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Chabahar Port को लेकर भारत के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि इस परियोजना पर दी गई अमेरिकी प्रतिबंध छूट 26 अप्रैल 2026 को समाप्त होने जा रही है। यह छूट भारत को ईरान में निवेश और संचालन की अनुमति देती रही है, लेकिन इसके आगे बढ़ने को लेकर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
यह पोर्ट भारत की उस रणनीति का अहम हिस्सा है जिसके जरिए वह पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच बनाना चाहता है। साथ ही, क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के मुकाबले चाबहार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए यह परियोजना केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है।
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है, लेकिन अब तक छूट बढ़ाने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। भारत लगातार चाबहार की उपयोगिता को मानवीय सहायता, क्षेत्रीय संपर्क और व्यापारिक मार्ग के रूप में रेखांकित कर रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में अमेरिका इस छूट को आगे बढ़ाता है या भारत को वैकल्पिक रणनीतिक विकल्पों पर विचार करना पड़ता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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