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23,300 करोड़ के प्रस्तावों को हरी झंडी, जंगल, जल, शहर, स्वास्थ्य और आदिवासी गौरव पर फोकस
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

: भोपाल, मंगलवार 3 नवंबर 2026।* मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार को दोगुना करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में एक साथ कई बड़े और दूरदर्शी फैसले लिए गए। सरकार ने प्रदेश के समग्र विकास, पर्यावरण संतुलन और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए कुल 23 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है।

 

बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की विस्तृत जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि यह फैसले प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

 

*फैसला नंबर 1: वनों के संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण के लिए सबसे बड़ी राशि 17,240.55 करोड़*

 

कैबिनेट ने वन विभाग की 9 प्रमुख योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 17 हजार 240 करोड़ 55 लाख रुपये की विशाल राशि मंजूर की है। यह स्वीकृति 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की पूरी अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच साल के लिए दी गई है।

 

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 10,664 करोड़ 79 लाख रुपये कार्यकारी योजना संगठन एवं वन वृत्तों की स्थापना पर खर्च किया जाएगा, ताकि मुख्यालय से लेकर मैदानी वन मंडलों तक प्रशासनिक नियंत्रण, वनों की सुरक्षा और अमले का प्रबंधन मजबूत हो सके।

 

अन्य योजनाएं इस प्रकार हैं -

- *क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना: 1,994.30 करोड़:* विकास कार्यों के लिए ली गई वन भूमि से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए नए पौधे लगाए जाएंगे।

- *राष्ट्रीय उद्यान स्थापना: 1,623.79 करोड़:* प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों का संरक्षण, विकास, सघन गश्त, बाघ मॉनिटरिंग और रेस्क्यू कार्य होंगे।

- *इमारती लकड़ी उत्पादन: 1,107.06 करोड़:* काष्ठ और बांस का वैज्ञानिक विदोहन, परिवहन और विक्रय कर राजस्व अर्जन होगा।

- *जू एवं रेस्क्यू सेंटर: 604.23 करोड़:* उज्जैन और जबलपुर में नए जू एवं रेस्क्यू सेंटर स्थापित कर वन्यजीवों का बाह्य-स्थलीय संरक्षण किया जाएगा।

- इसके अलावा मुख्यालय स्थापना, वन प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन और कार्य योजना निर्माण के लिए भी बजट दिया गया है।

 

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य वनों का 10 वर्षीय वैज्ञानिक प्रबंधन, वनकर्मियों को प्रशिक्षित करना और जैव-विविधता को बचाना है।

 

*फैसला नंबर 2: किसानों के लिए पानी - 4,103.73 करोड़ की 4 बड़ी सिंचाई परियोजनाएं*

 

कैबिनेट ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए 4,103 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए हैं।

 

- *पन्ना की मझगांव मध्यम परियोजना: 69.36 करोड़:* पन्ना जिले में बांध बनाकर 13,060 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से सिंचाई सुविधा विकसित की जाएगी।

- *विदिशा की टेम मध्यम परियोजना: 277.52 करोड़:* लटेरी तहसील में टेम नदी पर बनी इस परियोजना से 12,814 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरत भी पूरी होगी।

- *मऊगंज, सीधी, सिंगरौली की सीतापुर हनुमना माइक्रो परियोजना: 3,620.82 करोड़:* यह सबसे बड़ी परियोजना है। सोन नदी पर बैराज बनाकर 1,20,000 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता विकसित होगी। इससे विंध्य क्षेत्र के हजारों किसानों की किस्मत बदलेगी।

- *उज्जैन की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: 136.03 करोड़:* शिप्रा नदी को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने के लिए यह योजना है। बारिश के पानी को सेवरखेड़ी बैराज से सिलारखेड़ी बांध में जमा किया जाएगा और साल भर जरूरत के अनुसार शिप्रा में छोड़ा जाएगा।

 

*फैसला नंबर 3: शहरों की तस्वीर बदलेगी - 700 करोड़ मंजूर*

 

मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक दो साल और बढ़ा दिया गया है। इसके लिए 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई है।

 

इस योजना के तहत नगरीय निकायों द्वारा पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, आपदा प्रबंधन, मार्गों, नालियों, श्मशान घाट, सामुदायिक भवनों, आमोद-प्रमोद स्थलों, क्रीड़ा स्थलों और रैन बसेरों का निर्माण किया जाता है। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि अगर मुख्यमंत्री कार्यालय से 500 करोड़ तक के अतिरिक्त प्रस्ताव आते हैं तो उनकी प्रशासकीय स्वीकृति दी जा सकेगी।

 

*फैसला नंबर 4: स्वास्थ्य में निवेश और रोजगार - 610.51 करोड़*

 

चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उद्योगों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की 'उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना' को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखा गया है।

 

यह राज्य पोषित योजना है। इसके तहत मध्यप्रदेश हेल्थ सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2020 और 2025 के प्रावधानों के अनुसार पूंजीगत संपत्ति बनाने वाले निवेशकों को सब्सिडी दी जाएगी, ताकि प्रदेश में उद्योग बढ़ें और रोजगार के अवसर पैदा हों।

 

*फैसला नंबर 5: लोकायुक्त को मजबूत करने के लिए 573.85 करोड़*

 

पारदर्शी प्रशासन के लिए लोकायुक्त संगठन के सुचारू संचालन के लिए 573 करोड़ 85 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें 553.85 करोड़ वेतन और कार्यालय व्यय के लिए और 20 करोड़ विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए होंगे।

 

*फैसला नंबर 6: आदिवासी गौरव का सम्मान - जबलपुर संग्रहालय के लिए पद और बजट*

 

जनजातीय कार्य विभाग के तहत जबलपुर में स्थित राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के संचालन के लिए एक सहायक अनुसंधान अधिकारी (संग्रहालय प्रभारी) का नियमित पद सृजित किया गया है और 83 लाख 18 हजार रुपये के वार्षिक व्यय को मंजूरी दी गई है। यह अधिकारी संग्रहालय के संचालन, देखरेख, प्रशासनिक कार्यों और अन्य विभागों से समन्वय का काम करेगा।

Kolar News 3 November 2026

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