिंग बालाघाट के प्लाज्मोडियम फ़ाल्सीपैरम एंडेमिक क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर बुखार की जांच के लिए 15 टीमें लगातार कार्यरत हैं। इन टीमों द्वारा प्रतिदिन औसतन 300 से अधिक जांच की जा रही हैं। 19 जुलाई 2026 से अब तक 26,865 व्यक्तियों की मलेरिया जांच की गई है, जिसमें 980 मलेरिया प्रकरण पाए गए। इनमें 895 प्लाज्मोडियम फ़ाल्सीपैरम तथा 85 प्लाज्मोडियम वाइवैक्स के प्रकरण शामिल हैं। सभी चिन्हित मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया गया है तथा उपचार पूर्ण कराया जा रहा है। मच्छर नियंत्रण के लिए 71 गांवों के 7,065 घरों में कीटनाशक छिड़काव किया गया है। इसके साथ ही 44 गांवों के 8,610 घरों में थर्मल फॉगिंग की गई है। अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में एक सलाहकार, चार मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर तथा 112 कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर तैनात किए गए हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बिरसा एवं बैहर विकासखंडों में 6 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं। इन मोबाइल इकाइयों के माध्यम से बुखार स्क्रीनिंग, ओपीडी, एएनसी/पीएनसी सेवाएं, एनसीडी एवं टीबी स्क्रीनिंग, दवा वितरण और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग गतिविधियों का विस्तार लगभग 50 गांवों तक किया गया है तथा 10 से अधिक चिकित्सक एवं CHO मैदानी स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं। कुंडेकसा विद्यालय में अस्थायी अस्पताल एवं स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था भी की गई है। बिरसा एवं बैहर क्षेत्र में जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए 600 से अधिक जल स्रोतों को शुद्ध किया गया है। स्कूलों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा समुदाय स्तर पर स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के संबंध में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ी जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 51 नए बॉन्ड डॉक्टर जॉइन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त एएनएम, सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर सहित आवश्यक मैदानी मानव संसाधन की तैनाती की गई है। बालाघाट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान से स्वास्थ्य अधोसंरचना को मिलेगी मजबूती उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के द्वारा बालाघाट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत ₹332 करोड़ लागत के विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न विभागों द्वारा बालाघाट में सुविधाओं एवं अधोसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। योजना अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने का कार्य भी किया जाएगा। योजना के अंतर्गत 22 उप स्वास्थ्य केंद्रों/आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में मरम्मत एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। दुर्गम क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त मोबिलिटी सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विठती तथा सानमुद्दा को 30-बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन तथा घुम्मूर एवं पाथरी के दो उप स्वास्थ्य केंद्रों को 6-बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही 2 नई मोबाइल मेडिकल यूनिट स्वीकृत की गई हैं तथा 10 नवीन उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया है। दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक दवाओं एवं अन्य स्वास्थ्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रोत्साहन आधारित व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। महिला एवं बाल स्वास्थ्य पर विशेष फोकस कलेक्टर बालाघाट कुमार सत्यम ने महिला एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़े किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं का एएनसी चेकअप बढ़कर 90 प्रतिशत हो गया है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान कर उनका नियमित फॉलोअप किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी कारणवश बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो उनके घरों तक हॉट कुक्ड मील पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और नियमित निगरानी पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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रीवा। रीवा में ढाई वर्षीय मासूम बालिका के अपहरण की सूचना मिलते ही मध्यप्रदेश पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के भीतर करीब 100 किलोमीटर दूर सीधी जिले के एक दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र से बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया। पुलिस टीम ने बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंपते हुए अपहरण की घटना में शामिल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मासूम की सकुशल वापसी के लिए पुलिस टीम ने रात में ही लगातार सर्चिंग, घेराबंदी और समन्वित कार्रवाई करते हुए अभियान चलाया। सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ पुलिस तंत्र 23 सितम्बर रात्रि करीब 8:30 बजे बालिका के परिजन द्वारा थाना समान में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उनकी ढाई वर्षीय बालिका घर पर नहीं है तथा आसपास संभावित स्थानों पर तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना समान में अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल पुलिस टीम सक्रिय की गई। पुलिस द्वारा मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। तकनीकी एवं मैदानी स्तर पर प्राप्त सुरागों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। पूछताछ में सामने आया कि बालिका को आंगनवाड़ी केंद्र से बोरी में रखकर दोपहिया वाहन से सीधी जिले की ओर ले जाया गया था। रातभर चला सर्च ऑपरेशन, सीधी से सकुशल मिली मासूम घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में थाना समान की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने रीवा से करीब 100 किलोमीटर दूर सीधी जिले के शिकारगंज के आगे स्थित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचकर लगातार तलाशी और घेराबंदी की। रात में चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया। बालिका को सुरक्षित रीवा लाकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। वहीं पुलिस ने घटना में शामिल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस की यह कार्रवाई मासूम बालिका की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सूचना मिलते ही त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स, तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग, मैदानी स्तर पर सतत प्रयास और टीमवर्क का उदाहरण है।
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भोपाल।थाना कोलार रोड पुलिस ने अंतर्राज्यीय चोर गिरोह का किया पर्दाफास किया है। आरोपियों से नगदी सहित सोने चांदी के जेवरात, बर्तन, सिक्के व मूर्ति, कार तथा मोबाईल फोन बरामद हुए हैं। आरोपियों के विरुद्ध देश के कई राज्यों एवं म.प्र. के कई जिलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। थाना कोलार व क्राईम ब्रांच की संयुक्त टीम ने पूरी कार्यवाही को अंजाम दिया। अपराधों में पूछताछ के लिए आरोपियों को पुलिस रिमाण्ड में लिया गया है। आपको बता दें थाना कोलार रोड भोपाल में 11 सितम्बर को फरियादी विजय कुमार दुबे ने रिपोर्ट किया कि 10 सितंबर को करीबन 9 बजे ड्यूटी पर गए थे। घर पर पत्नी वसुधा दुबे थी जो करीबन 11.30 बजे घर पर ताला लगा कर उज्जैन चली गई थी। चोरों ने घर में रखे लोन के 10 लाख रू. व सोने चांदी के जेवरात, सिक्के व बर्तन तथा मूर्ति चुराकर भाग गए। टीम गठित कर घटना स्थल से सोनकच्छ देवास तक के करीब 1500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले गये। साक्ष्य व हुलिया के आधार पर आरोपीगण दीपक गुर्जर, पवन आर्य, रोहित पाल व देवेन्द्र गुर्जर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी। जिनके द्वारा घटना दिनांक समय चारों आरोपियों द्वारा कार से भोपाल आकर उक्त चोरी करना स्वीकार किया। जिससे प्रकरण में चोरी गयी नगदी, सोने चांदी के आभूषण, बर्तन, मूर्ति व सिक्के जब्त किया गया। अन्य आरोपियों व अन्य प्रकरणों में पूछताछ करने हेतु पुलिस रिमाण्ड लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपीगणों के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों एवं म.प्र. के विभिन्न जिलों के थानों में भी हैं आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं । कार्यवाही में थाना कोलार रोड से थाना प्रभारी कोलार निरीक्षक संजय सिंह सोनी की टीम ने कार्रवाई की।
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