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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने UPI चार्ज मामले पर केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। SC ने कहा मामला कानूनी से ज्यादा तकनीकी बताकर UPI पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने अदालत के सामने दलील रखते हुए स्पष्ट किया कि UPI गेटवे का उपयोग करने वाले लगभग 96% मर्चेंट (व्यापारी) इस नए शुल्क के दायरे से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ विशिष्ट 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाना है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह विषय विशुद्ध कानूनी होने के बजाय मुख्य रूप से तकनीकी और नीतिगत स्वरूप का है। केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि यूपीआई गेटवे का उपयोग करने वाले लगभग 96% मर्चेंट (व्यापारी) इस नए शुल्क के दायरे से बाहर और पूरी तरह से मुक्त हैं। केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए वित्तीय ढांचे के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लागू किया जाएगा।
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