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भोपाल, 2 नवंबर 2026।* मध्यप्रदेश सरकार ने इतिहास, संस्कृति और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणा की है। प्रदेश में अब 'वीर भारत फैलोशिप' शुरू की जाएगी, जिसके तहत हर साल दो शोधार्थियों को 12-12 लाख रुपये की फैलोशिप दी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार शाम मंत्रालय में हुई वीर भारत न्यास की कार्यसमिति बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी। बैठक में संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।
*क्या है फैलोशिप?*
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैलोशिप उन लोगों को दी जाएगी जो प्राचीन से आधुनिक इतिहास, भारत के राष्ट्र-स्वरूप को बनाने वाले चिंतकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों और देश-प्रदेश की संस्कृति पर रिसर्च और काम करेंगे। फैलोशिप की अवधि एक साल रहेगी।
*बैतूल और उज्जैन में दो बड़े संग्रहालय*
बैठक में दो बड़े संग्रहालयों को भी मंजूरी मिली -
*1. बैतूल में आरण्यक युगयुगीन जनजातीय संग्रहालय:* यह केंद्र सरकार के सहयोग से बनेगा। इसमें जनजातीय इतिहास गैलरी, स्वाधीनता आंदोलन गैलरी, जनजातीय शोध केंद्र और डिजिटल रिपॉजिटरी होगी।
*2. उज्जैन में वीर भारत संग्रहालय:* उज्जैन के कोठी महल में बन रहे इस संग्रहालय के निर्माण को स्वीकृति दी गई।
*CM बोले - वीरता सिर्फ युद्ध नहीं*
मुख्यमंत्री ने कहा, "वीर भारत का मतलब सिर्फ युद्धों और योद्धाओं की कहानी नहीं है। हमें दुनिया को भारत की आंतरिक शक्ति से परिचित कराना है - हमारे सोचने, एकजुट होने, सवाल करने, रक्षा-त्याग और सृजन करने की शक्ति से।"
उन्होंने कहा कि उज्जैन का वीर भारत संग्रहालय यही भाव दिखाएगा कि भारत में वीरता का अर्थ केवल तलवार उठाना नहीं रहा। यहां योद्धा के साथ ऋषि, शिक्षक, गणितज्ञ, समाज सुधारक, विधि निर्माता और तीर्थ यात्रियों को भी दिखाया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि वीर भारत न्यास 2024 से लगातार सांस्कृतिक गतिविधियां कर रहा है। भोपाल में सदानीरा समागम, महाभारत समागम और उज्जैन में महाकालेश्वर महोत्सव इसी कड़ी में आयोजित हुए हैं।
बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मनीष रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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