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Aam Aadmi Party ने अपने तीन राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कराने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा है कि वे राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी को पत्र लिखकर संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई की मांग करेंगे। जिन सांसदों के खिलाफ यह कदम उठाया जा रहा है उनमेंRaghav Chadha, Sandeep Pathak औरAshok Kumar Mittal शामिल हैं।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब इन तीनों नेताओं ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। AAP का आरोप है कि यह कदम “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” के दायरे में आता है, जो दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है। पार्टी का कहना है कि वह इस मामले को संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे ले जाएगी।
दूसरी ओर, भाजपा में शामिल हुए नेताओं ने AAP पर अपने मूल विचारों से भटकने का आरोप लगाया है। वहीं AAP नेतृत्व ने इसे “राजनीतिक धोखा” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे पंजाब व पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात करार दिया है। इस घटनाक्रम ने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल बढ़ा दी है।
अब कानूनी नजरिए से मामला दल-बदल विरोधी कानून पर टिका है, जिसके तहत किसी भी सांसद को अयोग्य घोषित करने का अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति के पास होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह साबित नहीं हो पाता कि दो-तिहाई सदस्यों का वैध विलय हुआ है, तो अयोग्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम फैसला संवैधानिक प्रक्रिया और पीठासीन अधिकारी की भूमिका पर निर्भर करेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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