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बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद शहर का सियासी गणित बदल गया है। 80 वार्डों वाले नगर निगम में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है, जबकि भाजपा के खाते में 27 सीटें आई हैं। 10 वार्डों में निर्दलीय और एक वार्ड में आरएलपी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। महापौर चुनाव से पहले कांग्रेस को उस समय बड़ी राहत मिली, जब पार्टी के बागी नेता नवरत्न डागा ने निर्दलीय के तौर पर दाखिल अपना नामांकन वापस ले लिया। कांग्रेस ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा की ओर से वार्ड 13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत मैदान में हैं। महापौर का चुनाव 21 सितंबर को होगा।
निकाय चुनाव में बीकानेर के कई इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव की तुलना में कमजोर रहा। बीकानेर पश्चिम के 39 वार्डों में भाजपा को 23 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। वहीं गंगाशहर जैसे भाजपा के प्रभाव वाले इलाके में भी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ, जहां 16 में से केवल 2 वार्ड भाजपा जीत सकी। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल समेत कई भाजपा नेताओं के प्रभाव वाले इस क्षेत्र के नतीजों ने पार्टी के स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। भाजपा के कई प्रमुख नेताओं से जुड़े प्रत्याशियों को भी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद पार्टी की ओर से नतीजों की समीक्षा की बात कही जा रही है।
कांग्रेस के पास 42 पार्षदों के साथ महापौर चुनाव में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन अब निगाहें 21 सितंबर के मतदान पर हैं। नवरत्न डागा के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस के सामने अंदरूनी चुनौती भी काफी हद तक कम हुई है। दूसरी ओर भाजपा अपने प्रदर्शन का आकलन कर रही है। महापौर चुनाव को लेकर नगर निगम मुख्यालय में प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और नए बोर्ड के गठन के साथ बीकानेर नगर निगम की आगामी राजनीतिक दिशा भी तय होगी।
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