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छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर राज्य में विवाद तेज हो गया है और अब यह मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने इस कानून के कई प्रावधानों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जबरन, धोखाधड़ी या प्रलोभन के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना बताया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कानून में परिभाषाएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे इसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही, याचिका में यह भी कहा गया है कि कठोर सजा और व्यापक प्रावधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकते हैं। इसी आधार पर विधेयक को असंवैधानिक घोषित करने और निरस्त करने की मांग की गई है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। हालांकि, इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में धर्मांतरण कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस और अधिक तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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