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भोपाल, 30 अक्टूबर 2026। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की और सेवाओं की निरंतरता, गुणवत्तापूर्ण परामर्श और जन जागरूकता के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और मरीजों को समय पर उचित परामर्श मिलेगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को सहज, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में अधोसंरचना, इंटरनेट कनेक्टिविटी, विद्युत आपूर्ति और उपकरणों की उपलब्धता के साथ स्वास्थ्यकर्मियों का समुचित प्रशिक्षण आवश्यक है। इन कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर कर संचालन में आने वाली बाधाओं का समयबद्ध निराकरण किया जाए।
समीक्षा में बताया गया कि अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में ई-संजीवनी के माध्यम से 59,914 सामान्य परामर्श कॉल और 10,890 विशेषज्ञ परामर्श कॉल दर्ज किए गए। उप मुख्यमंत्री ने टेलीमेडिसिन सेवाओं के उपयोग में वृद्धि के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं को सक्रिय करने, चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्धारित समय सारणी के अनुसार परामर्श सेवाओं का संचालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को सेवा के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। सेवाओं की नियमित निगरानी कर निष्क्रिय केंद्रों को पुनः सक्रिय करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
अगस्त-सितंबर 2025 में किए गए सुविधा तत्परता आकलन में इंटरनेट कनेक्टिविटी, विद्युत आपूर्ति और प्रशिक्षण से संबंधित कमियां सामने आईं। कुल 2,723 उप स्वास्थ्य केंद्र ऐसे चिन्हित किए गए जहां केवल एक मूलभूत सुविधा की कमी है। उप मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों में आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा ताकि कम समय में अधिक केंद्रों को ई-संजीवनी के लिए तैयार किया जा सके। जिन संस्थाओं में इंटरनेट, बिजली, उपकरण अथवा प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, उनकी अलग-अलग पहचान कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी की सफलता के लिए चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षित होना आवश्यक है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और मेडिकल ऑफिसर्स को ई-संजीवनी की प्रक्रिया, तकनीकी संचालन और मरीजों को उचित रूप से संदर्भित करने संबंधी नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। बॉन्डेड चिकित्सकों को भी ई-संजीवनी की उपयोगिता के प्रति संवेदनशील बनाया जाए। जहां विशेषज्ञ सलाह आवश्यक हो, वहां ई-संजीवनी के माध्यम से परामर्श प्राप्त करने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने जन जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जानकारी दी जाए कि वे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों और मैदानी अमले को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण परामर्श और उचित मार्गदर्शन मिलने से इस सेवा के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी का उद्देश्य केवल तकनीक उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को वास्तविक, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में हिमांशु जायसवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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