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फिल्म ‘हनुमान अंश’ के भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ ने मध्य प्रदेश के सागर जिले के गायक सुनील लोधी को नई पहचान दिलाई है। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील बचपन से ही संगीत और भजनों से जुड़े रहे हैं। शनिवार को गाजियाबाद नगर निगम कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे सुनील ने अपनी सफलता का श्रेय भगवान हनुमान की कृपा को दिया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही हनुमान जी में उनकी आस्था रही है और इसी के चलते वह लगातार भजन गाते रहे। सागर जिले के अगरा गांव के रहने वाले सुनील ने करीब नौ साल की उम्र में गांव के बुजुर्गों से तंबूरा बजाना सीखा था। इसके बाद उन्होंने बुंदेली लोकगीतों और भजनों को अपनी आवाज देना शुरू किया। साल 2019 के बाद उनके संगीत सफर को नई दिशा मिली, जब उनके मामा रोहित साहू ने उनके गाए भजनों और लोकगीतों की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू की। इसी दौरान ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ भजन काफी लोकप्रिय हुआ और सोशल मीडिया के जरिए सुनील की आवाज बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंची। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाया गया ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई…’ भजन सुनील के करियर का एक और अहम पड़ाव बन गया। फिल्मी गीत के जरिए उनकी आवाज देशभर के दर्शकों तक पहुंची और उन्हें नई पहचान मिली। सुनील के मुताबिक, इस गीत के बाद उन्हें दूसरे प्रोजेक्ट्स में गाने के प्रस्ताव भी मिल रहे हैं। उनका कहना है कि आगे भी वह अच्छे भजन और गीत अपने श्रोताओं तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे और फिल्म की सफलता को हनुमान जी की कृपा मानते हैं।
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बिलासपुर। शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद में अभ्यर्थियों को कुछ राहत मिली है। हाई कोर्ट ने 64 अभ्यर्थियों को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी है। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के 20 अगस्त 2026 के आदेश के खिलाफ दायर अपील का निराकरण किया। कहा कि अभ्यर्थी प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकते हैं। प्राधिकारी उस पर शीघ्र विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि भर्ती का विज्ञापन पहले ही जारी हो चुका है, इसलिए इस तथ्य को ध्यान में रखा जाए। बेलगहना निवासी आलोक कुमार घोष, रामानुजगंज निवासी विष्णु दित्य राज, अंबिकापुर निवासी विशाल त्रिपाठी, रायगढ़ के कपु निवासी रित्विक शर्मा समेत 64 अभ्यर्थियों ने याचिका में सिंगल बेंच द्वारा पारित आदेश के बाद अंतर-न्यायालय अपील दायर की थी।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे पर गुरुवार को इंदौर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। नितिन नवीन प्रदेश सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के पात्र लोगों को भूमि स्वामी अभिलेख यानी रजिस्ट्री वितरित करने के अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के करीब 30 हजार लाभार्थियों को उनकी जमीन और मकान से जुड़े कानूनी अधिकार दिए जाने हैं। स्वागत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा देने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी वाली जमीन का ड्रोन तकनीक से सर्वे कराया गया है। सर्वे के आधार पर संपत्तियों और उनके अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया, जिसके बाद पात्र लोगों को पंजीकृत डीड देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को रजिस्ट्री के लिए स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। इन दोनों का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख व्यक्तिगत संपत्तियों से जुड़े हैं। नितिन नवीन के कार्यक्रम को देखते हुए इंदौर में भी विशेष तैयारियां की गईं। कार्यक्रम स्थल से वे रथ पर सवार होकर रैली में शामिल हुए, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, हेमंत खंडेलवाल और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेता मौजूद रहे।
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मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब है, लेकिन प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से कम है। अब तक करीब 33 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटा पूरा करने के लिए लगभग 4.3 इंच पानी और चाहिए। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। अगर सिस्टम प्रभावी रहा तो मानसून की विदाई से पहले बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है। 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जबकि 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी हिस्सों में भी कई जगह बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज तो कुछ जगह हल्की बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद 19 सितंबर के आसपास बनने वाला नया सिस्टम बारिश को और बढ़ा सकता है। फिलहाल मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय रहा और मानसून ट्रफ भी बनी रही, लेकिन इसका असर व्यापक तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन के समय धूप रही, जबकि मैहर में शाम को बारिश दर्ज की गई। मानसून सीजन 30 सितंबर तक चलेगा और अब इसके खत्म होने में करीब दो सप्ताह का समय बाकी है। प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 88.5 प्रतिशत आंकड़ा पूरा हो चुका है। 18 जिलों में बारिश सामान्य से ज्यादा दर्ज हुई है, जबकि इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य आंकड़े से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हुई है, वहीं निवाड़ी में सामान्य से करीब 49 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। अब आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाले मौसम सिस्टम यह तय करेंगे कि मानसून की विदाई तक प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े तक पहुंच पाता है या नहीं।
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भोपाल। बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में जमकर सियासत हो रही। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। बालाघाट जिले में अति विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के 41 बच्चों की कुपोषण से मौत को पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता पारस सकलेचा ने शासन-प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल बच्चों की मौत नहीं, बल्कि बैगा समुदाय की बदहाल स्थिति और सरकारी योजनाओं की विफलता का आईना है। सकलेचा ने कहा कि 2011 की जनगणना में बैगा आबादी 4.15 लाख थी। वर्ष 2019 में 82,258 बैगा परिवार थे, जो 2025 में घटकर 72,788 रह गए। छह वर्षों में करीब 9,500 परिवारों कम हो गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक बैगा सहित अति विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए ₹3,410 करोड़ का प्रावधान किया गया। इसके अलावा अन्य विभागों की राशि और केंद्र से प्रतिवर्ष लगभग ₹100 से ₹160 करोड़ मिलने के बावजूद कुपोषण समाप्त नहीं हुआ। सवाल है कि इतनी बड़ी राशि के बाद भी बैगा बच्चों की मौत क्यों हो रही है और परिवारों क्यों कम हो रहे है? सकलेचा ने कहा कि शासन ने विशेष पिछड़ी जनजाति की करीब 5 लाख महिलाओं को लाड़ली बहना योजना की कंडिका 4.4 की विधि-विरुद्ध एवं योजना के उद्देश्य के प्रतिकूल व्याख्या करते हुए केवल इसलिए अपात्र कर दिया कि उन्हें आहार अनुदान योजना के तहत वर्तमान में ₹1,500 प्रतिमाह मिल रहे हैं । जबकि प्रशासनिक सुविधा के लिए राशी परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में अंतरित की जाती है । उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना की कंडिका 4.4 के तहत ₹1,000 या अधिक की राशि प्राप्त करने वाली महिला को अपात्र माना गया है, लेकिन आहार अनुदान महिला की व्यक्तिगत आय नहीं, बल्कि समुदाय में कुपोषण दूर करने के उद्देश्य से परिवार को दिया जाने वाला अनुदान है , इसे महिला का व्यक्तिगत हितलाभ मानना योजना की मूल भावना के विपरीत है। सकलेचा ने कहा कि आहार अनुदान का उद्देश्य परिवार में कुपोषण दूर करना है, जबकि लाड़ली बहना का उद्देश्य महिलाओं का आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण करना है। दोनों योजनाओं के उद्देश्य अलग और स्वतंत्र हैं। इसलिए एक योजना के अंतर्गत परिवार के लिए दिए जाने वाले पोषण अनुदान को आधार बनाकर महिलाओं को दूसरी योजना से बाहर करना समानता, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत है। सकलेचा ने कहा कि करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी बैगा बच्चे कुपोषण से मरें और उनकी माताओं को महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की लाड़ली बहना योजना से बाहर कर दिया जाए—इससे बड़ी विडंबना क्या होगी ? सकलेचा ने मांग की कि बैगा बच्चों की मौत की उच्चस्तरीय जांच तथा बैगा विकास के लिए किए गए बजट प्रावधान और उसके उपयोग का वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट कराया जाए।
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भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को यदि युवाओं पर वास्तविक विश्वास होता, तो उसे छात्रों के बीच अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खड़ा करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। छात्रों के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगे करना यह बताता है कि कांग्रेस युवाओं का विश्वास हासिल करने के बजाय राजनीतिक प्रबंधन और प्रचार के सहारे अपनी मौजूदगी दिखाने का प्रयास कर रही है। छात्रों के बीच कार्यकर्ता खड़े करना, कांग्रेस की युवाओं से दूरी का प्रमाण है। खंडेलवाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जीत पर सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में युवाओं के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है। देश का युवा राष्ट्रहित, सकारात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण के विचार के साथ आगे बढ़ना चाहता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने NSUI और वामपंथी संगठनों को पीछे छोड़ते हुए अपना जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि युवा केवल नारों और राजनीतिक प्रचार से प्रभावित नहीं होते, बल्कि वे अपने भविष्य, शिक्षा, अवसरों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी राय व्यक्त करते हैं। युवाओं ने स्पष्ट किया—नई पीढ़ी राष्ट्र निर्माण के विचार के साथ आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बड़े-बड़े दावों और प्रायोजित आयोजनों के बजाय युवाओं के बीच अपनी वास्तविक स्वीकार्यता पर आत्ममंथन करना चाहिए। युवा शक्ति को राजनीतिक प्रोपेगेंडा से नहीं, बल्कि विश्वास, अवसर और भारत के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प से जोड़ा जा सकता है। युवा शक्ति प्रायोजित आयोजनों और राजनीतिक प्रोपेगेंडा से नहीं, भारत के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जुड़ती है।
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भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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गुरुग्राम के चर्चित हिट एंड रन मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मंगलवार को पुलिस की एक टीम महिला बाइकर सिया के घर पहुंची और घटना को लेकर उनका बयान दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह पूरा मामला गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर का कथित तौर पर पीछा करने और उनकी बाइक को कार से टक्कर मारने से जुड़ा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया था, जिसके बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। अब पुलिस पीड़िता के बयान के साथ वायरल वीडियो और घटनाक्रम से जुड़े दूसरे साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। सिया ने आरोप लगाया था कि वह अपने दोस्तों के साथ बाइक से जा रही थीं, तभी एक कार लगातार उनका पीछा करने लगी। उनके मुताबिक, कार में मौजूद लोग नशे की हालत में नजर आ रहे थे और कार चालक ने उन्हें रुकने का इशारा किया। स्थिति सुरक्षित नहीं लगने पर उन्होंने बाइक नहीं रोकी। इसके बाद सामने आए एक्शन कैमरा फुटेज में कथित तौर पर कार बाइक के पीछे आती दिखाई देती है और फिर बाइक को टक्कर लगती है। टक्कर के बाद सिया बाइक से गिर गईं और उनकी बाइक कुछ दूरी तक घिसटती चली गई। आरोप है कि घटना के बाद कार चालक मौके से निकल गया। सिया के एक दोस्त ने कार का पीछा कर ट्रैफिक सिग्नल पर चालक से बात करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर चालक ने घटना में अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया और वहां से चला गया। मामले में सामने आई कार के मालिक मनीष ने बताया था कि वाहन उनका है, लेकिन घटना के वक्त कार उनके पास नहीं थी। उनके अनुसार, दो दिन पहले उनके दोस्त कल्याण ने उनसे कार ली थी। मनीष ने कहा था कि वह उस समय काम पर थे और उन्हें घटना की जानकारी सोमवार सुबह मिली। इसके बाद से कल्याण से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन पर जवाब नहीं मिला। दूसरी ओर, वीडियो वायरल होने के बाद सिया ने पुलिस में शिकायत और कानूनी कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वह मीडिया से बातचीत नहीं करना चाहतीं और अपनी पहचान व चेहरा सार्वजनिक नहीं करना चाहतीं। पुलिस अब सिया के बयान, वायरल फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
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