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china द्वारा Brahmaputra River पर दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाने की योजना ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट आकार और क्षमता के मामले में Three Gorges Dam से भी बड़ा होगा, जिसे अब तक दुनिया का सबसे शक्तिशाली बांध माना जाता है। चीन के प्रधानमंत्री Li Qiang ने इसे “सदी का प्रोजेक्ट” बताया है, जो देश को स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगा।
इस परियोजना की खासियत इसकी लोकेशन और तकनीकी डिजाइन है। तिब्बत क्षेत्र में नदी के तीव्र ढलान वाले मोड़ का उपयोग करते हुए यह बांध पारंपरिक दीवार संरचना के बिना भी भारी मात्रा में बिजली पैदा करेगा। अनुमान है कि यह बांध हर साल करीब 300 बिलियन किलोवॉट घंटे बिजली उत्पादन करेगा, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना बना सकता है। यह प्रोजेक्ट चीन के 2030 तक कार्बन उत्सर्जन कम करने और 2060 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की रणनीति का अहम हिस्सा है।
हालांकि, India के लिए यह परियोजना कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती है। जल प्रवाह पर नियंत्रण से अरुणाचल प्रदेश और असम जैसे राज्यों में जल संकट और खेती पर असर पड़ सकता है, जबकि अचानक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा यह परियोजना भू-राजनीतिक दबाव का साधन भी बन सकती है। पर्यावरणीय दृष्टि से भी हिमालयी क्षेत्र में इस तरह का निर्माण भूकंप और भूस्खलन के खतरे को बढ़ा सकता है। ऐसे में भारत भी सियांग नदी पर अपने प्रोजेक्ट के जरिए इस चुनौती का मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है।
Patrakar sneha singh
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