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रायपुर। दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में पिछले एक साल से बाघों की मौजूदगी देखी गई है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सात-आठ बाघ होने की संभावना है। विभाग ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। बाघों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखने और वैज्ञानिक तरीके से डाटा जुटाने के लिए अब संबंधित हर वनमंडल में टाइगर मूवमेंट सेल बनाया जाएगा। वन अधिकारियों को निगरानी के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित वनमंडल में वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) की प्रत्यक्ष निगरानी में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। संबंधित उप वनमंडलाधिकारी को इसका नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। वहीं वन परिक्षेत्र अधिकारियों और बीट अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। विभाग ने बाघों की लोकेशन सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोकेशन प्रसारित होने पर मौके पर लोगों की भीड़ जुट सकती है। इससे बाघ और आम लोगों दोनों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। बाघ द्वारा पालतू पशुओं के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन अमले को तुरंत मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना होगा। वन्यप्राणी की पहचान ठोस और पुख्ता प्रमाणों के आधार पर होने पर मुआवजा प्रकरण तत्काल तैयार कर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर विवाद खत्म होने की उम्मीद है।यह विवाद 1983 से चल रहा है, जब छत्तीसगढ़ का गठन नहीं हुआ था और यह मामला मूल रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच था। समय के साथ कई समझौते हुए, लेकिन वे प्रभावी नहीं हो सके। 2016 में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया। ट्रिब्यूनल ने 28 तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले 44 वर्षों से महानदी जल विवाद का समाधान नहीं हो पाया है। 1983 से दोनों राज्यों के बीच विवाद जल बंटवारे का विवाद जारी है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक से गतिरोध दूर होने की संभावना है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद इस विवाद के शीघ्र समाधान की उम्मीद जगी है।सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को 28 सितंबर 2026 तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, संभावित समझौते के तहत महानदी के कुल 46 मिलियन एकड़ फीट पानी का फार्मूला तैयार किया जा रहा है। इसके अनुसार, लगभग 24 मिलियन एकड़ फीट पानी ओडिशा को और करीब 22 मिलियन एकड़ फीट पानी छत्तीसगढ़ को मिलने की संभावना है। ट्रिब्यूनल के सामने दोनों राज्यों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। ट्रिब्यूनल का आधिकारिक कार्यकाल 13 जनवरी 2027 तक है, लेकिन बातचीत की प्रगति को देखते हुए उम्मीद है कि दीपावली तक इस मामले पर अंतिम सहमति बन सकती है।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे पर गुरुवार को इंदौर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। नितिन नवीन प्रदेश सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के पात्र लोगों को भूमि स्वामी अभिलेख यानी रजिस्ट्री वितरित करने के अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के करीब 30 हजार लाभार्थियों को उनकी जमीन और मकान से जुड़े कानूनी अधिकार दिए जाने हैं। स्वागत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा देने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी वाली जमीन का ड्रोन तकनीक से सर्वे कराया गया है। सर्वे के आधार पर संपत्तियों और उनके अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया, जिसके बाद पात्र लोगों को पंजीकृत डीड देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। इन दोनों का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख व्यक्तिगत संपत्तियों से जुड़े हैं। नितिन नवीन के कार्यक्रम को देखते हुए इंदौर में भी विशेष तैयारियां की गईं। कार्यक्रम स्थल से वे रथ पर सवार होकर रैली में शामिल हुए, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, हेमंत खंडेलवाल और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेता मौजूद रहे।
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मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब है, लेकिन प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से कम है। अब तक करीब 33 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटा पूरा करने के लिए लगभग 4.3 इंच पानी और चाहिए। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। अगर सिस्टम प्रभावी रहा तो मानसून की विदाई से पहले बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है। 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जबकि 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी हिस्सों में भी कई जगह बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज तो कुछ जगह हल्की बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद 19 सितंबर के आसपास बनने वाला नया सिस्टम बारिश को और बढ़ा सकता है। फिलहाल मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय रहा और मानसून ट्रफ भी बनी रही, लेकिन इसका असर व्यापक तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन के समय धूप रही, जबकि मैहर में शाम को बारिश दर्ज की गई। मानसून सीजन 30 सितंबर तक चलेगा और अब इसके खत्म होने में करीब दो सप्ताह का समय बाकी है। प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 88.5 प्रतिशत आंकड़ा पूरा हो चुका है। 18 जिलों में बारिश सामान्य से ज्यादा दर्ज हुई है, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य आंकड़े से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हुई है, वहीं निवाड़ी में सामान्य से करीब 49 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। अब आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाले मौसम सिस्टम यह तय करेंगे कि मानसून की विदाई तक प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े तक पहुंच पाता है या नहीं।
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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एशियन गेम्स-2026 में भारत की बेटियों ने कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल वूमेन्स टीम के फाइनल इवेंट में रजत पदक जीतने पर सुश्री एलावेनिल वलारिवन, सुश्री सोनम उत्तम मस्कर एवं सुश्री विदरसा के. विनोद को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी की यह उपलब्धि युवाओं को प्रेरित करने के साथ ही देश के करोड़ों खेल प्रेमियों को उत्साह से भर देने वाली है।मुख्यमंत्री ने एयर राइफल वूमेन्स टीम के रजत पदक जीतने पर खिलाड़ियों को दीं शुभकामनाएं
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आईटी पार्क का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। आईटी पार्क एवं इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल विकास और नई तकनीकों से जुडऩे के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आईटी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में आईटी पार्क एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो आने वाले समय में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी। है। इन विकास कार्यों का उद्देश्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी नवाचार और उद्योगों के विस्तार को गति देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई तकनीक और नवाचार के माध्यम से प्रदेश के प्रदर्शन को और बेहतर बनाया जा सकता है। आईटी क्षेत्र के विस्तार से प्रदेश में नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और कौशल विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के समग्र विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए निगरानी की जा रही है। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर के विकास, आधुनिक अधोसंरचना, तकनीकी सुविधाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही है।आईटी पार्क परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। परियोजना के लिए लगभग 2.16 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है। इसमें कुल प्रस्तावित 15,480 वर्गमीटर बिल्ट-अप एरिया का निर्माण किया जाना है। इसमें से 11,436 वर्गमीटर क्षेत्र आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मापदंडों का पालन सुनिश्चित करते हुए सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान इंदौर रोड पर उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से निर्माणाधीन पीएम एकता मॉल एवं महाकाल भक्त निवास के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी भी अधिकारियों से ली। उन्होंने दोनों परियोजनाओं के कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे इनका लाभ आमजन और उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर रोड स्थित महामृत्युंजय द्वार का भी निरीक्षण किया। उन्होंने महामृत्युंजय द्वार निर्माण की विशेषताओं एवं इससे संबंधित जानकारी से अधिकारियों को अवगत कराया।
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भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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