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भोपाल में खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाली तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। बागसेवनिया थाने में दर्ज FIR के अनुसार, तृप्ति ने एक कारोबारी को मध्यप्रदेश पर्यटन निगम की एडिशनल डायरेक्टर बताकर पंचमढ़ी, तवा और रातापानी स्थित होटल-रिसॉर्ट कम कीमत पर लीज पर दिलाने का भरोसा दिया था। इस मामले में उसके भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक यह तृप्ति के खिलाफ चौथी FIR है, जबकि भोपाल में यह दूसरा मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि कारोबारी गगन उपवंशी की मुलाकात अगस्त 2025 में एक रिश्तेदार के जरिए तृप्ति और उसके भाई से हुई थी। तृप्ति ने खुद को IAS अधिकारी और एमपीटी में एडिशनल डायरेक्टर बताकर अपनी पहचान का प्रभाव बनाया और कारोबारी को भरोसे में लिया। इसके बाद होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 49.96 लाख रुपये लिए गए। इसमें 14 दिसंबर को 17 लाख, 23 फरवरी को 13 लाख और 31 मार्च को 15 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी रकम ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ली गई। शिकायत के बाद पुलिस ने तृप्ति, उसके भाई और साथी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तृप्ति फिलहाल अशोकनगर जेल में बंद है। बागसेवनिया पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, ताकि ठगी के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इससे पहले पुलिस ने उसके भोपाल स्थित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई फर्जी अवॉर्ड और ट्रॉफियां बरामद की थीं। इनमें अशोक स्तंभ लगी एक ट्रॉफी भी शामिल थी, जिस पर तृप्ति को अधिकारी के तौर पर दर्शाया गया था। पुलिस को शक है कि ऐसे फर्जी सम्मान और पहचान का इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव जमाने और ठगी के लिए भरोसा पैदा करने में किया जाता था।
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