Advertisement
नई दिल्ली। नई दिल्ली, केंद्र सरकार की कृषि नीतियों का मूल मंत्र किसानों को सीधी आर्थिक सहायता, सुलभ संस्थागत ऋण, डिजिटल सशक्तिकरण, आधुनिक ग्रामीण ढांचा, प्राकृतिक खेती, मजबूत किसान उत्पादक संगठन (FPO) और दलहन-तिलहन में देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। इस उद्देश्य को जमीन पर साकार करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कृषि भवन में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "फाइल में नहीं, लाइफ में बदलाव" के दृष्टिकोण को आधार बनाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्येय केवल उत्पादन के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि आयात पर विदेशी निर्भरता को समाप्त कर किसानों को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है। इस उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि मंत्रालय के सभी विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों के कामकाज की अब हर महीने नियमित समीक्षा होगी और अधिकारियों के मासिक वित्तीय व भौतिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा बैठक में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 10.77 करोड़ से अधिक विशिष्ट 'फार्मर आईडी' बनने, दलहन व तिलहन में राष्ट्रीय लक्ष्य पार होने, प्राकृतिक खेती के अभूतपूर्व विस्तार और फसल बीमा योजना में 23 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, जिसकी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सराहना की। इसके साथ ही खेतों की मिट्टी की रक्षा और फसलों की सुरक्षा के लिए इसी महीने से शुरू होने जा रहे राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' की रूपरेखा तय की गई। वहीं, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्यों को निरंतर स्वीकृतियां जारी रखने का भरोसा दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने पिछड़ रहे राज्यों और जिलों में प्रशासनिक ढिलाई दूर करने के कड़े निर्देश भी दिए।इसी महीने शुरू होगा 'खेत बचाओ अभियान', किसानों को मिले अधिकतम लाभ
समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिट्टी की घटती सेहत, पराली व अवशेष प्रबंधन और रासायनिक खादों के असंतुलित उपयोग से खेतों को बचाने के लिए एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान के बारे में बताया कि इसी माह 22 तारीख से पूरे देश में सघन 'खेत बचाओ अभियान' शुरू किया जा रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस अभियान की रूपरेखा और जमीनी क्रियान्वयन इतना सुदृढ़ होना चाहिए कि इसका सीधा और अधिकतम लाभ गांव-गांव के अन्नदाताओं तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि खेतों को बचाना केवल कृषि का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य और भावी पीढ़ियों के पोषण की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक और मैदानी अमला सीधे खेतों तक पहुंचेगा, जहां किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक तत्वों के संरक्षण, पराली न जलाने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति व्यावहारिक रूप से जागरूक किया जाएगा।डिजिटल क्रांति का नया अध्याय: 10.77 करोड़ फार्मर आईडी बनकर तैयार
समीक्षा बैठक में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के बारे में जानकारी दी गई कि देश में कुल 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 10.77 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी सफलता से बनाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे देश के छोटे और सीमांत किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार बताया। यह विशिष्ट डिजिटल पहचान बिचौलियों के नेटवर्क को खत्म कर सीधे किसान के बैंक खाते में योजनाओं की सब्सिडी, सस्ता संस्थागत ऋण (KCC), एमएसपी खरीद, फसल बीमा और आपदा राहत पहुंचाने का पारदर्शी माध्यम बन चुकी है, जिससे कागजी औपचारिकताओं का समय समाप्त हो रहा है।
डिजिटल ढांचे के विस्तार के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे में चालू खरीफ सीजन के दौरान अब तक 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल सर्वे पूरा हो चुका है, जिससे फसलों की सटीक जानकारी सीधे सैटेलाइट व मोबाइल ऐप से मिल रही है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 8.03 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल नक्शा शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में फार्मर आईडी और डिजिटल सर्वे की रफ्तार धीमी है, वहां विशेष कैंप लगाकर सभी किसानों को तत्काल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।
दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता: राष्ट्रीय लक्ष्य से आगे निकला देश
देश को आयात पर निर्भरता से मुक्त कराने के लिए चल रहे राष्ट्रीय मिशनों में बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में दलहन का क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता- तीनों ही राष्ट्रीय लक्ष्यों से आगे रहे। देश में 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन दलहन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जबकि बुआई का रकबा 283 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य को पार कर 286.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि वर्तमान मौसमी और नीतिगत परिस्थितियां दलहन उत्पादन के लिए सर्वाधिक अनुकूल हैं, इसलिए इस अवसर को ऐतिहासिक राष्ट्रीय उपलब्धि में तब्दील किया जाना चाहिए।
इसी तरह खाद्य तेल-तिलहन मिशन में वर्ष 2025-26 के दौरान 427 लाख टन के लक्ष्य के विरुद्ध 430.59 लाख टन तिलहन उत्पादन हुआ और बुआई क्षेत्र लक्ष्य से ऊपर 308.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। देश में घरेलू खाद्य तेल का उत्पादन 2023-24 के 121.75 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 129.96 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं ऑयल पाम मिशन में वर्ष 2026-27 के लिए तय 1.19 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र के लक्ष्य के मुकाबले शुरुआती महीनों में ही लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र कवर कर लिया गया है, यानी चालू वर्ष के लक्ष्य का करीब 42 प्रतिशत शुरुआती दौर में ही हासिल हो चुका है।
प्राकृतिक खेती, बागवानी और FPO का अभूतपूर्व विस्तार
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में तय लक्ष्यों से कहीं बेहतर परिणाम मिले हैं। वर्ष 2025-26 में 18.75 लाख किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई और 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया। अब तक देश भर में कुल मिलाकर 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और कुल 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया जा चुका है। इस मिशन को गांव-गांव तक ले जाने के लिए 33,257 से अधिक 'कृषि सखियों' और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को तैनात किया गया है। आंध्र प्रदेश के दौरे का उदाहरण देते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि वहां कम बारिश में भी प्राकृतिक खेती से किसानों को सीधा लाभ हुआ है।
Kolar News
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |