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Madhya Pradesh Board of Secondary Education (MP बोर्ड) की एक गंभीर गलती सामने आई है, जिसमें रेगुलर पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्राइवेट श्रेणी की मार्कशीट जारी कर दी गई। इस गड़बड़ी से हजारों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं और स्कूल संचालकों ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया है।
जानकारी के अनुसार 10वीं और 12वीं के करीब 15 हजार छात्रों को, जिन्होंने नियमित रूप से स्कूल में पढ़ाई की थी, उन्हें प्राइवेट कैटेगरी में दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की गलती के कारण यह गलत परिणाम जारी हुआ, जिससे छात्रों की शैक्षणिक स्थिति और आगे की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश और अस्थायी मान्यता मिलने के बावजूद कई स्कूलों के छात्रों को प्राइवेट श्रेणी में दिखाया गया। इससे पहले भूमि दस्तावेजों की कमी के कारण करीब 350 स्कूलों की मान्यता रद्द की गई थी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।
बोर्ड सचिव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि जल्द ही सुधारात्मक निर्णय लिया जाएगा। वहीं स्कूल संचालकों का कहना है कि यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और रिजल्ट प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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